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Siddharthnagar News: ईश्वर का सुंदर बागीचा है संसार ः आचार्य
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संवाद न्यूज एजेंसी
भनवापुर। क्षेत्र के धनोहरी में चल रही श्रीमद्भागवत कथा में मंगलवार को कथा वाचक आचार्य श्रीकृष्ण शास्त्री ने भगवान के चौबीस अवतारों की कथा के साथ-साथ समुद्र मंथन की रोचक एवं सारगर्भित कथा सुनाई।
आचार्य ने बताया कि यह संसार भगवान का सुंदर बगीचा है, यहां चौरासी लाख योनियों के रूप में भिन्न- भिन्न प्रकार के फूल खिले हैं। जब-जब कोई अपने गलत कर्मों से इस संसार रूपी भगवान के बगीचे को नुकसान पहुंचाने की चेष्टा करता है। तब-तब भगवान इस धरा पर अवतार लेकर सजनों का उद्धार और दुर्जनों का संहार करते हैं।
कथा वाचक ने बताया कि मानव हृदय ही संसार सागर है। मनुष्य के अच्छे और बुरे विचार ही देवता और दानव के द्वारा किया जाने वाला मंथन है। कभी हमारे अंदर अच्छे विचारों का चिंतन मंथन चलता रहता है और कभी हमारे ही अंदर बुरे विचारों का चिंतन मंथन चलता है। जब हम श्रीमद्भागवत कथा श्रवण करते हैं तभी श्री गोविंद हमारे हृदय में विराजमान होकर हमारे हृदय रूपी प्रकोष्ठ में जितने भी विकार हैं, उसे नष्ट कर देते हैं।
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उन्होंने कहा कि जिसके अंदर के दानव जीत गया उसका जीवन दुखी, परेशान और कष्ट कठिनाइयों से भरा होगा और जिसके अंदर के देवता जीत गया उसका जीवन सुखी, संतुष्ट और भगवत प्रेम से भरा हुआ होगा इसलिए हमेशा अपने विचारों पर पैनी नगर रखते हुए बुरे विचारों को अच्छे विचारों से जीतते हुए अपने मानव जीवन को सुखमय एवं आनंद मय बनाना चाहिए। इस दौरान मुनेश्वर चौधरी, सावित्री देवी, राज अग्रहरि, विजय चौधरी, ज्ञान प्रकाश चौधरी आदि मौजूद रहे।
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भनवापुर। क्षेत्र के धनोहरी में चल रही श्रीमद्भागवत कथा में मंगलवार को कथा वाचक आचार्य श्रीकृष्ण शास्त्री ने भगवान के चौबीस अवतारों की कथा के साथ-साथ समुद्र मंथन की रोचक एवं सारगर्भित कथा सुनाई।
आचार्य ने बताया कि यह संसार भगवान का सुंदर बगीचा है, यहां चौरासी लाख योनियों के रूप में भिन्न- भिन्न प्रकार के फूल खिले हैं। जब-जब कोई अपने गलत कर्मों से इस संसार रूपी भगवान के बगीचे को नुकसान पहुंचाने की चेष्टा करता है। तब-तब भगवान इस धरा पर अवतार लेकर सजनों का उद्धार और दुर्जनों का संहार करते हैं।
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कथा वाचक ने बताया कि मानव हृदय ही संसार सागर है। मनुष्य के अच्छे और बुरे विचार ही देवता और दानव के द्वारा किया जाने वाला मंथन है। कभी हमारे अंदर अच्छे विचारों का चिंतन मंथन चलता रहता है और कभी हमारे ही अंदर बुरे विचारों का चिंतन मंथन चलता है। जब हम श्रीमद्भागवत कथा श्रवण करते हैं तभी श्री गोविंद हमारे हृदय में विराजमान होकर हमारे हृदय रूपी प्रकोष्ठ में जितने भी विकार हैं, उसे नष्ट कर देते हैं।
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उन्होंने कहा कि जिसके अंदर के दानव जीत गया उसका जीवन दुखी, परेशान और कष्ट कठिनाइयों से भरा होगा और जिसके अंदर के देवता जीत गया उसका जीवन सुखी, संतुष्ट और भगवत प्रेम से भरा हुआ होगा इसलिए हमेशा अपने विचारों पर पैनी नगर रखते हुए बुरे विचारों को अच्छे विचारों से जीतते हुए अपने मानव जीवन को सुखमय एवं आनंद मय बनाना चाहिए। इस दौरान मुनेश्वर चौधरी, सावित्री देवी, राज अग्रहरि, विजय चौधरी, ज्ञान प्रकाश चौधरी आदि मौजूद रहे।