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Siddharthnagar News: जाली नोटों से 2008 में बदनाम हुआ था जनपद
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डुमरियागंज एसबीआई के कैश चेस्ट से मिला था तीन करोड़ नकली नोट
अगस्त 2008 में हुआ था खुलासा, पकड़ा गया था बैंक कैशियर व सहयोगी
संवाद न्यूज एजेंसी
सिद्धार्थनगर। जाली नोटों के कारण साल 2008 में जनपद बदनाम हुआ है। भवानीगंज में पकड़े गए जाली नोट के काराबोरियों से पहले भी इस कारोबार में डुमरियागंज क्षेत्र देश भर में चर्चा में रह चुका है। डुमरियागंज स्थित एसबीआई की शाखा के कैश चेस्ट में अगस्त 2008 में हुई जांच में तीन करोड़ रुपये से अधिक जाली बरामद किए गए थे। इस मामले में वहां के तत्कालीन बैंक कैशियर सुधाकर त्रिपाठी एवं उसके सहयोगी आबिद शेख को गिरफ्तार किया गया था।
जुलाई 2008 में एसटीएफ ने चार लोगों को जाली नोट के साथ गिरफ्तार किया था, जिनसे पूछताछ के बाद डुमरियागंज एसबीआई शाखा से लेनदेन का खुलासा हुआ था। इसके बाद एसबीआई डुमरियागंज कैश चेस्ट की हुई जांच के बाद उच्चाधिकारी सकते में आ गए। यहां कैश चेस्ट में रखे अरबों रुपये में जाली नोट की बरामदगी एसबीआई के इतिहास में पहली बार हुई थी। मामले की पहले एसआईटी और बाद में सीबीआई ने जांच की, जिससे डुमरियागंज चर्चा में रहा। यहां महीनों जांच एजेंसियों के साथ देश की मीडिया का जमावड़ा रहा। जांच में कैशियर सुधाकर त्रिपाठी की भूमिका संदिग्ध पाई गई। बताया जाता है कि कैशियर सुधाकर बैंक बंद होने के बाद भी रुपये की लेनदेन करता था। उसके आवास से भी करोड़ों रुपये बरामद हुए थे। अब एक बार फिर से डुमरियागंज के भवानीगंज में जाली नोट बनाने केे उपकरण बरामद होने से यह क्षेत्र चर्चा में है।
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अगस्त 2008 में हुआ था खुलासा, पकड़ा गया था बैंक कैशियर व सहयोगी
संवाद न्यूज एजेंसी
सिद्धार्थनगर। जाली नोटों के कारण साल 2008 में जनपद बदनाम हुआ है। भवानीगंज में पकड़े गए जाली नोट के काराबोरियों से पहले भी इस कारोबार में डुमरियागंज क्षेत्र देश भर में चर्चा में रह चुका है। डुमरियागंज स्थित एसबीआई की शाखा के कैश चेस्ट में अगस्त 2008 में हुई जांच में तीन करोड़ रुपये से अधिक जाली बरामद किए गए थे। इस मामले में वहां के तत्कालीन बैंक कैशियर सुधाकर त्रिपाठी एवं उसके सहयोगी आबिद शेख को गिरफ्तार किया गया था।
जुलाई 2008 में एसटीएफ ने चार लोगों को जाली नोट के साथ गिरफ्तार किया था, जिनसे पूछताछ के बाद डुमरियागंज एसबीआई शाखा से लेनदेन का खुलासा हुआ था। इसके बाद एसबीआई डुमरियागंज कैश चेस्ट की हुई जांच के बाद उच्चाधिकारी सकते में आ गए। यहां कैश चेस्ट में रखे अरबों रुपये में जाली नोट की बरामदगी एसबीआई के इतिहास में पहली बार हुई थी। मामले की पहले एसआईटी और बाद में सीबीआई ने जांच की, जिससे डुमरियागंज चर्चा में रहा। यहां महीनों जांच एजेंसियों के साथ देश की मीडिया का जमावड़ा रहा। जांच में कैशियर सुधाकर त्रिपाठी की भूमिका संदिग्ध पाई गई। बताया जाता है कि कैशियर सुधाकर बैंक बंद होने के बाद भी रुपये की लेनदेन करता था। उसके आवास से भी करोड़ों रुपये बरामद हुए थे। अब एक बार फिर से डुमरियागंज के भवानीगंज में जाली नोट बनाने केे उपकरण बरामद होने से यह क्षेत्र चर्चा में है।
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