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Siddharthnagar News: आम की फसल को बचाने के लिए करें सिंचाई व दवा का छिड़काव
Tue, 16 Apr 2024 03:50 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
Updated Tue, 16 Apr 2024 03:50 AM IST
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फोटो-
कृषि विज्ञान केंद्र, सोहना के वैज्ञानिक डॉ. प्रवीण ने दी जानकारी
संवाद न्यूज एजेंसी
भनवापुर। आम के बागों में बौर के बाद दाने अब छोटे फलों का रूप ले रहे हैं। तापमान बढ़ने से आम के बागों में नमी की कमी होती जा रही है, जिससे आम के छोटे फल गिर रहे हैं। फलों को बचाने के लिए किसानों को अपने बागों में पर्याप्त नमी बनाए रखने के साथ ही जरूरी दवाओं का छिड़काव भी करना चाहिए।
उक्त जानकारी कृषि विज्ञान केंद्र सोहना के वैज्ञानिक डॉ. प्रवीण कुमार मिश्र ने दी। उन्होंने बताया कि आम के टिकोलों को गिरने से बचाने के लिए बागों में उपयुक्त वातावरण बनाए रखने की जरूरत है। समय पर उचित देखभाल न करने से आम के छोटे फल गिरने लगते हैं। इसके अलावा फल बड़ा होने पर फटने या फिर निचला हिस्सा काला होने लगता है। इसकी प्रमुख वजह बागों में नमी का न होना। आम के बाग के पास ईंट के भट्टे, बाग की मिट्टी बलुई होने से मृदा में नमी ज्यादा समय तक नहीं टिकती है।
आम के टिकोलों को गिरने व फटने से बचाने के लिए सबसे पहले बागों में उचित नमी बनाए रखें। उन्होंने बताया कि बाग का दस दिनों के अंतराल पर सिंचाई करें और इमिडाक्लोप्रिड, हेक्साकोनाजोल के अलावा प्लेनोफिक्स हार्मोन दवा की उचित मात्रा छिड़काव करें। यदि बाग में तना छेदक व पत्ती काटने वाले कीटों का प्रकोप है तो क्विनालफोस दवा का घोल बनाकर छिड़काव करें।
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कृषि विज्ञान केंद्र, सोहना के वैज्ञानिक डॉ. प्रवीण ने दी जानकारी
संवाद न्यूज एजेंसी
भनवापुर। आम के बागों में बौर के बाद दाने अब छोटे फलों का रूप ले रहे हैं। तापमान बढ़ने से आम के बागों में नमी की कमी होती जा रही है, जिससे आम के छोटे फल गिर रहे हैं। फलों को बचाने के लिए किसानों को अपने बागों में पर्याप्त नमी बनाए रखने के साथ ही जरूरी दवाओं का छिड़काव भी करना चाहिए।
उक्त जानकारी कृषि विज्ञान केंद्र सोहना के वैज्ञानिक डॉ. प्रवीण कुमार मिश्र ने दी। उन्होंने बताया कि आम के टिकोलों को गिरने से बचाने के लिए बागों में उपयुक्त वातावरण बनाए रखने की जरूरत है। समय पर उचित देखभाल न करने से आम के छोटे फल गिरने लगते हैं। इसके अलावा फल बड़ा होने पर फटने या फिर निचला हिस्सा काला होने लगता है। इसकी प्रमुख वजह बागों में नमी का न होना। आम के बाग के पास ईंट के भट्टे, बाग की मिट्टी बलुई होने से मृदा में नमी ज्यादा समय तक नहीं टिकती है।
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आम के टिकोलों को गिरने व फटने से बचाने के लिए सबसे पहले बागों में उचित नमी बनाए रखें। उन्होंने बताया कि बाग का दस दिनों के अंतराल पर सिंचाई करें और इमिडाक्लोप्रिड, हेक्साकोनाजोल के अलावा प्लेनोफिक्स हार्मोन दवा की उचित मात्रा छिड़काव करें। यदि बाग में तना छेदक व पत्ती काटने वाले कीटों का प्रकोप है तो क्विनालफोस दवा का घोल बनाकर छिड़काव करें।
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