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Siddharthnagar News: कुंभकरण और रावण वध की कथा सुनाई
Fri, 27 Mar 2026 11:59 PM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
Updated Fri, 27 Mar 2026 11:59 PM IST
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संवाद न्यूज एजेंसी
पथरा। क्षेत्र के गौरी पाठक गांव में स्थित राम जानकी मंदिर पर चल रहे नौ दिवसीय श्रीराम कथा के आठवें दिन शुक्रवार को कथावाचक रामकुमार दास ने रामायण के महत्वपूर्ण प्रसंगों का भावपूर्ण वर्णन करते हुए लक्ष्मण-मेघनाद युद्ध, कुंभकरण और रावण वध की कथा सुनाई। कथा सुनने के लिए क्षेत्र के बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे।
कथावाचक ने बताया कि लंका युद्ध के दौरान मेघनाद और लक्ष्मण के बीच भीषण युद्ध हुआ। युद्ध के दौरान मेघनाद के शक्तिबाण से लक्ष्मण मूर्च्छित हो गए, जिससे पूरी वानर सेना और भगवान श्रीराम चिंतित हो उठे। इसके बाद हनुमान ने संजीवनी बूटी लाकर लक्ष्मण के प्राणों की रक्षा की और फिर युद्ध में लक्ष्मण ने मेघनाद का वध किया।
उन्होंने आगे बताया कि इसके बाद युद्ध में कुंभकरण का भी भगवान श्रीराम के हाथों वध हुआ और आखिर में अधर्म पर धर्म की विजय का प्रतीक रावण वध का प्रसंग घटित हुआ। कथा के माध्यम से कथावाचक ने कहा कि भगवान श्रीराम का जीवन मर्यादा, धर्म और सत्य की स्थापना का संदेश देता है। कथा के दौरान माता शबरी प्रसंग का भी वर्णन किया।
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पथरा। क्षेत्र के गौरी पाठक गांव में स्थित राम जानकी मंदिर पर चल रहे नौ दिवसीय श्रीराम कथा के आठवें दिन शुक्रवार को कथावाचक रामकुमार दास ने रामायण के महत्वपूर्ण प्रसंगों का भावपूर्ण वर्णन करते हुए लक्ष्मण-मेघनाद युद्ध, कुंभकरण और रावण वध की कथा सुनाई। कथा सुनने के लिए क्षेत्र के बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे।
कथावाचक ने बताया कि लंका युद्ध के दौरान मेघनाद और लक्ष्मण के बीच भीषण युद्ध हुआ। युद्ध के दौरान मेघनाद के शक्तिबाण से लक्ष्मण मूर्च्छित हो गए, जिससे पूरी वानर सेना और भगवान श्रीराम चिंतित हो उठे। इसके बाद हनुमान ने संजीवनी बूटी लाकर लक्ष्मण के प्राणों की रक्षा की और फिर युद्ध में लक्ष्मण ने मेघनाद का वध किया।
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उन्होंने आगे बताया कि इसके बाद युद्ध में कुंभकरण का भी भगवान श्रीराम के हाथों वध हुआ और आखिर में अधर्म पर धर्म की विजय का प्रतीक रावण वध का प्रसंग घटित हुआ। कथा के माध्यम से कथावाचक ने कहा कि भगवान श्रीराम का जीवन मर्यादा, धर्म और सत्य की स्थापना का संदेश देता है। कथा के दौरान माता शबरी प्रसंग का भी वर्णन किया।
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