{"_id":"587e54cf4f1c1b3503efff27","slug":"the-difficult-path-to-higher-education-for-girls","type":"story","status":"publish","title_hn":"यहां बेटियों के लिए उच्च शिक्षा की राह कठिन","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
यहां बेटियों के लिए उच्च शिक्षा की राह कठिन
ब्यूरो/अमर उजाला सिद्धार्थनगर
Updated Tue, 17 Jan 2017 11:00 PM IST
विज्ञापन
चौखड़ा स्थित राजकीय कन्या डिग्री कॉलेज।
- फोटो : अमर उजाला
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
सिद्धार्थनगर। बेटियों के लिए उच्च शिक्षा की दुहाई हर कोई दे रहा है। इस लिहाज से जगह-जगह कन्या महाविद्यालय भी खोले जा रहे हैं। मगर जिले में बेटियों के लिए उच्च शिक्षा के पर्याप्त विकल्प अब तक नहीं उपलब्ध हो पाएं हैं। चुनिंदा महाविद्यालय संचालित तो हैं, लेकिन उनमें भी मनचाहे विषय की पढ़ाई का विकल्प नहीं है। ऐसे में सपनों का आसमां छूने के लिए बेटियों को घर-द्वार छोड़कर लखनऊ या गोरखपुर जैसे शहरों की शरण लेनी पड़ रही है। कुछ ऐसा ही हाल तकनीकी शिक्षा को लेकर भी है।
आईटीआई, पॉलीटेक्निक जैसे संस्थानों का अभाव युवाओं के तरक्की की राह में रोड़ा बन रहा है। सूबे के अति पिछड़े जिलों में शुमार सिद्धार्थनगर में शिक्षा के संसाधन शुरू से ही नाकाफी रहे हैं। अव्वल तो स्नातक तक की शिक्षा का बंदोबस्त नहीं है और अगर है भी तो भवन और प्राध्यापक का टोटा बेहतर पढ़ाई में आड़े आ रहा है। मुख्यालय की ही बात करें तो यहां कन्या महाविद्यालय है, लेकिन सिर्फ चुनिंदा विषयों में कला की पढ़ाई ही हो पाती है। इसके लिए भी पर्याप्त शिक्षकों का अभाव है। शोहरतगढ़ में पीजी कॉलेज है, लेकिन आवागमन की बेहतर सुविधाओं के अभाव में बेटियों के लिए यहां लड़कों के साथ शिक्षा दुश्वारियों भरा है।
अपने सपनों को साकार करने और व्यक्तित्व के बहुमुखी विकास के लिए कन्या कॉलेज की आस लगाए हुए हैं। अलग कॉलेज खोलना तो दूर मुख्यालय पर स्थापित कन्या कॉलेज में भी विज्ञान और वाणिज्य की पढ़ाई के इंतजाम कराने में जनप्रतिनिधि नाकाम रहे हैं। ऐसे में छात्राओं के पास से कला से पढ़ाई के अलावा कोई विकल्प नहीं है। अगर बेटियां आधुनिक वैज्ञानिक और तकनीकी शिक्षा पाने की इच्छुक हैं तो उन्हें बड़े शहरों की ओर जाना मजबूरी है। यह दूरी ही अक्सर उनके पैरों की बेड़ियां बनती है, जिससे उन्हें पढ़ाई छोड़ने को विवश होना पड़ता है। बेटियां खुद के लिए अलग कॉलेज या वाणिज्य, विज्ञान से पढ़ाई की जरूरत महसूस कर रही हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन
आईटीआई, पॉलीटेक्निक जैसे संस्थानों का अभाव युवाओं के तरक्की की राह में रोड़ा बन रहा है। सूबे के अति पिछड़े जिलों में शुमार सिद्धार्थनगर में शिक्षा के संसाधन शुरू से ही नाकाफी रहे हैं। अव्वल तो स्नातक तक की शिक्षा का बंदोबस्त नहीं है और अगर है भी तो भवन और प्राध्यापक का टोटा बेहतर पढ़ाई में आड़े आ रहा है। मुख्यालय की ही बात करें तो यहां कन्या महाविद्यालय है, लेकिन सिर्फ चुनिंदा विषयों में कला की पढ़ाई ही हो पाती है। इसके लिए भी पर्याप्त शिक्षकों का अभाव है। शोहरतगढ़ में पीजी कॉलेज है, लेकिन आवागमन की बेहतर सुविधाओं के अभाव में बेटियों के लिए यहां लड़कों के साथ शिक्षा दुश्वारियों भरा है।
विज्ञापन
अपने सपनों को साकार करने और व्यक्तित्व के बहुमुखी विकास के लिए कन्या कॉलेज की आस लगाए हुए हैं। अलग कॉलेज खोलना तो दूर मुख्यालय पर स्थापित कन्या कॉलेज में भी विज्ञान और वाणिज्य की पढ़ाई के इंतजाम कराने में जनप्रतिनिधि नाकाम रहे हैं। ऐसे में छात्राओं के पास से कला से पढ़ाई के अलावा कोई विकल्प नहीं है। अगर बेटियां आधुनिक वैज्ञानिक और तकनीकी शिक्षा पाने की इच्छुक हैं तो उन्हें बड़े शहरों की ओर जाना मजबूरी है। यह दूरी ही अक्सर उनके पैरों की बेड़ियां बनती है, जिससे उन्हें पढ़ाई छोड़ने को विवश होना पड़ता है। बेटियां खुद के लिए अलग कॉलेज या वाणिज्य, विज्ञान से पढ़ाई की जरूरत महसूस कर रही हैं।
विज्ञापन