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Siddharthnagar News: मिलावट के मामले में 29 साल बाद दो साल की सजा
Mon, 09 Dec 2024 01:04 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
Updated Mon, 09 Dec 2024 01:04 AM IST
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सिद्धार्थनगर। मुख्य न्यायिक श्रद्धा भारतीय ने खाद्य अपमिश्रण निवारण अधिनियम के तहत अपराध के दोषी अभियुक्त नंदलाल को साक्ष्यों के आधार पर दोषी ठहराते हुए दो साल के कारावास की सजा सुनाई है। इसके साथ ही पांच हजार रुपये अर्थदंड भी लगाया है, वहीं फैसला 29 साल बाद आया है। दोषी डुमरियागंज थाना क्षेत्र के हल्लौर का निवासी है।
खाद्य विभाग ने मिलावटी पान मसाले का नमूना 30 मई 1995 को लिया था। परिवाद कथानक के अनुसार तत्कालीन खाद्य निरीक्षक हसन रजा ने नंदलाल के हल्लौर बाजार स्थित परचून किराने की दुकान पर बिक्री के लिए रखे पान मसाले में से पान पराग पान मसाले मं मिलावटी होने के संदेह पर 30 मई 1995 को समय 3 बजे एक पैकेट (100) पान पराग मसाले को 86 रुपये कीमत नकद देकर नमूना जांच के लिए खरीदे। विक्रेता दुकानदार को लिखित नोटिस के दिया और हस्ताक्षर करवाया व उसको बताया कि नमूना जांच के वास्ते भेजा जाएगा।
नमूने की एक सीलबंद पान मसाले की पैकेट को जन विश्लेषक उत्तर प्रदेश लखनऊ को रजिस्टर्ड पार्सल द्वारा भेजा तथा शेष दो सीलबंद पान पराग की पैकेट को स्थानीय अधिकारी सिद्धार्थनगर के कार्यालय में नमूना प्रयोग करने में की गई। सील की छाप फार्म से जनविश्लेषक उत्तर प्रदेश लखनऊ को भेजा।
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जनविश्लेषक उत्तर प्रदेश लखनऊ की जांच रिपोर्ट में पान प्रयाग पान मसाला मिलावटी पाया गया और उसमें मैग्नीशियम व कार्बोनेट निश्चेयात्मक मिला, जो खाद्य पदार्थों के लिए प्रतिबंधित है। इसके बाद सीएमओ ने उस पर परिवाद दाखिल करने की अनुमति प्रदान किया जिसके बाद अभियुक्त के खिलाफ न्यायालय में मुकदमा परिवाद दाखिल किया गया।
न्यायालय ने संज्ञान लेकर विचारण किया और विचारण की समाप्ति पर दोनों पक्षों के अधिवक्ताओं की बहस सुनकर पत्रावली का सम्यक परिशीलन किया।
न्यायालय ने पत्रावली पर उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर अभियुक्त नंदलाल को दोषी ठहराया और सजा के बिंदु पर सुनवाई करके दो वर्ष के कारावास की सजा सुनाई। इसके साथ ही उसपर पांच हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया, जिसे जमा न करने पर उसे तीन महीने का अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा।े
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खाद्य विभाग ने मिलावटी पान मसाले का नमूना 30 मई 1995 को लिया था। परिवाद कथानक के अनुसार तत्कालीन खाद्य निरीक्षक हसन रजा ने नंदलाल के हल्लौर बाजार स्थित परचून किराने की दुकान पर बिक्री के लिए रखे पान मसाले में से पान पराग पान मसाले मं मिलावटी होने के संदेह पर 30 मई 1995 को समय 3 बजे एक पैकेट (100) पान पराग मसाले को 86 रुपये कीमत नकद देकर नमूना जांच के लिए खरीदे। विक्रेता दुकानदार को लिखित नोटिस के दिया और हस्ताक्षर करवाया व उसको बताया कि नमूना जांच के वास्ते भेजा जाएगा।
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नमूने की एक सीलबंद पान मसाले की पैकेट को जन विश्लेषक उत्तर प्रदेश लखनऊ को रजिस्टर्ड पार्सल द्वारा भेजा तथा शेष दो सीलबंद पान पराग की पैकेट को स्थानीय अधिकारी सिद्धार्थनगर के कार्यालय में नमूना प्रयोग करने में की गई। सील की छाप फार्म से जनविश्लेषक उत्तर प्रदेश लखनऊ को भेजा।
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जनविश्लेषक उत्तर प्रदेश लखनऊ की जांच रिपोर्ट में पान प्रयाग पान मसाला मिलावटी पाया गया और उसमें मैग्नीशियम व कार्बोनेट निश्चेयात्मक मिला, जो खाद्य पदार्थों के लिए प्रतिबंधित है। इसके बाद सीएमओ ने उस पर परिवाद दाखिल करने की अनुमति प्रदान किया जिसके बाद अभियुक्त के खिलाफ न्यायालय में मुकदमा परिवाद दाखिल किया गया।
न्यायालय ने संज्ञान लेकर विचारण किया और विचारण की समाप्ति पर दोनों पक्षों के अधिवक्ताओं की बहस सुनकर पत्रावली का सम्यक परिशीलन किया।
न्यायालय ने पत्रावली पर उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर अभियुक्त नंदलाल को दोषी ठहराया और सजा के बिंदु पर सुनवाई करके दो वर्ष के कारावास की सजा सुनाई। इसके साथ ही उसपर पांच हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया, जिसे जमा न करने पर उसे तीन महीने का अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा।े