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सवालों के घेरे में तीन पूर्व बीएसए व पांच बाबू, होगी जांच
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सवालों के घेरे में तीन पूर्व बीएसए व पांच बाबू, होगी जांच
सिद्धार्थनगर। शिक्षक भर्ती में फर्जीवाड़ा के मामले में पुलिस एवं एसटीएफ की कार्रवाई में तेजी आ गई है। फर्जीवाड़ा कराने वाले गिरोह के सरगना पर गैंगस्टर की कार्रवाई करने के साथ उसे गिरफ्तार किया जा चुका है। फर्जीवाड़े के दौरान और आसपास के वर्षों में जिले में तैनात रहे तीन बीएसए तथा पांच से अधिक बाबू, पुलिस के निशाने पर हैं। इनसे पूछताछ के साथ कार्रवाई भी हो सकती है।
जिले में शिक्षक भर्ती प्रक्रिया में फर्जीवाड़े की नींव तो बहुत पहले वर्ष 1994 से ही पड़ चुकी थी। वर्ष 2009 से इसका बड़े पैमाने पर विस्तार हो गया। इस दौरान हुई शिक्षक भर्ती प्रक्रिया में दूसरे के शैक्षिक अभिलेखों के आधार पर फर्जीवाड़ा करते हुए कई अयोग्य लोगों को शिक्षक बना दिया गया। बाद में इस फर्जीवाड़े में शामिल गिरोह के सरगना व देवरिया निवासी राकेश सिंह पर आठ से 10 लाख रुपये प्रति व्यक्ति से वसूल कर उन्हें शिक्षक की नौकरी दिलाने का आरोप लगा।
वर्ष 2018 और 2019 में शैक्षिक अभिलेखों के सत्यापन एवं जांच होने के बाद फर्जीवाड़े का पता चलना शुरू हुआ। इसके साथ मानव संपदा पोर्टल पर सभी कर्मचारियों के दस्तावेज अपलोड होने से भी कई फर्जी शिक्षकों के नाम सामने आए। इनमें दूसरे जनपद में तैनात शिक्षकों के अभिलेख पर यहां भी फर्जी शिक्षक कार्य करते पाए गए।
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पुलिस एवं एसटीएफ की जांच में अब तक 122 फर्जी शिक्षक पकड़े जा चुके हैं। विभाग ने इन्हें बर्खास्त भी कर दिया है। पुलिस की पकड़ में आए राकेश सिंह के संपर्क में रहे तीन पूर्व बीएसए समेत कार्यालय में तैनात पांच बाबू भी जांच की जद में हैं। पुलिस उनसे पूछताछ करने की तैयारी में है। इनमें कुछ बाबू फर्जीवाड़े मामले में पहले गिरफ्तार भी हो चुके हैं। एएसपी सुरेश चंद्र रावत ने कहा कि मामले की जांच चल रही है। जो भी जांच के दायरे में आएगा, उससे पूछताछ होगी। कुछ की गिरफ्तारी समेत अन्य कार्रवाई भी हो सकती है।
राकेश के भी शैक्षिक अभिलेख की जांच
एसटीएफ की टीम ने राकेश सिंह समेत सभी फर्जी शिक्षकों के शैक्षिक अभिलेख उपलब्ध कराने को कहा है। उसके बाद विभाग राकेश सिंह समेत अन्य के शैक्षिक अभिलेख की खंगालने में जुट गई है। इसके साथ ही उस पर विभागीय कार्रवाई की भी रूपरेखा तैयार की जा रही है। बीएसए देवेंद्र कुमार पांडेय ने कहा कि फर्जी शिक्षकों के मामले में नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
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सिद्धार्थनगर। शिक्षक भर्ती में फर्जीवाड़ा के मामले में पुलिस एवं एसटीएफ की कार्रवाई में तेजी आ गई है। फर्जीवाड़ा कराने वाले गिरोह के सरगना पर गैंगस्टर की कार्रवाई करने के साथ उसे गिरफ्तार किया जा चुका है। फर्जीवाड़े के दौरान और आसपास के वर्षों में जिले में तैनात रहे तीन बीएसए तथा पांच से अधिक बाबू, पुलिस के निशाने पर हैं। इनसे पूछताछ के साथ कार्रवाई भी हो सकती है।
जिले में शिक्षक भर्ती प्रक्रिया में फर्जीवाड़े की नींव तो बहुत पहले वर्ष 1994 से ही पड़ चुकी थी। वर्ष 2009 से इसका बड़े पैमाने पर विस्तार हो गया। इस दौरान हुई शिक्षक भर्ती प्रक्रिया में दूसरे के शैक्षिक अभिलेखों के आधार पर फर्जीवाड़ा करते हुए कई अयोग्य लोगों को शिक्षक बना दिया गया। बाद में इस फर्जीवाड़े में शामिल गिरोह के सरगना व देवरिया निवासी राकेश सिंह पर आठ से 10 लाख रुपये प्रति व्यक्ति से वसूल कर उन्हें शिक्षक की नौकरी दिलाने का आरोप लगा।
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वर्ष 2018 और 2019 में शैक्षिक अभिलेखों के सत्यापन एवं जांच होने के बाद फर्जीवाड़े का पता चलना शुरू हुआ। इसके साथ मानव संपदा पोर्टल पर सभी कर्मचारियों के दस्तावेज अपलोड होने से भी कई फर्जी शिक्षकों के नाम सामने आए। इनमें दूसरे जनपद में तैनात शिक्षकों के अभिलेख पर यहां भी फर्जी शिक्षक कार्य करते पाए गए।
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पुलिस एवं एसटीएफ की जांच में अब तक 122 फर्जी शिक्षक पकड़े जा चुके हैं। विभाग ने इन्हें बर्खास्त भी कर दिया है। पुलिस की पकड़ में आए राकेश सिंह के संपर्क में रहे तीन पूर्व बीएसए समेत कार्यालय में तैनात पांच बाबू भी जांच की जद में हैं। पुलिस उनसे पूछताछ करने की तैयारी में है। इनमें कुछ बाबू फर्जीवाड़े मामले में पहले गिरफ्तार भी हो चुके हैं। एएसपी सुरेश चंद्र रावत ने कहा कि मामले की जांच चल रही है। जो भी जांच के दायरे में आएगा, उससे पूछताछ होगी। कुछ की गिरफ्तारी समेत अन्य कार्रवाई भी हो सकती है।
राकेश के भी शैक्षिक अभिलेख की जांच
एसटीएफ की टीम ने राकेश सिंह समेत सभी फर्जी शिक्षकों के शैक्षिक अभिलेख उपलब्ध कराने को कहा है। उसके बाद विभाग राकेश सिंह समेत अन्य के शैक्षिक अभिलेख की खंगालने में जुट गई है। इसके साथ ही उस पर विभागीय कार्रवाई की भी रूपरेखा तैयार की जा रही है। बीएसए देवेंद्र कुमार पांडेय ने कहा कि फर्जी शिक्षकों के मामले में नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।