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तकनीकी शिक्षा को भटक रहे युवा

Sat, 21 Jan 2017 11:11 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला सिद्धार्थनगर
ब्यूरो/अमर उजाला सिद्धार्थनगर Updated Sat, 21 Jan 2017 11:11 PM IST
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Technical education wander young
तकनीकी शिक्षा के नाम पर मिनी आईटीआई ही जिले में मौजूद है। - फोटो : अमर उजाला
सिद्धार्थनगर। जिला अपनी स्थापना के तरुण अवस्था में पहुंच चुका है पर जिले के युवाओं को तकनीकी शिक्षा से जोडने का कारगर प्रयास नहीं हुआ। पूरे देश में तकनिकीकरण को बढ़ावा देने पर जोर है वहीं जिले में तकनीकी शिक्षण संस्थाओं का अभाव बना हुआ है। डुमरियागंज में इकलौते राजकीय पॉलीटेक्नीक को छोड़ दें तो पूरे जनपद में कहीं भी कोई तकनीकी शिक्षण संस्थान नहीं हैं। डुमरियागंज और मुख्यालय पर आईटीआई जरूर है पर सुविधा संसाधन और ट्रेड के मामले में यह काफी पीछे है। तकनीकी शिक्षण में डिग्री हासिल करने का सपना यहां टूट रहा है अथवा बड़े शहरों में जाकर पूरा हो रहा है।
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तकनीकी क्षेत्र सदा से ही युवाओं को रोजगार मुहैया कराने वाली पढ़ाई मानी गई। विकास के बढ़ते आयामों के बीच तकनिकी शिक्षा अहम कड़ी बनकर उभरी। तकनीकी क्षेत्र के दक्ष लोगों को विदेशों में तक नौकरियां मिलने लगीं और इसमें संभावना का विकास हुआ। कोशिश तो यह होनी चाहिए कि तकनीकी शिक्षण संस्थानों में विस्तार किया जाए पर ऐसा कुछ नहीं हुआ। मिनी आईटीआई और आईटीआई जिले में संचालित हैं पर इसका लाभ युवाओं को नहीं मिल पा रहा है। आईटीआई कालेजों की स्थिति बदतर है।
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मुख्यालय के भीमापार में आईटीआई स्कूल संचालित होता है पर यहां सिर्फ नमांकन और पेपर देने के वक्त ही विद्यार्थी दिखाई देते हैं। संस्थानों में प्रायोगिक प्रशिक्षण की व्यवस्था नहीं है दक्ष शिक्षकों की कमी से संस्थान जूझ रहे हैं जिससे युवा हुनर सीखने में पीछे रह जा रहे हैं। पॉलीटेक्रिक का दायरा सीमित है लाख कोशिशों के बाद बस्ती-डुमरियागंज बार्डर पर एक राजकीय पालिटेक्रिक की स्थापना तो हुई पर अभी यहां की व्यवस्थाओं में काफी सुधार की आवश्यकता है। प्रतिवर्ष जिले के लगभग दो हजार से अधिक परीक्षार्थी पॉलीटेक्नीक परीक्षा में बैठते हैं पर जिले में कॉलेज न होने उके कारण उन्हें पश्चिमी प्रदेशों की ओर रूख करना पड़ता है। कंप्यूटर कोर्सेज के लिए भी लोगों को गोरखपुर और लखनऊ जैसे शहरों की ओर जाना पड़ता क्योंकि जिले में प्रशिक्षण की कोई व्यवस्था नहीं है।
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