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Siddharthnagar News: हैंडओवर के पेच में अटकी तकनीकी शिक्षा... विद्यार्थी दूर जाने काे मजबूर

Mon, 25 May 2026 12:28 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर Updated Mon, 25 May 2026 12:28 AM IST
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Technical education is stuck in the handover process... students are forced to go far away.
तुलसियापुर। बढ़नी ब्लॉक के मनिकौरा गांव में सवा छह करोड़ रुपये की लागत से बन रहे आईटीआई काॅलेज का निर्माण पूरा हो चुका है। इसके बाद भी हैंडओवर न होने से तकनीकी शिक्षा की चाह रखने वाले विद्यार्थियों को पढ़ाई के लिए दूर जाने को मजबूर होना पड़ रहा है। वहीं, अफसरों का कहना है कि भवन बनकर तैयार हो चुका है। जल्द इसे हैंडओवर कर दिया जाएगा, जिसके बाद पढ़ाई शुरू हो जाएगी।
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बढ़नी ब्लॉक शैक्षिक क्षेत्र में पिछड़ा हुआ है। यहां पर बड़े शैक्षिक संस्थान न होने से बच्चों को पढ़ाई के लिए दूसरे शहरों में जाना पड़ता है। खास करके टेक्निकल डिग्री हासिल करने के लिए उन्हें बाहर जाना मजबूरी बन गई है। सीमावर्ती इलाके के बच्चाें की परेशानियों को देखते हुए 2016 में तत्कालीन विधायक लालमुन्नी सिंह ने प्रयास कर मनिकौरा में 6.27 करोड़ रुपये की लागत से बनने वाले आईटीआई कॉलेज की स्वीकृति मिली थी। इससे क्षेत्रवासियों में प्रसन्नता की एक लहर दौड़ गई। उन्हें उम्मीद थी कि अब उनके बच्चों को आईटीआई के लिए गोरखपुर और अन्य शहरों में नहीं जाना पड़ेगा। कार्यदायी संस्था सीएनडीएस की ओर से निर्माण कार्य करवाया जा रहा था, लेकिन कार्य में लापरवाही के कारण शासन ने अधूरे काम को पूरा करने की जिम्मेदारी उप्र राज्य निर्माण सहकारी संघ लिमिटेड को सौंप दिया था। मौजूदा समय में शिक्षकों के लिए आवास और वर्कशाप का काम हो रहा है। इसके अलावा पानी की टंकी भी बनाई जा रही है। ठेकेदार ने बताया कि मिट्टी पटाई का भुगतान नहीं हुआ है। इसके अलावा वहां काम कर रहे मजदूरों ने बताया कि सबसे बड़ी समस्या वहां जाने के लिए रास्ता नहीं है। बरसात में सिर्फ पैदल ही वहां पहुंचा जा सकता है।
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क्षेत्र के राकेश मिश्र, ओमप्रकाश, रियाज अहमद, सिद्धार्थ यादव ने बताया कि करीब नौ साल हो रहे हैं, लेकिन अभी तक काम पूरा नहीं हो पाया है। मुख्य भवन तैयार है, अगर चाहते तो कक्षाएं शुरू की जा सकतीं थीं लेकिन अन्य अतिरिक्त भवन न बनने के कारण मामला लटका हुआ है। इस साल भी संचालन की उम्मीद नहीं है। इस पर स्थानीय प्रशासन को ध्यान देने की जरूरत है।
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