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प्रत्याशियों की घोषणा से साफ हो रही चुनावी संघर्ष की तस्वीर
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प्रत्याशियों की घोषणा से साफ हो रही चुनावी संघर्ष की तस्वीर
सिद्धार्थनगर। जिले के सभी पांच विधानसभा क्षेत्रों में अधिकांश क्षेत्रों से विभिन्न दलों की ओर से प्रत्याशियों की घोषणा होने से चुनावी संघर्ष की तस्वीर साफ होती जा रही है। अब तक बसपा के पांच भाजपा एवं कांग्रेस ने चार-चार और सपा ने तीन विधानसभा क्षेत्रों के लिए प्रत्याशियों की घोषणा कर दी है, जिससे इन क्षेत्रों में प्रत्याशी जीत की बाजी अपने पाले में लाने के लिए जोर अजमाइश करते दिख रहे हैं।
सभी प्रमुख दलों के जिले की अधिकांश सीटों पर अपने दावेदार तय कर दिए जाने से जिले में राजनीतिक सरगर्मी तेज हो गयी है। सपा ने इटवा और कपिलवस्तु विधानसभा क्षेत्र में पुराने चेहरों पर दांव आजमाए तो डुमरियागंज में नया चेहरा मैदान में उतार दिया है। वहीं भाजपा की तरफ से घोषित प्रत्याशियों में बांसी, इटवा, डुमरियागंज और कपिलवस्तु में सभी पुराने चेहरे हैं।
कांग्रेस ने अब तक बांसी, इटवा, शोहरतगढ़ और डुमरियागंज से प्रत्याशियों की घोषणा की है तो बसपा ने डुमरियागंज से पूर्व घोषित प्रत्याशी बदलते हुए जिले की सभी सीटों पर प्रत्याशी उतार दिया है। पार्टियों की तरफ से घोषित प्रत्याशी अब दिल्ली और लखनऊ का चक्कर लगाना छोड़ प्रचार में जुट गए हैं। इससे जिले में राजनीतिक हलचल बढ़ गयी है।
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इटवा, डुमरियागंज से प्रमुख दल के प्रत्याशी तय
इटवा में सपा से पूर्व विधानसभा अध्यक्ष माता प्रसाद पांडेय, भाजपा से बेसिक शिक्षा राज्यमंत्री स्वतंत्र प्रभार डॉ. सतीश चंद्र द्विवेदी, कांग्रेस से अरशद खुर्शीद और बसपा से हरिशंकर सिंह चुनावी समर में उतर चुके हैं। इनमें माता प्रसाद पांडेय, डॉ. सतीश चंद्र द्विवेदी और अरशद खुर्शीद 2017 में भी एक-दूसरे से टक्कर ले चुके हैं। डुमरियागंज से भाजपा से राघवेंद्र प्रताप सिंह, सपा से सैय्यदा खातून, कांग्रेस से कांति पांडेय और बसपा से शैलेंद्र उर्फ राजू श्रीवास्तव चुनाव मैदान में है। इसमें राघवेंद्र प्रताप सिंह और सैय्यदा खातून पिछले चुनाव में आमने-सामने लड़ चुके हैं।
कपिलवस्तु और बांसी में है धुंधली तस्वीर
कपिलवस्तु में भाजपा, बसपा और सपा ने अपने प्रत्याशी तय कर दिए हैं, लेकिन कांग्रेस का प्रत्याशी घोषित नहीं है। यहां से सपा के विजय पासवान, भाजपा से श्यामधनी राही और बसपा से कन्हैया कन्नौजिया मैदान में हैं। बांसी विधानसभा में भाजपा के जय प्रताप सिंह, कांग्रेस से किरन शुक्ला और बसपा से राधेश्याम पांडेय प्रत्याशी घोषित हैं, लेकिन अभी यहां से सपा ने प्रत्याशी तय नहीं किया हैं।
शोहरतगढ़ से सपा और भाजपा में असमंजस
शोहरतगढ़ विधानसभा क्षेत्र में बसपा से राधेरमण त्रिपाठी और कांग्रेस से रविंद्र उर्फ पप्पू चौधरी चुनाव मैदान में उतर चुके हैं, जबकि सपा और भाजपा ने यहां अपने पत्ते नहीं खोले हैं। पिछले चुनाव में सपा से लड़ने वाले उग्रसेन तो पार्टी में हैं ही, वहीं बसपा प्रत्याशी रहे जमील सिद्दीकी और भाजपा के सहयोगी दल अपना दल (एस) से लड़कर चुनाव जीते। चौधरी अमर सिंह भी अब सपा का दामन थाम चुके हैं। ऐसे में सपा में असमंजस तो है ही, भाजपा और उसके सहयोगी अपना दल में भी प्रत्याशी चयन के संबंध में असमंजस बना हुआ है। इस विधानसभा क्षेत्र में अपना दल (एस) के हेमंत चौधरी और अखिल भारत हिंदू महासभा के राष्ट्रीय प्रवक्ता दिवाकर विक्रम सिंह ने दावेदारी की है। यहां के समीकरणों पर पूरे जिले में चर्चा हो रही है।
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सिद्धार्थनगर। जिले के सभी पांच विधानसभा क्षेत्रों में अधिकांश क्षेत्रों से विभिन्न दलों की ओर से प्रत्याशियों की घोषणा होने से चुनावी संघर्ष की तस्वीर साफ होती जा रही है। अब तक बसपा के पांच भाजपा एवं कांग्रेस ने चार-चार और सपा ने तीन विधानसभा क्षेत्रों के लिए प्रत्याशियों की घोषणा कर दी है, जिससे इन क्षेत्रों में प्रत्याशी जीत की बाजी अपने पाले में लाने के लिए जोर अजमाइश करते दिख रहे हैं।
सभी प्रमुख दलों के जिले की अधिकांश सीटों पर अपने दावेदार तय कर दिए जाने से जिले में राजनीतिक सरगर्मी तेज हो गयी है। सपा ने इटवा और कपिलवस्तु विधानसभा क्षेत्र में पुराने चेहरों पर दांव आजमाए तो डुमरियागंज में नया चेहरा मैदान में उतार दिया है। वहीं भाजपा की तरफ से घोषित प्रत्याशियों में बांसी, इटवा, डुमरियागंज और कपिलवस्तु में सभी पुराने चेहरे हैं।
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कांग्रेस ने अब तक बांसी, इटवा, शोहरतगढ़ और डुमरियागंज से प्रत्याशियों की घोषणा की है तो बसपा ने डुमरियागंज से पूर्व घोषित प्रत्याशी बदलते हुए जिले की सभी सीटों पर प्रत्याशी उतार दिया है। पार्टियों की तरफ से घोषित प्रत्याशी अब दिल्ली और लखनऊ का चक्कर लगाना छोड़ प्रचार में जुट गए हैं। इससे जिले में राजनीतिक हलचल बढ़ गयी है।
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इटवा, डुमरियागंज से प्रमुख दल के प्रत्याशी तय
इटवा में सपा से पूर्व विधानसभा अध्यक्ष माता प्रसाद पांडेय, भाजपा से बेसिक शिक्षा राज्यमंत्री स्वतंत्र प्रभार डॉ. सतीश चंद्र द्विवेदी, कांग्रेस से अरशद खुर्शीद और बसपा से हरिशंकर सिंह चुनावी समर में उतर चुके हैं। इनमें माता प्रसाद पांडेय, डॉ. सतीश चंद्र द्विवेदी और अरशद खुर्शीद 2017 में भी एक-दूसरे से टक्कर ले चुके हैं। डुमरियागंज से भाजपा से राघवेंद्र प्रताप सिंह, सपा से सैय्यदा खातून, कांग्रेस से कांति पांडेय और बसपा से शैलेंद्र उर्फ राजू श्रीवास्तव चुनाव मैदान में है। इसमें राघवेंद्र प्रताप सिंह और सैय्यदा खातून पिछले चुनाव में आमने-सामने लड़ चुके हैं।
कपिलवस्तु और बांसी में है धुंधली तस्वीर
कपिलवस्तु में भाजपा, बसपा और सपा ने अपने प्रत्याशी तय कर दिए हैं, लेकिन कांग्रेस का प्रत्याशी घोषित नहीं है। यहां से सपा के विजय पासवान, भाजपा से श्यामधनी राही और बसपा से कन्हैया कन्नौजिया मैदान में हैं। बांसी विधानसभा में भाजपा के जय प्रताप सिंह, कांग्रेस से किरन शुक्ला और बसपा से राधेश्याम पांडेय प्रत्याशी घोषित हैं, लेकिन अभी यहां से सपा ने प्रत्याशी तय नहीं किया हैं।
शोहरतगढ़ से सपा और भाजपा में असमंजस
शोहरतगढ़ विधानसभा क्षेत्र में बसपा से राधेरमण त्रिपाठी और कांग्रेस से रविंद्र उर्फ पप्पू चौधरी चुनाव मैदान में उतर चुके हैं, जबकि सपा और भाजपा ने यहां अपने पत्ते नहीं खोले हैं। पिछले चुनाव में सपा से लड़ने वाले उग्रसेन तो पार्टी में हैं ही, वहीं बसपा प्रत्याशी रहे जमील सिद्दीकी और भाजपा के सहयोगी दल अपना दल (एस) से लड़कर चुनाव जीते। चौधरी अमर सिंह भी अब सपा का दामन थाम चुके हैं। ऐसे में सपा में असमंजस तो है ही, भाजपा और उसके सहयोगी अपना दल में भी प्रत्याशी चयन के संबंध में असमंजस बना हुआ है। इस विधानसभा क्षेत्र में अपना दल (एस) के हेमंत चौधरी और अखिल भारत हिंदू महासभा के राष्ट्रीय प्रवक्ता दिवाकर विक्रम सिंह ने दावेदारी की है। यहां के समीकरणों पर पूरे जिले में चर्चा हो रही है।