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ऑडिट टीम की जांच में खुली मनरेगा की पोल

Mon, 29 Aug 2016 10:44 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला सिद्धार्थनगर
ब्यूरो/अमर उजाला सिद्धार्थनगर Updated Mon, 29 Aug 2016 10:44 PM IST
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The audit team examined the scheme in the open pole
मनरेगा कार्यों से संबधित अभिलेखों की जांच करती सोशल आॅडिट टीम। - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
डुमरियागंज। सोमवार को भनवापुर ब्लॉक में सोशल ऑडिट टीम की जांच में मिली सच्चाई से सभी चौंक गए। गांव में मुफलिसी की शिकार गरीब महिला को जहां साल भर से दौड़ने के बाद भी जॉबकार्ड नहीं नसीब हुआ। वहीं ग्राम प्रधान व सेक्रेटरी की मिलीभगत से गांव में मुर्दे के द्वारा मनरेगा में मजदूरी करवाने का मामला प्रकाश में आया है। इतना ही नहीं एक अन्य गांव में तैनात रोजगार सेवक को भी मनरेगा मजदूर बनाकर 14 दिनों की मजदूरी के एवज में 2254 रुपये का भुगतान किया गया है। जांच के दौरान सेक्रेट्री की उपस्थित नहीं होने से ग्रामीण खफा हो गए। 
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केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी योजना मनरेगा में सोमवार को भनवापुर ब्लाक क्षेत्र के भड़रिया ग्राम पंचायत में भारी गड़बड़झाला उजागर हुआ। मनरेगा कार्यों की ग्राम स्तर पर जांच के लिए बनाई गई सोशल ऑडिट टीम जब गांव के प्राथमिक स्कूल पर खुली बैठक के दौरान कार्यों के बारें में ग्रामीणों से जानकारी लेकर मनरेगा कार्यों की प्रगति का हाल जाना। टीम की अगुवाई कर रहे अज्ञाराम के साथ रामदेव वर्मा, कृष्णकांत श्रीवास्तव व शीला देवी को ग्राम प्रधान प्रतिनिधि सुरेश सिंह द्वारा मनरेगा जाबकार्ड रजिस्टर के अलावा अन्य कोई अभिलेख नहीं दिखाया गया।
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टीम के सदस्यों ने जब रजिस्ट्रर में दर्ज मनरेगा मजदूरों के नामों को ग्रामीणों के सामने पढ़ा तो लोगों ने बताया कि साधूसरन, मदवा प्रताप पुर में रोजगार सेवक के पद पर तैनात हैं। साधूसरन के नाम पर वर्ष 2015 में 14 दिनों की मजदूरी के रूप में 2254 रुपये का भुगतान लिया गया है। इतना ही नहीं रजिस्टर में कुछ मृत हुए लोगों का भी नाम दर्ज मिला। जिनसे मजदूरी करवाई गई है। जांच के दौरान गांव की ही सरीफुनिशां पत्नी मुख्तार ने बताया कि वह पिछले एक साल से जाबकार्ड बनवाने के लिए रोजगार सेवक से मनुहार कर रही है।
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लेकिन उसे जाबकार्ड जारी नहीं किया जा रहा है। रजिस्ट्रर में क्रमांक संख्या 10 से 345 तक मजदूरों की फोटो नहीं लगी थी। उसे प्रमाणित भी नहीं किया गया था। कई मजदूरों ने आरोप लगाया कि उनका जाब कार्ड रोजगार सेवक सत्यप्रकाश अपने पास रखा है। जांच के बाद टीम को मिली खामियों की रिपोर्ट बनाकर टीम वहां से वापस लौट आई। इस दौरान सहजराम, फागू, दुलारे आदि लोग मौजूद रहे। इस संबंध में सोशल ऑडिट टीम के लीडर अज्ञाराम ने बताया कि गांव में मनरेगा रजिस्टर में कई कमियां मिली हैं। इसकी रिपोर्ट वह बीडीओ को देंगे। जिसके बाद आवश्यकतानुसार कार्रवाई की जाएगी।
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