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कटान स्थलों पर बचाव कार्य नहीं, बाढ़ आई तो मचेगी तबाही

Wed, 22 Jun 2022 10:33 PM IST
Gorakhpur Bureau गोरखपुर ब्यूरो
Updated Wed, 22 Jun 2022 10:33 PM IST
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There is no rescue work at the cutting sites, if there is a flood, there will be destruction
उसका क्षेत्र में छितरापार गांव के पास बूढ़ी राप्ती नदी का कटान स्थल। संवाद - फोटो : SIDDHARTHNAGAR
कटान स्थलों पर बचाव कार्य नहीं, बाढ़ आई तो मचेगी तबाही
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नदियों के किनारे 60 से अधिक संवेदनशील और अति संवेदनशील कटान स्थल चिह्नित
बांधों को मरम्मत की दरकार, सुरक्षा इंतजाम नाकाफी
सिद्धार्थनगर। जर्जर बांधों का मरम्मत एवं कटान स्थलों पर बचाव कार्य नहीं होने से बरसात के मौसम में बाढ़ आई तो जिले में तबाही मचनी तय है। इससे कटान स्थलों एवं बांधों के किनारे रहने वाले ग्रामीणों में भय व्याप्त है। हालांकि प्रशासन ने बाढ़ के दौरान सूचना एकत्रित करने एवं सतर्कता बरतने के लिए कलेक्ट्रेट स्थित कंट्रोल रूम में अधिकारियों और कर्मचारियों की तैनात कर दी है।
बाढ़ से बचाव के लिए जिले में बहने वाली राप्ती, बूढ़ी राप्ती, कूड़ा व बानगंगा आदि नदियों के किनारे 450 किमी लंबे 39 बांधों का निर्माण हुआ है। जबकि सिंचाई विभाग की तरफ से विभिन्न नदियों के किनारे 60 से अधिक संवेदनशील और अति संवेदनशील कटान स्थल चिह्नित किए गए है। जर्जर बांधों की स्थिति यह है प्रत्येक वर्ष बाढ़ के दौरान जिले में कोई न कोई बांध टूट जाता है। इससे आसपास के गांवों में जलभराव से तबाही मच जाती है।
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वहीं कटान स्थलों पर बचाव कार्य नहीं होने से प्रत्येक वर्ष लोगों के मकान और कृषि योग्य भूमि नदी में विलीन हो जाते हैं। पिछले वर्ष बाढ़ के दौरान डुमरियागंज-बांसी बांध में जगह-जगह रिसाव होने लगा था। इसके अलावा सोनखर-हाटा बांध, बांसी-पनघटिया और जमींदारी बांध में बारिश से हुए कटान और चूहों के बिल के कारण जर्जर बांध की टूटने की स्थिति उत्पन्न हो गई थी। अब तक इन बांधों पर मरम्मत एवं बचाव कार्य नहीं हो पाए है।
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12 अधिकारी व 36 कर्मचारी हुए तैनात
कलेक्ट्रेट सभागार स्थित जिला आपदा कंट्रोल रूम में बाढ़ एवं अन्य आपदा से संबंधित सूचना प्राप्त कर उच्चधिकारियों को अवगत कराने के लिए 12 अधिकारी व 36 कर्मचारी की तैनाती की गई है। इसके तहत प्रत्येक माह को चार साप्ताहिक हिस्से में बांटा गया है। सप्ताह के प्रत्येक दिन को भी आठ-आठ घंटे के तीन हिस्से में बांटते हुए अधिकारियों एवं कर्मचारियों की तैनाती की गई है। ये अधिकारी एवं कर्मचारी कंट्रोल रूम के माध्यम से मिलने वाली सूचनाओं को एकत्रित कर डीएम व एडीएम को रिपोर्ट भेजेंगे।

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इन बांधों पर मंडराता है खतरा
पिछले वर्ष बाढ़ के दौरान बांसी-डुमरियागंज बांध, लखनापार-बैदौला बांध, सोनखर-हाटा बांध, बांसी-पनघटिया और जमींदारी बांध पर रिसाव होने लगा था। उस दौरान रिसाव रोकने और बांध को टूटने से बचाने के लिए सिंचाई विभाग के कर्मियों को रात-दिन कड़ी मशक्कत करनी पड़ी थी। आसपास के गांव के लोग भी बांध बचाने में जुटे हुए थे।
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