फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Siddharthnagar News ›   The budget was still unfinished building

बजट मिला फिर भी भवन अधूरे

Sat, 13 Feb 2016 11:50 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो/सिद्धार्थनगर
अमर उजाला ब्यूरो/सिद्धार्थनगर Updated Sat, 13 Feb 2016 11:50 PM IST
विज्ञापन
बच्चों की अच्छी तालिम के लिए बनाए जा रहे विद्यालय भवन भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ गए हैं। कार्य स्वीकृत होने, बजट मिलने के वर्षों बाद भी भवन निर्माण अधूरे हैं। भवन प्रभारी का पता नहीं है और धनराशि भी हजम हो चुकी है।
विज्ञापन


इसकी नजीर है खेसरहां ब्लॉक के दो विद्यालय।प्राथमिक विद्यालय मटियरियाडीह में भवन के लिए मिला 6.76 लाख रुपये का कोई अता-पता नहीं है। वहीं आठ साल पहले शुरू हुआ कस्तूरबा गांधी आवासीय बालिका विद्यालय का निर्माण छोड़ संस्था गायब हो चुकी है।
विज्ञापन


छात्राएं 20 किमी दूर बांसी डायट के भवन में पढ़ाई कर रही हैं। कहीं खुले आसमान के नीचे कक्षाएं लग रही हैं तो कहीं दूसरे विभाग के उधार के भवनों में पढ़ाई कराई जा रही है। अनियमितता के इस खुले खेल के बावजूद विभागीय अफसर मौन हैं। निरीक्षण और निर्देश की औपचारिकताओं से मामले को ठंडे बस्ते में डाल दिया गया है।
विज्ञापन
विज्ञापन


बांसी। खेसरहा ब्लॉक के मटियरियाडीह गांव में प्राथमिक विद्यालय का भवन बनाने के लिए वर्ष 2014 में 6.76 लाख रुपये का प्रस्ताव पास हुआ था। भवन के नाम पर दीवारें खड़ी कर दी गईं। करीब एक वर्ष बाद भी छत नहीं पड़ी है। अधूरे भवन के सामने खुले आसमान के नीचे बच्चों की पढ़ाई कराई जा रही है।

हद तो यह है कि भवन प्रभारी नियुक्त अपने ही विभाग के कर्मचारी पर कार्रवाई कर पाने में विभाग खुद को बेबस बता रहा है। मटियरिया डीह गांव में दो वर्ष पूर्व प्राथमिक विद्यालय को मंजूरी मिली।

विद्यालय भवन का निर्माण शुरू हुआ तो ग्रामीणों में आस जगी कि अब उनके बच्चों को प्राथमिक शिक्षा हासिल करने के लिए दूसरे गांव नहीं जाना पड़ेगा। भवन प्रभारी ने नींव स्तर से ऊपर आधी अधूरी दीवार तैयार कर काम बंद कर दिया। विद्यालय का निर्माण बंद देख गांव के रामानंद, सुखराज, भोला, पुण्यवासी, शिवपूजन, चुन्नीलाल आदि ने विद्यालय निर्माण शुरू करने का प्रार्थना पत्र विभागीय अधिकारियों को दिया।

अधिकारियों ने भवन का निर्माण शुरू कराने की बजाय 20 फरवरी 2015 को प्रधानाध्यापक मनीष कुमार दुबे व 1 मई 2015 को सहायक अध्यापक मनोज कुमार पांडेय को तैनात कर दिया। शिक्षा सत्र शुरू होने पर भवन के अभाव में अध्यापक इधर-उधर भटक रहे थे।

गांव वालों के प्रयास से राजबली साहनी के निजी मकान में शिक्षण कार्य शुरू हुआ। अब कुछ माह से खुले आसमान के नीचे बच्चे शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं। तत्कालीन ग्राम प्रधान कृष्णचंद्र साहनी ने आरोप लगाते हुए कहा कि विद्यालय भवन निर्माण का धन भवन प्रभारी व ग्राम प्रधान के संयुक्त खाते में भेजे जाने का प्रावधान है, मगर विभागीय अफसरों की मिलीभगत से भवन प्रभारी के एकल खाते में धन भेज दिया गया।

इसका लाभ उठाते हुए भवन प्रभारी ने सारा धन निकाल लिया और भवन का निर्माण अधूरा छोड़ दिया। ग्राम प्रधान ने इसकी जांच की मांग की है। इस संबंध में खंड शिक्षा अधिकारी खेसरहा ज्ञानचंद्र मिश्र का कहना है कि भवन निर्माण पूरा न होने पर भवन प्रभारी का वेतन रोक दिया गया है। भवन प्रभारी को निलंबित किए जाने का पत्र उच्चाधिकारियों को लिखा गया है।

बांसी। गरीब परिवार की लड़कियों को आवासीय शिक्षा देने के लिए खेसरहा ब्लाक में स्वीकृत विद्यालय भवन आठ साल बाद भी अधूरा है। काम अधूरा छोड़ कार्यदाई संस्था फरार हो चुकी है। मुकदमा दर्ज होने के बाद अन्य कार्रवाई ठप है। छात्राएं 20 किमी दूर बांसी डायट के छात्रावास भवन में पढ़ाई कर रही हैं।

सात वर्ष पहले बना अधूरा भवन भी अब जर्जर होने लगा है। इस पर खर्च लाखों रुपये बेमतलब साबित हो रहा है।वर्ष 08 में खेसरहा ब्लाक के बनकटा गांव में 36 लाख रुपये की लागत से कस्तूरबा गांधी आवासीय विद्यालय का भवन बनाने के लिए उत्तर प्रदेश सहकारी निर्माण व विकास लिमिटेड लखनऊ को जिम्मा सौंपा गया।

संस्था को 16 दिसंबर 08 को 20 लाख, 13 नवंबर 09 को 12 लाख 44 हजार सहित कुल 32 लाख 44 हजार 5 सौ रुपया जारी किया गया। इस राशि से प्रथम तल का आधा-अधूरा निर्माण कराने के बाद से संस्था गायब है। 90 प्रतिशत धनराशि लेने के बावजूद महज 40 फीसदी काम ही कराया गया।

चार वर्ष बीतने के बाद बीएसए ने कार्यदाई संस्था के खिलाफ खेसरहा थाना में 20 मार्च 2012 को मुकदमा दर्ज करा दिया। इस गंभीर प्रकरण की जानकारी एक वर्ष पूर्व मंडलायुक्त ने समीक्षा बैठक में तत्कालीन बीएसए को विद्यालय भवन निर्माण शुरू करने व कार्यदाई संस्था के खिलाफ कार्रवाई अविलंब करने का निर्देश दिया।

तब बीएसए ने लखनऊ से संचालित संस्था का पूरा विवारण पुलिस को उपलब्ध कराया। विभागीय सूत्रों के मुताबिक कार्यदाई संस्था ने कार्यालय का जो पता दे रखा है, वर्तमान में वहां कार्यालय मौजूद नहीं है।


खंड शिक्षा अधिकारी खेसरहा ज्ञानचंद्र मिश्रा ने बताया कि समय-समय पर विद्यालय भवन का निर्माण न पूरा होने की सूचना उच्च अधिकारियों को दी जाती रही है। बीएसए अजय कुमार सिंह का कहना है कि भवन निर्माण के मद में 12 लाख रुपये शेष बचा हुआ है, जिससे बचे हुए काम को पूरा कराने का प्रयास किया जा रहा है।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed