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Siddharthnagar News: विभाग ही भूल गया टीलों की सुरक्षा, कैसे मिलेंगे प्राचीनता के और साक्ष्य
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कपिलवस्तु के गांवरिया में स्थित किला को देखते पुरातत्व विशेषज्ञ सरदेंदु।
कपिलवस्तु क्षेत्र के कई प्राचीन टीलों का नहीं हुआ उत्खनन, बारिश में हो रहा है क्षरण
संवाद न्यूज एजेंसी
सिद्धार्थनगर। कपिलवस्तु क्षेत्र में पुरावेश के रूप में मौजूद टीलों का संरक्षण नहीं हो रहा है। प्राकृतिक एवं मानवीय कारणों से टीलों का क्षरण हो रहा है, जबकि विशेषज्ञों की देख-रेख में टीलों का उत्खनन हो तो वहां प्राचीनता के और अधिक साक्ष्य मिल सकते हैं। यदि साक्ष्य अधिक मिल जाएंगे तो यहां के विकास के द्वार खुल लाएंगे।
केंद्रीय पुरातत्व एवं सर्वेक्षण विभाग के साथ राज्य पुरातत्व विभाग ने भी इस क्षेत्र की प्राचीनता की जांच में रुचि नहीं दिखाई है। केंद्रीय पुरातत्व एवं सर्वेक्षण विभाग ने कपिलवस्तु, गनवरिया एवं पिपरीकोट को संरक्षित किया है। इन स्थानों पर उत्खन्न हुआ और चहारदारी बनाकर संरक्षण किया गया है। यहां बोर्ड में वहां की विशेषताएं भी लिखी गई हैं, जबकि पिपरीकोट में भी टीले में क्षरण भी हो रहा है। इस क्षेत्र में गरगजवा, सलारगढ़, लाला पंचगवां, पिपरसन सहित अन्य क्षेत्रों में भी पुरावशेष है। एक अनुमान के मुताबिक ये पुरावशेष 2500 साल पुराने होंगे, यहां उत्खन्न हो तो प्राचीनता के अनेक साक्ष्य मिल सकते हैं। ये साक्ष्य शोध में उपयोगी हो सकते हैं।
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प्रशासन ने लगाया था बोर्ड, अराजकतत्वों ने फाड़ दिया
क्षेत्र के पिपरसन में अवैध खनन होने पर तीन माह पहले अधिकारियों ने मौका मुआयना किया था, उसके बाद वहां खनन रुका और वहां सुरक्षा का बोर्ड लगवा दिया गया। एसडीएम डॉ. ललित कुमार मिश्र ने कहा था कि इस स्थान की सुरक्षा के लिए पुलिस की गश्त होगी, लेकिन अराजक तत्वों ने उस बोर्ड को भी फाड़ दिया। इसके पहले लाला पंचगवां में अवैध खनन से पुरावशेष का अस्तित्व मिटने का संकट उत्पन्न हो गया था, लेकिन सिद्धार्थ विश्वविद्यालय कपिलवस्तु के प्राचीन इतिहास संस्कृति एवं पुरातत्व विभाग की अध्यक्ष डॉ. नीता यादव ने पीएमओ को ई मेल किया तो पूरे जिले में पुरातात्विक धरोहरों को सर्वेक्षण करने का आदेश जारी हुआ है, हालांकि, एक साल बाद भी यह सर्वेक्षण कार्य पूरा नहीं हुआ।
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चार माह पहले हुआ था सर्वेक्षण
सिद्धार्थ विश्वविद्यालय कपिलवस्तु के असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. शरदेंदु त्रिपाठी ने बताया कि पुरावशेष के संरक्षण के लिए कार्य नहीं होने कारण क्षरण हो रहा है। टीलों की कार्बन डेटिंग को पता चलेगा कि ये कितने पुराने अवशेष हैं। चार माह पहले लखनऊ से आए पुरातत्व अधिकारी ने गरगजवा टीले का सर्वेक्षण किया था, लेकिन उसके संरक्षण के लिए अब तक कार्य शुरू नहीं हुआ है। संरक्षित टीले गनवरियां में भी हथपथुआ ईंटाें में क्षरण हो रहा है।
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वर्जन
कपिलवस्तु क्षेत्र के पुरावशेष के संरक्षण के लिए पुरातत्व विभाग को पत्र भेजा गया है। क्षेत्र के सभी टीलों की सुरक्षा की जाएगी। इस मामले में एसएचओ को निर्देश दिया जाएगा।
डॉ. ललित कुमार मिश्रा, एसडीएम
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संवाद न्यूज एजेंसी
सिद्धार्थनगर। कपिलवस्तु क्षेत्र में पुरावेश के रूप में मौजूद टीलों का संरक्षण नहीं हो रहा है। प्राकृतिक एवं मानवीय कारणों से टीलों का क्षरण हो रहा है, जबकि विशेषज्ञों की देख-रेख में टीलों का उत्खनन हो तो वहां प्राचीनता के और अधिक साक्ष्य मिल सकते हैं। यदि साक्ष्य अधिक मिल जाएंगे तो यहां के विकास के द्वार खुल लाएंगे।
केंद्रीय पुरातत्व एवं सर्वेक्षण विभाग के साथ राज्य पुरातत्व विभाग ने भी इस क्षेत्र की प्राचीनता की जांच में रुचि नहीं दिखाई है। केंद्रीय पुरातत्व एवं सर्वेक्षण विभाग ने कपिलवस्तु, गनवरिया एवं पिपरीकोट को संरक्षित किया है। इन स्थानों पर उत्खन्न हुआ और चहारदारी बनाकर संरक्षण किया गया है। यहां बोर्ड में वहां की विशेषताएं भी लिखी गई हैं, जबकि पिपरीकोट में भी टीले में क्षरण भी हो रहा है। इस क्षेत्र में गरगजवा, सलारगढ़, लाला पंचगवां, पिपरसन सहित अन्य क्षेत्रों में भी पुरावशेष है। एक अनुमान के मुताबिक ये पुरावशेष 2500 साल पुराने होंगे, यहां उत्खन्न हो तो प्राचीनता के अनेक साक्ष्य मिल सकते हैं। ये साक्ष्य शोध में उपयोगी हो सकते हैं।
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प्रशासन ने लगाया था बोर्ड, अराजकतत्वों ने फाड़ दिया
क्षेत्र के पिपरसन में अवैध खनन होने पर तीन माह पहले अधिकारियों ने मौका मुआयना किया था, उसके बाद वहां खनन रुका और वहां सुरक्षा का बोर्ड लगवा दिया गया। एसडीएम डॉ. ललित कुमार मिश्र ने कहा था कि इस स्थान की सुरक्षा के लिए पुलिस की गश्त होगी, लेकिन अराजक तत्वों ने उस बोर्ड को भी फाड़ दिया। इसके पहले लाला पंचगवां में अवैध खनन से पुरावशेष का अस्तित्व मिटने का संकट उत्पन्न हो गया था, लेकिन सिद्धार्थ विश्वविद्यालय कपिलवस्तु के प्राचीन इतिहास संस्कृति एवं पुरातत्व विभाग की अध्यक्ष डॉ. नीता यादव ने पीएमओ को ई मेल किया तो पूरे जिले में पुरातात्विक धरोहरों को सर्वेक्षण करने का आदेश जारी हुआ है, हालांकि, एक साल बाद भी यह सर्वेक्षण कार्य पूरा नहीं हुआ।
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चार माह पहले हुआ था सर्वेक्षण
सिद्धार्थ विश्वविद्यालय कपिलवस्तु के असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. शरदेंदु त्रिपाठी ने बताया कि पुरावशेष के संरक्षण के लिए कार्य नहीं होने कारण क्षरण हो रहा है। टीलों की कार्बन डेटिंग को पता चलेगा कि ये कितने पुराने अवशेष हैं। चार माह पहले लखनऊ से आए पुरातत्व अधिकारी ने गरगजवा टीले का सर्वेक्षण किया था, लेकिन उसके संरक्षण के लिए अब तक कार्य शुरू नहीं हुआ है। संरक्षित टीले गनवरियां में भी हथपथुआ ईंटाें में क्षरण हो रहा है।
वर्जन
कपिलवस्तु क्षेत्र के पुरावशेष के संरक्षण के लिए पुरातत्व विभाग को पत्र भेजा गया है। क्षेत्र के सभी टीलों की सुरक्षा की जाएगी। इस मामले में एसएचओ को निर्देश दिया जाएगा।
डॉ. ललित कुमार मिश्रा, एसडीएम