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Siddharthnagar News: भवसागर पार करने के लिए राम नाम का लें सहारा
Thu, 04 Jun 2026 03:00 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
Updated Thu, 04 Jun 2026 03:00 AM IST
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सकारपार। बांसी कस्बा स्थित राप्ती नदी के तट पर नव दुर्गा राधा कृष्ण मंदिर में चल रही नौ दिवसीय सहस्त्र चंडी महायज्ञ के दौरान कथा वाचक व्यास पं. रवींद्र शास्त्री ने शनिवार को राम कथा का रसपान कराया गया। कथा को सुनकर पंडाल में उपस्थित श्रोता भाव विभोर हो गए। कथा वाचक ने बताया कि भवसागर पार करने का एक ही मंत्र राम नाम है। राम-राम जपने से मन को शांति मिलती है। मन के अंदर का चिड़चिड़ापन खत्म हो जाता है। हमें जीवन की कठिन परिस्थितियों से उबारने में राम नाम मंत्र बहुत उपयोगी है।
उन्होंने बताया कि तपस्या के बिना भगवान नही मिलते हैं। एक बार रावण ने ब्रह्माजी की घोर तपस्या की। जब रावण की तपस्या से ब्रह्माजी प्रसन्न हुए तब ब्रह्मा ने रावण से वरदान मांगने को कहा। रावण ने ब्रह्मा कहा कि हे पितामह आप हमें अमर होने का वरदान दें। रावण ने कहा कि नर और वानर को छोड़ कर अन्य किसी के हाथों से मेरी मृत्यु न हो। इस तरह का वरदान पाने के बाद रावण का अत्याचार बढ़ गया। वह ऋषि-मुनियों पर अत्याचार करने लगा, यज्ञ मंडप आदि जलाने लगा। भगवान ने अवतरित होकर रावण का वध किया और अंत में रावण ने राम राम का जाप करते हुए अपने शरीर का त्याग किया। संवाद
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उन्होंने बताया कि तपस्या के बिना भगवान नही मिलते हैं। एक बार रावण ने ब्रह्माजी की घोर तपस्या की। जब रावण की तपस्या से ब्रह्माजी प्रसन्न हुए तब ब्रह्मा ने रावण से वरदान मांगने को कहा। रावण ने ब्रह्मा कहा कि हे पितामह आप हमें अमर होने का वरदान दें। रावण ने कहा कि नर और वानर को छोड़ कर अन्य किसी के हाथों से मेरी मृत्यु न हो। इस तरह का वरदान पाने के बाद रावण का अत्याचार बढ़ गया। वह ऋषि-मुनियों पर अत्याचार करने लगा, यज्ञ मंडप आदि जलाने लगा। भगवान ने अवतरित होकर रावण का वध किया और अंत में रावण ने राम राम का जाप करते हुए अपने शरीर का त्याग किया। संवाद
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