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Siddharthnagar News: प्रह्लाद और ध्रुव की कथा से दिया भक्ति व दृढ़ संकल्प का संदेश
Sun, 21 Jun 2026 02:11 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
Updated Sun, 21 Jun 2026 02:11 AM IST
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बिस्कोहर। नगर पंचायत बिस्कोहर के डेगहर में आयोजित सात दिवसीय संगीतमय श्रीमद्भागवत महापुराण कथा के चौथे दिन श्रद्धा और भक्ति का माहौल देखने को मिला। कथा व्यास स्वामी मधुसूदनाचार्य ने भक्त प्रह्लाद और बालक ध्रुव की प्रेरणादायी कथाओं का भावपूर्ण वर्णन कर श्रद्धालुओं को अटूट विश्वास, दृढ़ संकल्प और ईश्वर भक्ति का संदेश दिया।
कथाव्यास ने कहा कि भक्त प्रह्लाद ने अपने पिता हिरण्यकश्यप के अत्याचारों के बावजूद भगवान विष्णु के प्रति अटूट श्रद्धा बनाए रखी, जबकि बालक ध्रुव ने कठिन तपस्या और अडिग संकल्प के बल पर ध्रुव तारे के रूप में अमर स्थान प्राप्त किया। उन्होंने कहा कि इन प्रसंगों से जीवन में धैर्य, सत्य, आत्मविश्वास और लक्ष्य के प्रति समर्पण की प्रेरणा मिलती है।
स्वामी मधुसूदनाचार्य ने कहा कि वर्तमान समय में नैतिक मूल्यों और संस्कारों के संरक्षण की आवश्यकता है। धार्मिक कथाएं केवल आध्यात्मिक ज्ञान ही नहीं देतीं बल्कि समाज में सहिष्णुता, सद्भाव, सकारात्मक सोच और कर्तव्यनिष्ठा की भावना को भी मजबूत करती हैं। कथा के दौरान भजन-कीर्तन और भगवान के जयकारों से पूरा पंडाल भक्तिमय वातावरण में डूबा रहा। श्रद्धालु देर रात तक कथा श्रवण कर आध्यात्मिक आनंद की अनुभूति करते रहे।
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इस अवसर पर यज्ञाचार्य बनवारी लाल, सुरेंद्र कुमार त्रिपाठी, शीला देवी, महेंद्र मणि त्रिपाठी, मनोज त्रिपाठी, धर्मेंद्र, अविनाश त्रिपाठी, शुभम सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे।
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कथाव्यास ने कहा कि भक्त प्रह्लाद ने अपने पिता हिरण्यकश्यप के अत्याचारों के बावजूद भगवान विष्णु के प्रति अटूट श्रद्धा बनाए रखी, जबकि बालक ध्रुव ने कठिन तपस्या और अडिग संकल्प के बल पर ध्रुव तारे के रूप में अमर स्थान प्राप्त किया। उन्होंने कहा कि इन प्रसंगों से जीवन में धैर्य, सत्य, आत्मविश्वास और लक्ष्य के प्रति समर्पण की प्रेरणा मिलती है।
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स्वामी मधुसूदनाचार्य ने कहा कि वर्तमान समय में नैतिक मूल्यों और संस्कारों के संरक्षण की आवश्यकता है। धार्मिक कथाएं केवल आध्यात्मिक ज्ञान ही नहीं देतीं बल्कि समाज में सहिष्णुता, सद्भाव, सकारात्मक सोच और कर्तव्यनिष्ठा की भावना को भी मजबूत करती हैं। कथा के दौरान भजन-कीर्तन और भगवान के जयकारों से पूरा पंडाल भक्तिमय वातावरण में डूबा रहा। श्रद्धालु देर रात तक कथा श्रवण कर आध्यात्मिक आनंद की अनुभूति करते रहे।
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इस अवसर पर यज्ञाचार्य बनवारी लाल, सुरेंद्र कुमार त्रिपाठी, शीला देवी, महेंद्र मणि त्रिपाठी, मनोज त्रिपाठी, धर्मेंद्र, अविनाश त्रिपाठी, शुभम सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे।