फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Siddharthnagar News ›   There are no surgical items, stitches are applied with the help of tweezers

Siddharthnagar News: नहीं हैं सर्जिकल सामान, चिमटी के सहारे लगाते हैं टांका

Wed, 30 Nov 2022 11:43 PM IST
Gorakhpur Bureau गोरखपुर ब्यूरो
Updated Wed, 30 Nov 2022 11:43 PM IST
विज्ञापन
There are no surgical items, stitches are applied with the help of tweezers
नहीं हैं सर्जिकल सामान, चिमटी के सहारे लगाते हैं टांका
विज्ञापन

सिद्धार्थनगर। माधव प्रसाद त्रिपाठी मेडिकल कॉलेज से संबद्ध जिला अस्पताल में अव्यवस्था हावी है। अस्पताल की इमरजेंसी सेवा में सर्जिकल सामान की कमी है। न कैंची है और ना ही अन्य सामान। घायलों को टांका लगाने और धागा पकड़ने के लिए महज एक चिमटी की ही व्यवस्था है। घायलों का त्वरित इलाज किसी प्रकार होता है। सुविधाएं मुहैया कराने वाले इससे बेखबर हैं।
माधव प्रसाद त्रिपाठी मेडिकल कॉलेज से संबद्ध जिला अस्पताल में जिले के सभी क्षेत्र के मरीज आते हैं। इसमें हादसे के शिकार मरीजों को प्राथमिक उपचार के बाद इस लिए रेफर कर दिया जाता है कि उनका बेहतर इलाज हो सकेगा। यहां पर त्वरित इलाज की ही व्यवस्था नहीं है। कारण, जिला अस्पताल में घायलावस्था में आने वाले लोगों के शरीर में अगर अधिक जख्म होता है तो टांका लगाने की नौबत आती है। स्थिति यह है कि इमरजेंसी में सर्जिकल का सामान ना के बराबर है। इमरजेंसी ड्यूटी करने वाले स्वास्थ्य कर्मियों के अनुसार, अस्पताल में घायलों को टांका लगाने के लिए पर्याप्त साधन नहीं हैं। न कैंची की व्यवस्था है और न ही अन्य कई सामान। केवल चिमटी है, जिसके सहारे टांका लगाते समय धागे को पकड़ा जाता है। अगर धागे को काटना हो तो अलग से ब्लेड रखना पड़ता है। इस संबंध में डॉ. एके झा ने बताया कि जब इमरजेंसी से मांग होगी, तभी सामान मुहैया कराया जाएगा। ड्यूटी पर तैनात फार्मासिस्ट को सामान की मांग करनी चाहिए। सामान की आपूर्ति की जाएगी।
विज्ञापन

हर दिन आते हैं चार से 10 हादसे के शिकार लोग
अस्पताल में इमरजेंसी सेवा के लिए आंकड़ों पर गौर करें तो यहां प्रतिदिन चार से 10 लोग हादसे का शिकार होकर पहुंचते हैं। कभी- कभी इनकी संख्या बढ़ भी जाती है। ऐसे में एक साथ कई मरीजों को टांके लगाने की जरूरत पड़ जाती है। सामान न होने के कारण इलाज करने में देरी हो जाती है, जो मरीजों के लिए घातक भी साबित हो सकती है। अस्पताल के इमरजेंसी वार्ड में एक साथ कई घायल मरीजों के पहुंचने के बाद तत्काल इलाज न होने पाने कारण विवाद की स्थिति बन जाती है।
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed