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Siddharthnagar News: देश की अग्रणी पर्यावरण वैज्ञानिक के हाथों मिलेगा उपाधियों का सम्मान
Sat, 27 Jun 2026 02:08 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
Updated Sat, 27 Jun 2026 02:08 AM IST
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सिद्धार्थ विश्वविद्यालय में दशम दीक्षांत समारोह की तैयारी को लेकर रिहर्सल करती कुलपति प्रो. कवि
बीएचयू की प्रख्यात पर्यावरण वैज्ञानिक चार दशक से कर रहीं जलवायु परिवर्तन और वायु प्रदूषण पर शोध
पौधों, कृषि फसलों और सतत विकास पर उनके शोध को मिली राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय पहचान
सिद्धार्थनगर। सिद्धार्थ विश्वविद्यालय के दसवें दीक्षांत समारोह में इस बार विद्यार्थियों को केवल उपाधियां ही नहीं मिलेंगी बल्कि पर्यावरण संरक्षण और सतत विकास का संदेश भी मिलेगा। विश्वविद्यालय ने मुख्य अतिथि के रूप में काशी हिंदू विश्वविद्यालय (बीएचयू) की प्रख्यात पर्यावरण वैज्ञानिक प्रो. मधुलिका अग्रवाल को आमंत्रित किया है। वायु प्रदूषण, जलवायु परिवर्तन और पौधों व कृषि फसलों पर इनके प्रभावों को लेकर चार दशक से अधिक समय से शोध कर रहीं प्रो. अग्रवाल देश की अग्रणी पर्यावरण वैज्ञानिकों में गिनी जाती हैं।
मुख्य अतिथि के बारे में कुलपति प्रो. कविता शाह बताती हैं कि प्रो. मधुलिका अग्रवाल का वैज्ञानिक जीवन बदलते पर्यावरण और उसके दूरगामी प्रभावों को समझने तथा उनके समाधान तलाशने के लिए समर्पित रहा है। उनका शोध मुख्य रूप से वायु, जल और मृदा प्रदूषण, ग्लोबल वार्मिंग, जमीनी स्तर की ओजोन गैस तथा वायु में मौजूद सूक्ष्म धूल कणों (पार्टिकुलेट मैटर) का पौधों और कृषि फसलों पर पड़ने वाले प्रभावों पर केंद्रित रहा है। उनके अध्ययनों ने यह स्थापित किया कि जलवायु परिवर्तन केवल पर्यावरण का विषय नहीं बल्कि खाद्य सुरक्षा, कृषि और मानव जीवन से जुड़ी गंभीर चुनौती भी है।
उन्होंने प्रदूषण सहन करने वाले वृक्षों और पौधों की पहचान, शहरी हरित पट्टियों के विकास तथा प्रदूषण नियंत्रण की वैज्ञानिक रणनीतियों पर भी उल्लेखनीय कार्य किया है। उनके शोध आज पर्यावरण संरक्षण की नीतियों, शहरी नियोजन और टिकाऊ कृषि व्यवस्था के लिए उपयोगी माने जाते हैं। बायोचार, मिश्रित खेती और पोषक तत्वों के संतुलित उपयोग जैसे व्यावहारिक उपायों पर उनका शोध किसानों और नीति-निर्माताओं के लिए भी मार्गदर्शक माना जाता है।
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विश्वविद्यालय के जनसंपर्क अधिकारी डॉ. अविनाश प्रताप सिंह बताते हैं कि बीएचयू से वर्ष 1978 में स्वर्ण पदक के साथ स्नातकोत्तर और 1982 में पीएचडी पूरी करने वाली प्रो. अग्रवाल वर्ष 1984 से अध्यापन और अनुसंधान से जुड़ी हैं। वह बीएचयू के विज्ञान संकाय की पूर्व डीन भी रह चुकी हैं। उनके सैकड़ों शोध पत्र राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर की प्रतिष्ठित वैज्ञानिक पत्रिकाओं में प्रकाशित हो चुके हैं और पर्यावरण विज्ञान के क्षेत्र में उन्हें एक प्रामाणिक विशेषज्ञ के रूप में पहचान मिली है।
पर्यावरण विज्ञान में उत्कृष्ट योगदान के लिए उन्हें वर्ष 2023-24 का प्रो. प्रेम दुरेजा एंडोमेंट पुरस्कार, प्रतिष्ठित जेसी बोस फेलोशिप, यूनेस्को यंग साइंटिस्ट अवॉर्ड, यूएस फुलब्राइट फेलोशिप सहित अनेक राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय सम्मान मिल चुका है। वह भारतीय राष्ट्रीय विज्ञान अकादमी, राष्ट्रीय कृषि विज्ञान अकादमी तथा राष्ट्रीय विज्ञान अकादमी, भारत की फेलो भी हैं।
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पौधों, कृषि फसलों और सतत विकास पर उनके शोध को मिली राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय पहचान
सिद्धार्थनगर। सिद्धार्थ विश्वविद्यालय के दसवें दीक्षांत समारोह में इस बार विद्यार्थियों को केवल उपाधियां ही नहीं मिलेंगी बल्कि पर्यावरण संरक्षण और सतत विकास का संदेश भी मिलेगा। विश्वविद्यालय ने मुख्य अतिथि के रूप में काशी हिंदू विश्वविद्यालय (बीएचयू) की प्रख्यात पर्यावरण वैज्ञानिक प्रो. मधुलिका अग्रवाल को आमंत्रित किया है। वायु प्रदूषण, जलवायु परिवर्तन और पौधों व कृषि फसलों पर इनके प्रभावों को लेकर चार दशक से अधिक समय से शोध कर रहीं प्रो. अग्रवाल देश की अग्रणी पर्यावरण वैज्ञानिकों में गिनी जाती हैं।
मुख्य अतिथि के बारे में कुलपति प्रो. कविता शाह बताती हैं कि प्रो. मधुलिका अग्रवाल का वैज्ञानिक जीवन बदलते पर्यावरण और उसके दूरगामी प्रभावों को समझने तथा उनके समाधान तलाशने के लिए समर्पित रहा है। उनका शोध मुख्य रूप से वायु, जल और मृदा प्रदूषण, ग्लोबल वार्मिंग, जमीनी स्तर की ओजोन गैस तथा वायु में मौजूद सूक्ष्म धूल कणों (पार्टिकुलेट मैटर) का पौधों और कृषि फसलों पर पड़ने वाले प्रभावों पर केंद्रित रहा है। उनके अध्ययनों ने यह स्थापित किया कि जलवायु परिवर्तन केवल पर्यावरण का विषय नहीं बल्कि खाद्य सुरक्षा, कृषि और मानव जीवन से जुड़ी गंभीर चुनौती भी है।
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उन्होंने प्रदूषण सहन करने वाले वृक्षों और पौधों की पहचान, शहरी हरित पट्टियों के विकास तथा प्रदूषण नियंत्रण की वैज्ञानिक रणनीतियों पर भी उल्लेखनीय कार्य किया है। उनके शोध आज पर्यावरण संरक्षण की नीतियों, शहरी नियोजन और टिकाऊ कृषि व्यवस्था के लिए उपयोगी माने जाते हैं। बायोचार, मिश्रित खेती और पोषक तत्वों के संतुलित उपयोग जैसे व्यावहारिक उपायों पर उनका शोध किसानों और नीति-निर्माताओं के लिए भी मार्गदर्शक माना जाता है।
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विश्वविद्यालय के जनसंपर्क अधिकारी डॉ. अविनाश प्रताप सिंह बताते हैं कि बीएचयू से वर्ष 1978 में स्वर्ण पदक के साथ स्नातकोत्तर और 1982 में पीएचडी पूरी करने वाली प्रो. अग्रवाल वर्ष 1984 से अध्यापन और अनुसंधान से जुड़ी हैं। वह बीएचयू के विज्ञान संकाय की पूर्व डीन भी रह चुकी हैं। उनके सैकड़ों शोध पत्र राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर की प्रतिष्ठित वैज्ञानिक पत्रिकाओं में प्रकाशित हो चुके हैं और पर्यावरण विज्ञान के क्षेत्र में उन्हें एक प्रामाणिक विशेषज्ञ के रूप में पहचान मिली है।
पर्यावरण विज्ञान में उत्कृष्ट योगदान के लिए उन्हें वर्ष 2023-24 का प्रो. प्रेम दुरेजा एंडोमेंट पुरस्कार, प्रतिष्ठित जेसी बोस फेलोशिप, यूनेस्को यंग साइंटिस्ट अवॉर्ड, यूएस फुलब्राइट फेलोशिप सहित अनेक राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय सम्मान मिल चुका है। वह भारतीय राष्ट्रीय विज्ञान अकादमी, राष्ट्रीय कृषि विज्ञान अकादमी तथा राष्ट्रीय विज्ञान अकादमी, भारत की फेलो भी हैं।