{"_id":"6855a4f5aba0fa567c0ff6d3","slug":"there-is-no-cover-up-for-her-husbands-actionsmother-stood-with-her-daughter-siddharthnagar-news-c-227-1-sgkp1033-139712-2025-06-20","type":"story","status":"publish","title_hn":"Siddharthnagar News: पति की करतूत पर पर्दादारी नहीं ...बेटी के साथ खड़ी हुईं मां","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Siddharthnagar News: पति की करतूत पर पर्दादारी नहीं ...बेटी के साथ खड़ी हुईं मां
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
संवाद न्यूज एजेंसी
सिद्धार्थनगर। घर में होने वाली हिंसा और अपनों द्वारा अपनों पर किए जाने वाले जुर्म पर लोग अकसर खामोश हो जाते हैं। उस पर पर्दा डालने की कोशिश करते हैं। इसका नतीजा अपराध करने वालों के हौसले बुलंद हो जाते हैं।
लेकिन जिले में अपनों की ओर से किए गए अत्याचार की शिकार बेटियों को न्याय दिलाने में पति के खिलाफ न सिर्फ आवाज बुलंद करने का कार्य किया है। बल्कि आगे बढ़कर केस दर्ज करवाया और लड़कर सजा दिलाने का कार्य किया है।
यह न सिर्फ सजा है, बल्कि समाज में अपराध के खिलाफ मुखर होने का संदेश भी है। हालांकि समाजशास्त्री इस जधन्य अपराध को समाज के लिए घातक बता रहे हैं। जबकि, विधि विशेषज्ञ अपराध करने वाला घर का हो या बाहर का, उसके खिलाफ आगे आने की जरूरत है।
विज्ञापन
क्योंकि, हर अपराध करने वालों को सजा जरूर मिलती है।
मां हुई मुखर, तो दरिंदे पिता को मिली सजा : त्रिलोकपुर थाना क्षेत्र के एक गांव में अपनी ही दिव्यांग बेटी से दरिंदगी करने वाले पिता को सजा मिली तो लोगोंं ने उसे सही ठहराया है। वहीं, दूसरी तरफ लोगों में गुस्सा और आक्रोश रहा।
लोगों में चर्चा रही कि अकसर लोग घर में अपनों की ओर से किए जाने वाले अपराध पर पर्दा डालने का काम करते हैं। कहीं लोकलाज का डर तो कहीं, अत्याचार करने वाले का भय।
इसलिए आगे बढ़कर लोग नहीं आते हैं कि बात बाहर न आने पाए इससे बदनामी होगी। वहीं, अनदेखी और जुर्म सहने वाला कई बार अवसाद में जाकर घातक कदम उठा लेता है।
आसपास के लोगों को जानकारी भी नहीं हो पाती है। लेकिन, इस मामले में अपराध की जानकारी मिलने के बाद मां न सिर्फ आगे आई, बल्कि न्याय दिलाने तक डटकर लड़ती रही। उसके मनोबल को बढ़ाने और सजा दिलाने में पुलिस ने भी पूरी कोशिश की। समय से गवाही, साक्ष्य उपलब्ध कराकर सजा दिलाने में भूमिका निभाई।
यह मामले में जिसमें पुलिस की जांच और विवेचना से कम समय में मिली सजा : वर्ष 2019 में मिश्रौलिया थाना क्षेत्र के एक गांव में घटित बेटी के साथ यौन उत्पीड़न के मामले में पुलिस ने केस दर्ज किया।
केस दर्ज हाेने से लेकर विवेचना और सुनवाई फिर सजा मात्रा 38 दिन में ही हो गई। इसमें पुलिस ने केस दर्ज करने के साथ ही विवेचना लटकाने के बजाय तेजी से काम किया, चार्जशीट न्यायालय में दाखिल की।
गवाहों को हाजिर करवाया और 38 दिन में आजीवन कारावास की सजा हुई है। वर्ष 2023 में पथरा थाना क्षेत्र में एक यौन उत्पीड़न का मामला सामने आया। इसमें पुलिस ने केस दर्ज करने के साथ ही विवेचना पूरी की।
न्यायालय में सुनवाई शुरू हुई, साक्ष्य और बयान समय पर हुआ और एक माह चार दिन में तीन दोषियों को आजीवन कारावास की सजा हुई। इसी प्रकार जोगिया कोतवाली क्षेत्र में चार वर्ष की नाबालिग बच्ची के यौन उत्पीड़न के मामले में पुलिस ने केस दर्ज करके सारी प्रक्रिया पूरी कर 30 दिन में अपराधी को आजीवन कारावास की सजा दिलाई। इसमें पुलिस कार्यालय के मॉनिटरिंग सेल की निगरानी का काफी रोल रहा है।
विज्ञापन
सिद्धार्थनगर। घर में होने वाली हिंसा और अपनों द्वारा अपनों पर किए जाने वाले जुर्म पर लोग अकसर खामोश हो जाते हैं। उस पर पर्दा डालने की कोशिश करते हैं। इसका नतीजा अपराध करने वालों के हौसले बुलंद हो जाते हैं।
लेकिन जिले में अपनों की ओर से किए गए अत्याचार की शिकार बेटियों को न्याय दिलाने में पति के खिलाफ न सिर्फ आवाज बुलंद करने का कार्य किया है। बल्कि आगे बढ़कर केस दर्ज करवाया और लड़कर सजा दिलाने का कार्य किया है।
विज्ञापन
यह न सिर्फ सजा है, बल्कि समाज में अपराध के खिलाफ मुखर होने का संदेश भी है। हालांकि समाजशास्त्री इस जधन्य अपराध को समाज के लिए घातक बता रहे हैं। जबकि, विधि विशेषज्ञ अपराध करने वाला घर का हो या बाहर का, उसके खिलाफ आगे आने की जरूरत है।
विज्ञापन
क्योंकि, हर अपराध करने वालों को सजा जरूर मिलती है।
मां हुई मुखर, तो दरिंदे पिता को मिली सजा : त्रिलोकपुर थाना क्षेत्र के एक गांव में अपनी ही दिव्यांग बेटी से दरिंदगी करने वाले पिता को सजा मिली तो लोगोंं ने उसे सही ठहराया है। वहीं, दूसरी तरफ लोगों में गुस्सा और आक्रोश रहा।
लोगों में चर्चा रही कि अकसर लोग घर में अपनों की ओर से किए जाने वाले अपराध पर पर्दा डालने का काम करते हैं। कहीं लोकलाज का डर तो कहीं, अत्याचार करने वाले का भय।
इसलिए आगे बढ़कर लोग नहीं आते हैं कि बात बाहर न आने पाए इससे बदनामी होगी। वहीं, अनदेखी और जुर्म सहने वाला कई बार अवसाद में जाकर घातक कदम उठा लेता है।
आसपास के लोगों को जानकारी भी नहीं हो पाती है। लेकिन, इस मामले में अपराध की जानकारी मिलने के बाद मां न सिर्फ आगे आई, बल्कि न्याय दिलाने तक डटकर लड़ती रही। उसके मनोबल को बढ़ाने और सजा दिलाने में पुलिस ने भी पूरी कोशिश की। समय से गवाही, साक्ष्य उपलब्ध कराकर सजा दिलाने में भूमिका निभाई।
यह मामले में जिसमें पुलिस की जांच और विवेचना से कम समय में मिली सजा : वर्ष 2019 में मिश्रौलिया थाना क्षेत्र के एक गांव में घटित बेटी के साथ यौन उत्पीड़न के मामले में पुलिस ने केस दर्ज किया।
केस दर्ज हाेने से लेकर विवेचना और सुनवाई फिर सजा मात्रा 38 दिन में ही हो गई। इसमें पुलिस ने केस दर्ज करने के साथ ही विवेचना लटकाने के बजाय तेजी से काम किया, चार्जशीट न्यायालय में दाखिल की।
गवाहों को हाजिर करवाया और 38 दिन में आजीवन कारावास की सजा हुई है। वर्ष 2023 में पथरा थाना क्षेत्र में एक यौन उत्पीड़न का मामला सामने आया। इसमें पुलिस ने केस दर्ज करने के साथ ही विवेचना पूरी की।
न्यायालय में सुनवाई शुरू हुई, साक्ष्य और बयान समय पर हुआ और एक माह चार दिन में तीन दोषियों को आजीवन कारावास की सजा हुई। इसी प्रकार जोगिया कोतवाली क्षेत्र में चार वर्ष की नाबालिग बच्ची के यौन उत्पीड़न के मामले में पुलिस ने केस दर्ज करके सारी प्रक्रिया पूरी कर 30 दिन में अपराधी को आजीवन कारावास की सजा दिलाई। इसमें पुलिस कार्यालय के मॉनिटरिंग सेल की निगरानी का काफी रोल रहा है।