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न पर्ची कटी न दवा मिली, तड़पे मरीज
ब्यूरो/अमर उजाला सिद्धार्थनगर
Updated Tue, 20 Sep 2016 10:17 PM IST
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जिला अस्पताल में हड़ताल के दौरान बंद रहा गेट।
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
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सिद्धार्थनगर। फार्मासिस्ट और लैब टेक्नीशियन की हड़ताल से जिला अस्पताल की स्वास्थ्य सेवा मंगलवार को चरमरा गई। अस्पताल में न तो ओपीडी की पर्ची कटी और न ही दवाओं का वितरण हुआ। उपचार के लिए मरीज छटपटाते रहे। पर्ची के अभाव में चिकित्सकों ने भी खुद को बेबस बताया। वह तय समय पर कक्ष में बैठे तो जरूर, लेकिन कोई काम नहीं कर सके। परेशानहाल करीब 100 से अधिक मरीज व परिजन घंटों तक भटकने के बाद वापस लौट गए।
जिला अस्पताल की स्वास्थ्य सेवाएं पहले से ही बदहाल हैं। कोढ़ में खाज की स्थिति तब हो गई, जब विभिन्न मांगों को लेकर लैब टेक्नीशियन और फार्मासिस्ट मंगलवार से कार्य बहिष्कार कर हड़ताल पर चले गए। नतीजा पर्ची काटने, दवा वितरण केंद्र, ब्लड जांच, एक्सरे सहित अन्य कमरों पर ताला लगा रहा। दूर-दराज से मरीज आए तो ताला लटकता देख यहां-वहां भटकते रहे। हर तरफ हाय तौबा मचा रहा। इलाज के लिए कोसों दूर से आए मरीज सुबह से ही स्वास्थ्य परीक्षण के अभाव में कराहते हुए नजर आए।
मरीज इस आस में काफी देर तक बैठे रहे कि केंद्र अब खुलेगा और हमारी जरूरत पूरी होगी, लेकिन घंटों बाद भी कोई बदलाव नहीं हुआ तो वह मायूस लौट गए। पिपरा भैया गांव से इलाज के लिए आए रामसमुझ का कहना था कि दो दिनों से तेज बुखार है सुबह से ही दवा कराने के लिए बैठे हैं पर्ची नहीं मिलने से डॉक्टर साहब नहीं देखे। वहीं मोहम्मदपुर गांव से आए अब्दुल मनान का कहना था कि पेट दर्द के उपचार के लिए आए थे। अस्पताल पूर्ण रूप से बंद होने से इलाज नहीं हो पाया।
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जोगिया क्षेत्र के इलाज के लिए आई अकालमती का कहना था कि पूरे शरीर में जलन है, एक डॉक्टर साहब सादे कागज पर दवा लिख दिए, लेकिन दवा केंद्र पर सुबह से ही ताला लटका हुआ है। दवा नहीं मिल पाया। नेपाल के तौलिहवा से इलाज के लिए जिला अस्पताल आए सीताराम ने कहा कि यहां सुबह से दोपहर दो बज गया, लेकिन अभी तक पर्ची तक नहीं कटा इलाज नहीं हो पाया। बहुत परेशानी है अब इलाज कहां होई।
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जिला अस्पताल की स्वास्थ्य सेवाएं पहले से ही बदहाल हैं। कोढ़ में खाज की स्थिति तब हो गई, जब विभिन्न मांगों को लेकर लैब टेक्नीशियन और फार्मासिस्ट मंगलवार से कार्य बहिष्कार कर हड़ताल पर चले गए। नतीजा पर्ची काटने, दवा वितरण केंद्र, ब्लड जांच, एक्सरे सहित अन्य कमरों पर ताला लगा रहा। दूर-दराज से मरीज आए तो ताला लटकता देख यहां-वहां भटकते रहे। हर तरफ हाय तौबा मचा रहा। इलाज के लिए कोसों दूर से आए मरीज सुबह से ही स्वास्थ्य परीक्षण के अभाव में कराहते हुए नजर आए।
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मरीज इस आस में काफी देर तक बैठे रहे कि केंद्र अब खुलेगा और हमारी जरूरत पूरी होगी, लेकिन घंटों बाद भी कोई बदलाव नहीं हुआ तो वह मायूस लौट गए। पिपरा भैया गांव से इलाज के लिए आए रामसमुझ का कहना था कि दो दिनों से तेज बुखार है सुबह से ही दवा कराने के लिए बैठे हैं पर्ची नहीं मिलने से डॉक्टर साहब नहीं देखे। वहीं मोहम्मदपुर गांव से आए अब्दुल मनान का कहना था कि पेट दर्द के उपचार के लिए आए थे। अस्पताल पूर्ण रूप से बंद होने से इलाज नहीं हो पाया।
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जोगिया क्षेत्र के इलाज के लिए आई अकालमती का कहना था कि पूरे शरीर में जलन है, एक डॉक्टर साहब सादे कागज पर दवा लिख दिए, लेकिन दवा केंद्र पर सुबह से ही ताला लटका हुआ है। दवा नहीं मिल पाया। नेपाल के तौलिहवा से इलाज के लिए जिला अस्पताल आए सीताराम ने कहा कि यहां सुबह से दोपहर दो बज गया, लेकिन अभी तक पर्ची तक नहीं कटा इलाज नहीं हो पाया। बहुत परेशानी है अब इलाज कहां होई।