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मुंबई में हत्या के बाद गांव लाया गया युवक का शव, रो पड़े लोग
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मुंबई में हत्या के बाद गांव लाया गया युवक का शव, रो पड़े लोग
परसा। परिगवां गांव निवासी रमेश का शव सोमवार सुबह गांव लाया गया तो कोहराम मच गया। गांव के लोग रो पड़े। इसके बाद शव को बानगंगा के तट पर ले जाकर अंतिम संस्कार किया गया।
शुक्रवार की रात मुंबई के भिवंडी में कारोबार की प्रतिस्पर्धा में अपने करीबी की साजिश में जान गंवाने वाले शोहरतगढ़ थाना क्षेत्र के चरिगवां के 25 वर्षीय रमेश शर्मा का शव सोमवार की सुबह एंबुलेंस से गांव लाया गया। बेटे का शव लेकर पिता मुरली शर्मा घर पहुंचे। उनका धैर्य अपने पांच वर्षीय पौत्री निधि और तीन वर्षीय पौत्र सत्यम को देखकर जवाब दे गया। वह दोनों से लिपटकर काफी देर तक रोते रहे और सबसे कहते रहे कि मेरा बेटा चोरी नहीं कर सकता और अगर उस पर हत्यारोपितों को संदेह था तो उसे पुलिस को सौंप देना चाहिए था।
मां मीना रमेश का शव देखकर उसके पैरों में सिर को पटक पटककर दहाड़े मारकर रो पड़ी। यही हाल मृतक की पत्नी निर्मला का था। उसके रिश्तेदारों व गांव की महिलाओं ने उसके दोनों बच्चों का वास्ता देकर समझाने का बहुत प्रयास किया। वह केवल यही कह कर रो रही थी कि अब वह किसके सहारे बच्चों की परवरिश करेगी।
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लगभग सुबह सात बजे रमेश के शव को लेकर परिजन, रिश्तेदार व क्षेत्रवासी एनएच 730 के किनारे बानगंगा नदी के किनारे अंतिम संस्कार के लिए चले गए। नदी के तट पर मौजूद लोगों ने घटना की निंदा करते हुए आरोपितों पर कड़ी कार्रवाई करने और सरकार से मृतक के परिजनों को आर्थिक सहायता देने की मांग भी की।
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परसा। परिगवां गांव निवासी रमेश का शव सोमवार सुबह गांव लाया गया तो कोहराम मच गया। गांव के लोग रो पड़े। इसके बाद शव को बानगंगा के तट पर ले जाकर अंतिम संस्कार किया गया।
शुक्रवार की रात मुंबई के भिवंडी में कारोबार की प्रतिस्पर्धा में अपने करीबी की साजिश में जान गंवाने वाले शोहरतगढ़ थाना क्षेत्र के चरिगवां के 25 वर्षीय रमेश शर्मा का शव सोमवार की सुबह एंबुलेंस से गांव लाया गया। बेटे का शव लेकर पिता मुरली शर्मा घर पहुंचे। उनका धैर्य अपने पांच वर्षीय पौत्री निधि और तीन वर्षीय पौत्र सत्यम को देखकर जवाब दे गया। वह दोनों से लिपटकर काफी देर तक रोते रहे और सबसे कहते रहे कि मेरा बेटा चोरी नहीं कर सकता और अगर उस पर हत्यारोपितों को संदेह था तो उसे पुलिस को सौंप देना चाहिए था।
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मां मीना रमेश का शव देखकर उसके पैरों में सिर को पटक पटककर दहाड़े मारकर रो पड़ी। यही हाल मृतक की पत्नी निर्मला का था। उसके रिश्तेदारों व गांव की महिलाओं ने उसके दोनों बच्चों का वास्ता देकर समझाने का बहुत प्रयास किया। वह केवल यही कह कर रो रही थी कि अब वह किसके सहारे बच्चों की परवरिश करेगी।
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लगभग सुबह सात बजे रमेश के शव को लेकर परिजन, रिश्तेदार व क्षेत्रवासी एनएच 730 के किनारे बानगंगा नदी के किनारे अंतिम संस्कार के लिए चले गए। नदी के तट पर मौजूद लोगों ने घटना की निंदा करते हुए आरोपितों पर कड़ी कार्रवाई करने और सरकार से मृतक के परिजनों को आर्थिक सहायता देने की मांग भी की।