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कोरोना के चलते नहीं लगेगा ककरही मेला, श्रद्धालु केवल डुबकी लगाएंगे
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बांसी राप्ती घाट पर कार्तिक पूर्णिमा नहान की तैयारी का जायजा लेते सीओ अरुन चंद्र, नपा अध्यक्ष मो. ?
- फोटो : SIDDHARTHNAGAR
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कोरोना के चलते नहीं लगेगा ककरही मेला, श्रद्धालु केवल डुबकी लगाएंगे
नेपाल समेत जिले के दूरदराज क्षेत्रों से आते हैं लोग
संवाद न्यूज एजेंसी
सिद्धार्थनगर। कोरोना संक्रमण के कारण बूढ़ी राप्ती नदी के ककरही तट पर 100 वर्षों से लगने वाला कार्तिक पूर्णिमा का मेला इस साल नहीं लगेगा। यहां दशकों से कार्तिक पूर्णिमा मेले का आयोजन होता था। मेले में बड़ी संख्या में श्रद्धालु आते थे और नदी में डुबकी लगाकर पूजा-अर्चना करते थे। मेले में सैकड़ों ठेले, दुकानें और झूले आदि लगते रहे, पर इस बार मेला न लगने से श्रद्धालुओं में निराशा व्याप्त है। हालांकि श्रद्धालु डुबकी लगा सकते हैं। कोतवाली पुलिस ने रविवार शाम को घाट का निरीक्षण किया। इस दौरान घाट की साफ-सफाई और बिजली व्यवस्था को समय से पहले दुरुस्त करने का निर्देश दिया।
जिला मुख्यालय से 15 किलोमीटर दूर बूढ़ी राप्ती नदी के ककरही घाट पर प्रति वर्ष लगने वाला अति प्राचीन कार्तिक पूर्णिमा का मेला इस बार नहीं लग सकेगा। इसके पीछे कोरोना वायरस के बढ़ते संक्रमण को प्रमुख कारण बताया जा रहा है। पड़ोसी मुल्क नेपाल समेत बांसी, नौगढ़ और शोहरतगढ़ तहसील क्षेत्र के दूरदराज क्षेत्रों से लगभग पचास हजार से ज्यादा की संख्या में लोग पहुंचते थे। पचास फीसदी नदी में डुबकी भी लगाते थे। इसके अलावा जोगिया स्थित शक्तिपीठ योगमाया मंदिर पर भी मेला लगता था। नदी के नजदीक होने से स्नान कर दुर्गा मां का दर्शन करते थे। मंदिर के व्यवस्थापक अरविंद कुमार पाठक ने बताया कि योगमाया मंदिर समेत ककरही घाट पर प्राचीन मेला न लगने से श्रद्धालुओं समेत आसपास के नागरिकों में निराशा है। श्रद्धालु मेले का प्रसिद्ध गट्टा खरीदने से नहीं चूकते थे। इस बार मेला और बाजार नहीं लगने से उसकी मिठास से भी दूर रहेंगे। प्रशासनिक अफसरों और पुलिस ने संयुक्त रूप से घाट पर सफाई, विद्युत, सुरक्षा, आपूर्ति, पेयजल, महिलाओं के स्नान के लिए विशेष व्यवस्था का निरीक्षण किया। जोगिया कोतवाली के प्रभारी निरीक्षक आलोक श्रीवास्तव ने बताया कि मेले में संभावित भीड़ को रोक पाना और कोविड-19 दिशानिर्देशों का पालन संभव नहीं था। खाने पीने की दुकानों और भीड़ से संक्रमण फैलने का भी खतरा है। शासन के निर्देश पर मेला नहीं कराने का फैसला लिया गया है।
भारतभारी में अखंड कीर्तन का हुआ शुभारंभ
भारतभारी। नगर पंचायत भारतभारी में कार्तिक पूर्णिमा के अवसर पर भारत भारी में लगने वाला मेला इस वर्ष कोरोना संक्रमण की वजह से नहीं लगेगा। मगर मंदिर पर होने वाले धार्मिक एवं परंपरागत कार्यक्रम प्रबंधन समिति द्वारा कराए जाने का निर्णय लिया गया। इस क्रम में रविवार को अखंड कीर्तन का शुभारंभ व्यवस्थापक रमेश चन्द्र श्रीवास्तव व लेखपालों की टीम के दिशा निर्देश में हुआ। मंदिर पर प्रशासनिक महंत ध्यजमान के रूप में लेखपाल त्रिलोकी नाथ दूबे ने पूजन कराया। मंदिर की साफ-सफाई व सजावट इत्यादि का कार्य भी कराया गया है। कार्तिक पूर्णिमा पर श्रद्धालुओं के स्नान के लिए आवश्यक प्रबंध किए गए हैं। संवाद
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राप्ती नदी के घाट का किया निरीक्षण
बांसी। कार्तिक पूर्णिमा पर राप्ती नदी घाट का निरीक्षण कर नहान की तैयारी का जायजा रविवार को सीओ अरुण चंद्र व नगर पालिका अध्यक्ष मो. इद्रीश पटवारी ने लिया। इस दौरान आवश्यक दिशा-निर्देश दिया। घाट पर साफ-सफाई, प्रकाश, पंडाल व बैरिकेडिंग आदि का निरीक्षण करने के बाद अधिकारियों ने भोर में तीन बजे से ही अलाव की व्यवस्था करने का निर्देश दिया। इस अवसर पर कोतवाल शैलेश कुमार सिंह, ईओ अरविंद कुमार, एसआई जीवन तिवारी, सभासद मो. इरफान सिद्दीकी, गिरीश पांडेय, अमरेंद्र कुमार, रमेश प्रसाद, मो. शमीम आदि मौजूद रहे। संवाद
कार्तिक पूर्णिमा पर स्नान आज
इटवा। कार्तिक पूर्णिमा के अवसर पर होने वाले स्नान की तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। सोमवार को इटवा थाने के ग्राम मेचुकी अकरारी नाले पर व शाहपुर राप्ती नदी पर श्रद्धालु स्नान करेंगे। यहां दूरदराज से भी लोग स्नान के लिए पहुंचते हैं। इसमें महिलाओं की संख्या सबसे अधिक होती है। सुबह स्नान के बाद दिन में घाट के आसपास मेला लगता है। इटवा के निरीक्षक वेद प्रकाश श्रीवास्तव लगातार इन घाटों का निरीक्षण कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखने के लिए पुलिस कर्मियों की ड्यूटी लगाई गई है, जो लोगों पर नजर रखेंगे। संवाद
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नेपाल समेत जिले के दूरदराज क्षेत्रों से आते हैं लोग
संवाद न्यूज एजेंसी
सिद्धार्थनगर। कोरोना संक्रमण के कारण बूढ़ी राप्ती नदी के ककरही तट पर 100 वर्षों से लगने वाला कार्तिक पूर्णिमा का मेला इस साल नहीं लगेगा। यहां दशकों से कार्तिक पूर्णिमा मेले का आयोजन होता था। मेले में बड़ी संख्या में श्रद्धालु आते थे और नदी में डुबकी लगाकर पूजा-अर्चना करते थे। मेले में सैकड़ों ठेले, दुकानें और झूले आदि लगते रहे, पर इस बार मेला न लगने से श्रद्धालुओं में निराशा व्याप्त है। हालांकि श्रद्धालु डुबकी लगा सकते हैं। कोतवाली पुलिस ने रविवार शाम को घाट का निरीक्षण किया। इस दौरान घाट की साफ-सफाई और बिजली व्यवस्था को समय से पहले दुरुस्त करने का निर्देश दिया।
जिला मुख्यालय से 15 किलोमीटर दूर बूढ़ी राप्ती नदी के ककरही घाट पर प्रति वर्ष लगने वाला अति प्राचीन कार्तिक पूर्णिमा का मेला इस बार नहीं लग सकेगा। इसके पीछे कोरोना वायरस के बढ़ते संक्रमण को प्रमुख कारण बताया जा रहा है। पड़ोसी मुल्क नेपाल समेत बांसी, नौगढ़ और शोहरतगढ़ तहसील क्षेत्र के दूरदराज क्षेत्रों से लगभग पचास हजार से ज्यादा की संख्या में लोग पहुंचते थे। पचास फीसदी नदी में डुबकी भी लगाते थे। इसके अलावा जोगिया स्थित शक्तिपीठ योगमाया मंदिर पर भी मेला लगता था। नदी के नजदीक होने से स्नान कर दुर्गा मां का दर्शन करते थे। मंदिर के व्यवस्थापक अरविंद कुमार पाठक ने बताया कि योगमाया मंदिर समेत ककरही घाट पर प्राचीन मेला न लगने से श्रद्धालुओं समेत आसपास के नागरिकों में निराशा है। श्रद्धालु मेले का प्रसिद्ध गट्टा खरीदने से नहीं चूकते थे। इस बार मेला और बाजार नहीं लगने से उसकी मिठास से भी दूर रहेंगे। प्रशासनिक अफसरों और पुलिस ने संयुक्त रूप से घाट पर सफाई, विद्युत, सुरक्षा, आपूर्ति, पेयजल, महिलाओं के स्नान के लिए विशेष व्यवस्था का निरीक्षण किया। जोगिया कोतवाली के प्रभारी निरीक्षक आलोक श्रीवास्तव ने बताया कि मेले में संभावित भीड़ को रोक पाना और कोविड-19 दिशानिर्देशों का पालन संभव नहीं था। खाने पीने की दुकानों और भीड़ से संक्रमण फैलने का भी खतरा है। शासन के निर्देश पर मेला नहीं कराने का फैसला लिया गया है।
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भारतभारी में अखंड कीर्तन का हुआ शुभारंभ
भारतभारी। नगर पंचायत भारतभारी में कार्तिक पूर्णिमा के अवसर पर भारत भारी में लगने वाला मेला इस वर्ष कोरोना संक्रमण की वजह से नहीं लगेगा। मगर मंदिर पर होने वाले धार्मिक एवं परंपरागत कार्यक्रम प्रबंधन समिति द्वारा कराए जाने का निर्णय लिया गया। इस क्रम में रविवार को अखंड कीर्तन का शुभारंभ व्यवस्थापक रमेश चन्द्र श्रीवास्तव व लेखपालों की टीम के दिशा निर्देश में हुआ। मंदिर पर प्रशासनिक महंत ध्यजमान के रूप में लेखपाल त्रिलोकी नाथ दूबे ने पूजन कराया। मंदिर की साफ-सफाई व सजावट इत्यादि का कार्य भी कराया गया है। कार्तिक पूर्णिमा पर श्रद्धालुओं के स्नान के लिए आवश्यक प्रबंध किए गए हैं। संवाद
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राप्ती नदी के घाट का किया निरीक्षण
बांसी। कार्तिक पूर्णिमा पर राप्ती नदी घाट का निरीक्षण कर नहान की तैयारी का जायजा रविवार को सीओ अरुण चंद्र व नगर पालिका अध्यक्ष मो. इद्रीश पटवारी ने लिया। इस दौरान आवश्यक दिशा-निर्देश दिया। घाट पर साफ-सफाई, प्रकाश, पंडाल व बैरिकेडिंग आदि का निरीक्षण करने के बाद अधिकारियों ने भोर में तीन बजे से ही अलाव की व्यवस्था करने का निर्देश दिया। इस अवसर पर कोतवाल शैलेश कुमार सिंह, ईओ अरविंद कुमार, एसआई जीवन तिवारी, सभासद मो. इरफान सिद्दीकी, गिरीश पांडेय, अमरेंद्र कुमार, रमेश प्रसाद, मो. शमीम आदि मौजूद रहे। संवाद
कार्तिक पूर्णिमा पर स्नान आज
इटवा। कार्तिक पूर्णिमा के अवसर पर होने वाले स्नान की तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। सोमवार को इटवा थाने के ग्राम मेचुकी अकरारी नाले पर व शाहपुर राप्ती नदी पर श्रद्धालु स्नान करेंगे। यहां दूरदराज से भी लोग स्नान के लिए पहुंचते हैं। इसमें महिलाओं की संख्या सबसे अधिक होती है। सुबह स्नान के बाद दिन में घाट के आसपास मेला लगता है। इटवा के निरीक्षक वेद प्रकाश श्रीवास्तव लगातार इन घाटों का निरीक्षण कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखने के लिए पुलिस कर्मियों की ड्यूटी लगाई गई है, जो लोगों पर नजर रखेंगे। संवाद