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टीकाकरण से बचाव वाली बीमारियों का सर्विलेंस करेंगे चिकित्सक
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डब्लूएचओ की ओर से डॉक्टरों का प्रशिक्षण
रूटीन टीकाकरण से हो सकेगा पांच बीमारियों से बचाव
संवाद न्यूज एजेंसी
सिद्धार्थनगर। राजकीय मेडिकल कॉलेज व जिला अस्पताल के चिकित्सक अब बच्चों में नियमित टीकाकरण से बचाव वाली बीमारियों का सर्विलेंस करेंगे। विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्लूएचओ) का मानना है कि रूटीन टीकाकरण से मुख्य रूप से बचाव वाली पांच अलग-अलग तरह की बीमारियों का खतरा टाला जा सकता है। इसके लिए समय से इनकी पहचान कर उपचार को प्राथमिकता देनी होगी, तभी गंभीर बीमारी से बचा जा सकता है। इसके लिए डब्लूएचओ ने चिकित्सकों को कार्यशाला के जरिए प्रशिक्षित किया है।
डब्लूएचओ के सर्विलेंस मेडिकल ऑफिसर (एसएमओ) डॉ. अनार सिंह धाकड़ ने बताया कि बच्चों में रूटीन टीकाकरण से लकवा, खसरा, गलाघोंटू, काली खांसी, नवजात टिटनेस जैसी जानलेवा बीमारियों से छुटकारा पाया जा सकता है। बच्चों में इस तरह की बीमारियों की पहचान करना चुनौती है। इन बीमारियों को पहचान करने के बाद आसानी से उपचार हो सके, इसके लिए मेडिकल कॉलेज व जिला अस्पताल के चिकित्सकों को प्रशिक्षित किया गया है। उन्होंने बताया कि बच्चों की टीका लगने से पहले व बाद में निगरानी बेहद जरूरी है। बच्चों में बीमारी फैले इसके पहले चिकित्सक के माध्यम से बीमारी की पहचान व उपचार ही बच्चों के सेहत के लिए बेहतर रहेगा। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) के भी चिकित्सक प्रशिक्षित हों, इसके भी प्रयास किए जा रहे हैं। प्राचार्य डॉ. सलिल श्रीवास्तव ने बताया कि नवजात बच्चों से लेकर पांच वर्ष की उम्र तक के बच्चों का समय-समय पर रूटीन टीकाकरण किया जा रहा है।
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रूटीन टीकाकरण से हो सकेगा पांच बीमारियों से बचाव
संवाद न्यूज एजेंसी
सिद्धार्थनगर। राजकीय मेडिकल कॉलेज व जिला अस्पताल के चिकित्सक अब बच्चों में नियमित टीकाकरण से बचाव वाली बीमारियों का सर्विलेंस करेंगे। विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्लूएचओ) का मानना है कि रूटीन टीकाकरण से मुख्य रूप से बचाव वाली पांच अलग-अलग तरह की बीमारियों का खतरा टाला जा सकता है। इसके लिए समय से इनकी पहचान कर उपचार को प्राथमिकता देनी होगी, तभी गंभीर बीमारी से बचा जा सकता है। इसके लिए डब्लूएचओ ने चिकित्सकों को कार्यशाला के जरिए प्रशिक्षित किया है।
डब्लूएचओ के सर्विलेंस मेडिकल ऑफिसर (एसएमओ) डॉ. अनार सिंह धाकड़ ने बताया कि बच्चों में रूटीन टीकाकरण से लकवा, खसरा, गलाघोंटू, काली खांसी, नवजात टिटनेस जैसी जानलेवा बीमारियों से छुटकारा पाया जा सकता है। बच्चों में इस तरह की बीमारियों की पहचान करना चुनौती है। इन बीमारियों को पहचान करने के बाद आसानी से उपचार हो सके, इसके लिए मेडिकल कॉलेज व जिला अस्पताल के चिकित्सकों को प्रशिक्षित किया गया है। उन्होंने बताया कि बच्चों की टीका लगने से पहले व बाद में निगरानी बेहद जरूरी है। बच्चों में बीमारी फैले इसके पहले चिकित्सक के माध्यम से बीमारी की पहचान व उपचार ही बच्चों के सेहत के लिए बेहतर रहेगा। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) के भी चिकित्सक प्रशिक्षित हों, इसके भी प्रयास किए जा रहे हैं। प्राचार्य डॉ. सलिल श्रीवास्तव ने बताया कि नवजात बच्चों से लेकर पांच वर्ष की उम्र तक के बच्चों का समय-समय पर रूटीन टीकाकरण किया जा रहा है।
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