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जांच में मौके पर नहीं मिले शौचालय
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बहादुरपुर गांव का मामला, खुनियांव ब्लॉक के नोडल अधिकारी ने की जांच
संवाद न्यूज एजेंसी
इटवा। खुनियांव ब्लॉक क्षेत्र के बहादुरपुर गांव में शौचालय निर्माण में गड़बड़ी की शिकायती हुई थी। नोडल अधिकारी ने 22 शौचालयों की जांच की। यहां मौके पर कहीं भी शौचालय नहीं बना मिला।
खुनियांव ब्लॉक क्षेत्र के बहादुरपुर गांव में शौचालय निर्माण में अनियमितता के मामले की शिकायती हुई थी। विकास खंड खुनियांव के नोडल अफसर रहे एजाजुलहक खान ने सात और 23 जुलाई को ग्राम पंचायत बहादुरपुर की जांच के लिए आवश्यक कागजात की संबंधित सचिव से मांग की थी। मगर पूर्व में तैनात सचिव ने कागजात देना मुनासिब नहीं समझा। खंड विकास अधिकारी के मौखिक कहने का भी कोई असर नहीं हुआ। ऐसे में मजबूर होकर उन्होंने बगैर कागजात शिकायतकर्ता प्रमोद कुमार की शौचालय लाभार्थियों की दी गई सूची को आधार मानकर जांच की और घर-घर जाकर लाभार्थियों से मिलकर हकीकत जानी।
जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी एजाजुलहक खान ने बताया कि शिकायतकर्ता प्रमोद कुमार की दी गई 22 शौचालय लाभार्थियों की सूची में किसी का भी शौचालय नहीं बना पाया गया। न ही पूर्व ग्राम प्रधान अथवा सचिव कोई कागजात ही उपलब्ध करा पाए। जिससे पूर्व प्रधान व ग्राम सचिव की भूमिका संदिग्ध प्रतीत हो रही है। इस संबंध में कार्रवाई के लिए रिपोर्ट डीपीआरओ को भेज दी गई है।
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संवाद न्यूज एजेंसी
इटवा। खुनियांव ब्लॉक क्षेत्र के बहादुरपुर गांव में शौचालय निर्माण में गड़बड़ी की शिकायती हुई थी। नोडल अधिकारी ने 22 शौचालयों की जांच की। यहां मौके पर कहीं भी शौचालय नहीं बना मिला।
खुनियांव ब्लॉक क्षेत्र के बहादुरपुर गांव में शौचालय निर्माण में अनियमितता के मामले की शिकायती हुई थी। विकास खंड खुनियांव के नोडल अफसर रहे एजाजुलहक खान ने सात और 23 जुलाई को ग्राम पंचायत बहादुरपुर की जांच के लिए आवश्यक कागजात की संबंधित सचिव से मांग की थी। मगर पूर्व में तैनात सचिव ने कागजात देना मुनासिब नहीं समझा। खंड विकास अधिकारी के मौखिक कहने का भी कोई असर नहीं हुआ। ऐसे में मजबूर होकर उन्होंने बगैर कागजात शिकायतकर्ता प्रमोद कुमार की शौचालय लाभार्थियों की दी गई सूची को आधार मानकर जांच की और घर-घर जाकर लाभार्थियों से मिलकर हकीकत जानी।
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जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी एजाजुलहक खान ने बताया कि शिकायतकर्ता प्रमोद कुमार की दी गई 22 शौचालय लाभार्थियों की सूची में किसी का भी शौचालय नहीं बना पाया गया। न ही पूर्व ग्राम प्रधान अथवा सचिव कोई कागजात ही उपलब्ध करा पाए। जिससे पूर्व प्रधान व ग्राम सचिव की भूमिका संदिग्ध प्रतीत हो रही है। इस संबंध में कार्रवाई के लिए रिपोर्ट डीपीआरओ को भेज दी गई है।
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