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सर्पदंश से किशोर की मौत, सीएचसी में इलाज में लापरवाही का आरोप
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सर्पदंश से किशोर की मौत, सीएचसी में इलाज में लापरवाही का आरोप
ढेबरुआ। थाना क्षेत्र मधवानगर गांव में मंगलवार दोपहर किशोर को सांप ने डस लिया। इससे किशोर की मौत हो गई। परिजनों का आरोप है कि बढ़नी सीएचसी पर इलाज में ध्यान नहीं देने की वजह से बच्चे की हालत बिगड़ी और उसकी जान चली गई।
क्षेत्र के माधवानगर गांव निवासी हरिश्चंद्र चौधरी ने बताया कि उनका पुत्र धर्मवीर (14) दोपहर में अपने घर पास बच्चों के साथ खेल रहा था। तभी सांप ने उसको डस लिया। उसे प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र बढ़नी ले जाया गया। वहां पर डॉक्टर ने इलाज कर वापस घर भेज दिया था। घर पहुंचते ही किशोर की हालत खराब होने पर दोबारा बढ़नी पीएचसी ले जाया गया। तब जवाब दे दिया गया। उसके बाद परिजनों ने उसको बढ़नी के एक प्राइवेट अस्पताल में लेकर गए। वहां किशोर की मौत हो गई।
वहीं, प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र बढ़नी में तैनात चिकित्सक डॉ. वीके सिंह ने बताया कि सांप के डंसने का कोई भी निशान व लक्षण नहीं था। देखकर यह पता नहीं चला कि बच्चे को सांप ने ही डंसा था। बच्चे को कोई और बीमारी थी। बढ़नी में एएसवी लगभग 50 इंजेक्शन उपलब्ध है। वहीं धर्मवीर के पिता व घर के परिजनों ने कहा कि पीएचसी पर तैनात चिकित्सक ने अपनी निगरानी में इलाज कराया होता तो बच्चे की जान बच सकती थी।
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ढेबरुआ। थाना क्षेत्र मधवानगर गांव में मंगलवार दोपहर किशोर को सांप ने डस लिया। इससे किशोर की मौत हो गई। परिजनों का आरोप है कि बढ़नी सीएचसी पर इलाज में ध्यान नहीं देने की वजह से बच्चे की हालत बिगड़ी और उसकी जान चली गई।
क्षेत्र के माधवानगर गांव निवासी हरिश्चंद्र चौधरी ने बताया कि उनका पुत्र धर्मवीर (14) दोपहर में अपने घर पास बच्चों के साथ खेल रहा था। तभी सांप ने उसको डस लिया। उसे प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र बढ़नी ले जाया गया। वहां पर डॉक्टर ने इलाज कर वापस घर भेज दिया था। घर पहुंचते ही किशोर की हालत खराब होने पर दोबारा बढ़नी पीएचसी ले जाया गया। तब जवाब दे दिया गया। उसके बाद परिजनों ने उसको बढ़नी के एक प्राइवेट अस्पताल में लेकर गए। वहां किशोर की मौत हो गई।
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वहीं, प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र बढ़नी में तैनात चिकित्सक डॉ. वीके सिंह ने बताया कि सांप के डंसने का कोई भी निशान व लक्षण नहीं था। देखकर यह पता नहीं चला कि बच्चे को सांप ने ही डंसा था। बच्चे को कोई और बीमारी थी। बढ़नी में एएसवी लगभग 50 इंजेक्शन उपलब्ध है। वहीं धर्मवीर के पिता व घर के परिजनों ने कहा कि पीएचसी पर तैनात चिकित्सक ने अपनी निगरानी में इलाज कराया होता तो बच्चे की जान बच सकती थी।
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