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Siddharthnagar News: नेपाल में डाक मतपत्र और ऑनलाइन मतदान की व्यवस्था की कवायद
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सिद्धार्थनगर। नेपाल का निर्वाचन आयोग प्रवासी मतदाताओं के लिए डाक मतपत्र और ऑनलाइन मतदान की सुविधा की तैयारी कर रहा है। आयोग ने इस व्यवस्था को निर्वाचन प्रबंधन विधेयक में शामिल करने के लिए गृह मंत्रालय को प्रस्ताव भेजा है। विधेयक पारित हो जाता है तो भारत समेत अन्य देशों में रह रहे नेपाली नागरिक आसानी से मतदान कर सकेंगे।
नेपाल में वर्ष 2021 की जनगणना में 21.90 लाख लोग ऐसे दर्ज किए गए थे जो भारत समेत अन्य देशों में रहते हैं। यह प्रवासी मतदाताओं की संख्या तो नहीं है लेकिन इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि विदेश में होने के कारण बड़ी संख्या में लोग मतदान के लिए पहुंच नहीं पाते हैं। भारत में मेहनत-मजदूरी करके परिवार चलाना और मतदान के लिए नेपाल के अपने निर्वाचन क्षेत्र तक पहुंचना उनके लिए बड़ी चुनौती होती है। काम छोड़कर मतदान के लिए घर चले जाने पर उन्हें आर्थिक नुकसान उठाना पड़ता है।
मतदाताओं की इन मुश्किलों को देखते हुए निर्वाचन आयोग ने डाक मतपत्र, इंटरनेट के माध्यम से मतदान और इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन जैसे विकल्पों का अध्ययन किया है। विदेश में रह रहे और अपने पंजीकृत निर्वाचन क्षेत्र से बाहर रहने वाले मतदाताओं की सुविधा के लिए आयोग ने बीते 27 अक्तूबर को गृह मंत्रालय को नई व्यवस्था का प्रस्ताव भेजा है। हालांकि, इसमें भी विदेश में मतदाता की पहचान की पुष्टि, मत की गोपनीयता, साइबर सुरक्षा, मतपत्रों की सुरक्षित गणना और संबंधित देशों के साथ समन्वय समेत कई चुनौतियां हैं। आयोग ने कानूनी और तकनीकी तैयारी पूरी होने के बाद चुनिंदा स्थानों पर परीक्षण की संभावना जताई है।
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आठ साल पहले आदेश, अब विधेयक में गुंजाइश की तलाश
नेपाल के सुप्रीम कोर्ट ने वर्ष 2018 में विदेश में रह रहे पात्र नागरिकों को मतदान का अवसर देने के लिए आवश्यक व्यवस्था बनाने का निर्देश दिया था। इसके बावजूद 2022 के चुनावों और फरवरी 2026 में हुए प्रतिनिधि सभा चुनाव में विदेश से मतदान की व्यवस्था लागू नहीं हो सकी। अब निर्वाचन आयोग ने प्रस्तावित विधेयक में प्रवासी मतदाताओं की सुविधा के लिए डाक मतपत्र समेत अन्य प्रावधान शामिल करने का प्रस्ताव दिया है।
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कोट
पहली बार 3 जुलाई 2023 को चुनाव से संबंधित सात अलग-अलग कानूनों को मिलाकर एक कानून बनाने का प्रारंभिक मसौदा मंत्रालय को भेजा गया था। सरकार की सिफारिश पर आयोग ने बीते 5 जून को संशोधित और समेकित मसौदा दोबारा भेजा। अब नए प्रस्ताव में दूसरे जिले और विदेश से मतदान के प्रावधान भी जोड़ने का प्रस्ताव दिया गया है। दोनों व्यवस्थाएं चरणबद्ध तरीके से लागू की जा सकती हैं।
- गुरु प्रसाद वाग्ले, निर्वाचन आयुक्त, नेपाल
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नेपाल में वर्ष 2021 की जनगणना में 21.90 लाख लोग ऐसे दर्ज किए गए थे जो भारत समेत अन्य देशों में रहते हैं। यह प्रवासी मतदाताओं की संख्या तो नहीं है लेकिन इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि विदेश में होने के कारण बड़ी संख्या में लोग मतदान के लिए पहुंच नहीं पाते हैं। भारत में मेहनत-मजदूरी करके परिवार चलाना और मतदान के लिए नेपाल के अपने निर्वाचन क्षेत्र तक पहुंचना उनके लिए बड़ी चुनौती होती है। काम छोड़कर मतदान के लिए घर चले जाने पर उन्हें आर्थिक नुकसान उठाना पड़ता है।
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मतदाताओं की इन मुश्किलों को देखते हुए निर्वाचन आयोग ने डाक मतपत्र, इंटरनेट के माध्यम से मतदान और इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन जैसे विकल्पों का अध्ययन किया है। विदेश में रह रहे और अपने पंजीकृत निर्वाचन क्षेत्र से बाहर रहने वाले मतदाताओं की सुविधा के लिए आयोग ने बीते 27 अक्तूबर को गृह मंत्रालय को नई व्यवस्था का प्रस्ताव भेजा है। हालांकि, इसमें भी विदेश में मतदाता की पहचान की पुष्टि, मत की गोपनीयता, साइबर सुरक्षा, मतपत्रों की सुरक्षित गणना और संबंधित देशों के साथ समन्वय समेत कई चुनौतियां हैं। आयोग ने कानूनी और तकनीकी तैयारी पूरी होने के बाद चुनिंदा स्थानों पर परीक्षण की संभावना जताई है।
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आठ साल पहले आदेश, अब विधेयक में गुंजाइश की तलाश
नेपाल के सुप्रीम कोर्ट ने वर्ष 2018 में विदेश में रह रहे पात्र नागरिकों को मतदान का अवसर देने के लिए आवश्यक व्यवस्था बनाने का निर्देश दिया था। इसके बावजूद 2022 के चुनावों और फरवरी 2026 में हुए प्रतिनिधि सभा चुनाव में विदेश से मतदान की व्यवस्था लागू नहीं हो सकी। अब निर्वाचन आयोग ने प्रस्तावित विधेयक में प्रवासी मतदाताओं की सुविधा के लिए डाक मतपत्र समेत अन्य प्रावधान शामिल करने का प्रस्ताव दिया है।
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कोट
पहली बार 3 जुलाई 2023 को चुनाव से संबंधित सात अलग-अलग कानूनों को मिलाकर एक कानून बनाने का प्रारंभिक मसौदा मंत्रालय को भेजा गया था। सरकार की सिफारिश पर आयोग ने बीते 5 जून को संशोधित और समेकित मसौदा दोबारा भेजा। अब नए प्रस्ताव में दूसरे जिले और विदेश से मतदान के प्रावधान भी जोड़ने का प्रस्ताव दिया गया है। दोनों व्यवस्थाएं चरणबद्ध तरीके से लागू की जा सकती हैं।
- गुरु प्रसाद वाग्ले, निर्वाचन आयुक्त, नेपाल