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Siddharthnagar News: समय से मिलेंगी पाठ्य पुस्तकें
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सिद्धार्थनगर। बेसिक विद्यालयों बच्चों को किताब के लिए नहीं भटकना पड़ेगा। इस बार किताब की आपूर्ति समय से शुरू हो गई है। डिमांड के अनुरूप 90 प्रतिशत के करीब किताबें पहुंची चुकी हैं।
सत्र शुरू होने के साथ ही बच्चों में वितरित की जाएंगी। ताकि पढ़ाई में किसी प्रकार की परेशानी का सामना न करना पड़े। इसके अलावा और जैसे-जैसे नामांकन होगा और बच्चों की संख्या बढ़ेगी डिमांड करके किताबें मंगाई जाएंगी।
बेसिक स्कूलों को सरकार बेहतर बनाने और इंग्लिश मीडिया के तर्ज पर विकसित करने, स्मार्ट क्लॉस चलाने के साथ ही किताब मुफ्त देती है। साथ ही ड्रेस, स्वेटर और जूता-मोजा के लिए डीबीटी के माध्यम से बच्चों के अभिभावकों के बैंक खाते में खरीद के लिए रुपये देती है।
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कई बार रुपये न पहुंचने आदि की समस्याएं होती हैं। इसके अलावा किताब भी न वितरण होने की बात सामने आती रहती है।
किताब के न होने के कारण बच्चों का कोर्स प्रभावित होता है। वह समस्या न उत्पन्न होने पर इसके लिए इस बार पहले से ही शासन और विभाग दोनों एक्टिव हैं। समय से डिमांड भेजी गई थी। जिले में किताब की आपूर्ति शुरु हो गई है।
विभाग के आंकड़ों के मुताबिक, जिले में करीब 90 प्रतिशत किताब आ चुकी है। आंकड़ों पर गौर करें तो जनपद में 2,262 परिषदीय विद्यालय संचालित हो रहे हैं। करीब ढाई लाख बच्चे पढ़ते हैं। हर साल नामांकन घटता- बढ़ता है। संवाद
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सत्र शुरू होने के साथ ही बच्चों में वितरित की जाएंगी। ताकि पढ़ाई में किसी प्रकार की परेशानी का सामना न करना पड़े। इसके अलावा और जैसे-जैसे नामांकन होगा और बच्चों की संख्या बढ़ेगी डिमांड करके किताबें मंगाई जाएंगी।
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बेसिक स्कूलों को सरकार बेहतर बनाने और इंग्लिश मीडिया के तर्ज पर विकसित करने, स्मार्ट क्लॉस चलाने के साथ ही किताब मुफ्त देती है। साथ ही ड्रेस, स्वेटर और जूता-मोजा के लिए डीबीटी के माध्यम से बच्चों के अभिभावकों के बैंक खाते में खरीद के लिए रुपये देती है।
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कई बार रुपये न पहुंचने आदि की समस्याएं होती हैं। इसके अलावा किताब भी न वितरण होने की बात सामने आती रहती है।
किताब के न होने के कारण बच्चों का कोर्स प्रभावित होता है। वह समस्या न उत्पन्न होने पर इसके लिए इस बार पहले से ही शासन और विभाग दोनों एक्टिव हैं। समय से डिमांड भेजी गई थी। जिले में किताब की आपूर्ति शुरु हो गई है।
विभाग के आंकड़ों के मुताबिक, जिले में करीब 90 प्रतिशत किताब आ चुकी है। आंकड़ों पर गौर करें तो जनपद में 2,262 परिषदीय विद्यालय संचालित हो रहे हैं। करीब ढाई लाख बच्चे पढ़ते हैं। हर साल नामांकन घटता- बढ़ता है। संवाद