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Siddharthnagar News: नेपाल में भारत में बनी टाइल्स की मांग, तस्कर कर रहे पूरा
Wed, 20 Dec 2023 01:54 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
Updated Wed, 20 Dec 2023 01:54 AM IST
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सिद्धार्थनगर। भारत में बनी टाइल्स की नेपाल में मांग अधिक होने से तस्करी ही नहीं टैक्स की चोरी बढ़ गई। पिछले दिनों एसएसबी ने ऐसे कई तस्करों को पकड़ा जो बाइक और दूसरे वाहनों से टाइल्स को सीमा पार भेज रहे थे।
बता दें कि वैधानिक रूप से जाने पर 18 प्रतिशत जीएसटी लगता है। ऐसे में बॉर्डर पार करते ही टाइल्स के दाम डेढ़ से दो गुना हो जाते हैं। भारत-नेपाल की खुली सीमा कभी रिश्तों में सुधार और आपसी सौहार्द के लिए जानी जाती थी। लेकिन देशविरोधी तत्वों की नजर सीमा पर बढ़ी तो वह देश को कई प्रकार के क्षति पहुंचाने का कार्य कर रहे हैं। मौजूदा समय में नेपाल में निर्मित होने वाले भवनों में टाइल्स लगाने की क्रेज बढ़ा है। भारी भरकम टैक्स होने के कारण नेपाल में टाइल्स महंगा बिकता है। इसलिए नेपाली नागरिक तस्करों के जरिए भारत से टाइल्स खरीद कर रहे हैं। पिछले एक माह में बार्डर पर एसएसबी ने कई लोगों को टाइल्स के साथ पकड़ा है और जब्ती की कार्रवाई की है।
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एक चक्कर में दो हजार तैयार
टाइल्स की तस्करी बाइक से की गई जा रही है। एक बार में एक बाइक पर चार गत्ता तक ले जा रहे हैं। एक गत्ते में नौ और 12 पीस आता है। यहां डिजाइन के हिसाब से 500 से चार हजार रुपये प्रति गत्ता खरीद पड़ रहा है। जिसका बाॅर्डर पार होने पर प्रति गत्ता डेढ़ से दोगुना दाम हो जाता है। इसलिए बाइक से इस पार से उस पार ले जाते हैं।
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टैक्स चोरी का है खेल
मार्बल और टाइल्स की दुकान चलाने वाले कारोबारी रहमतुल्लाह ने बताया कि 18 प्रतिशत जीएसटी का ओरिजिनल बिल बाउचर होने के बाद बार्डर पर जांच होती है। कागजात सही मिलने पर ही सामान जा सकता है। उस 18 प्रतिशत टैक्स बचाने के लिए लोकल बिल पर खरीद करते हैं और फिर नेपाल में पहुंचा देते हैं। अगर आठ सौ का गत्ता है तो नेपाल में 1200-1500 रुपये भारतीय मुद्रा से मिल जाएगा। क्योंकि उसी की कीमत नेपाल की दुकानों पर 1800-2000 रुपये तक लगेगा। क्योंकि नेपाल में इस पर कई प्रकार के टैैक्स हैं। इसलिए तस्कर टाइल्स की तस्करी कर रहे हैं।
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केस-एक
छह गत्ता टाइल्स के साथ बाइक सवार को पकड़ा
एसएसबी ४३वीं वाहिनी सीमा चौकी कप्सिहवा के जवानों ने तीन अक्तूबर को एक बाइक सवार को पकड़ा। उसके कब्जे से छह गत्ते में 72 टाइल्स बरामद किया। खरीद से संबंधित कोई कागजात नहीं दिखा सका। इसलिए कार्रवाई करके कस्टम को सुपुर्द कर दिया गया।
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केस-दो
811 टाइल्स के साथ एक पकड़ा गया
एसएसबी ४३वीं वाहिनी खुनुवां सीमा के चौकी के जवानों ने विभिन्न ब्रांड के कई गत्ते में रखे गए 811 टाइल्स बरामद किया। बरामद टाइल्स एक स्थान पर रखा गया था। उसे बार्डर पार करने की कोशिश में थे, तभी टीम ने छापा मारकर पकड़ लिया और लिखापढ़ी करके कस्टम को सुपुर्द कर दिया। ऐसे अन्य कई मामले में इसी माह सामने आ चुके हैं।
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सोशल मीडिया के जरिए ग्राहक पसंद करते हैं टाइल्स
टाइल्स तस्करी के बारे में जब जानकारी ली गई तो बार्डर क्षेत्र के रहने वाले सुलेमान ने कहा कि टाइल्स तस्करी में एक पूरा नेटवर्क लगा हुआ है। दुकान पर जाकर खरीद करने वाला कैरियर टाइल्स की फोटो लेता है। सोशल मीडिया के जरिए सरगना और फिर खरीदार के पास पहुंचता है। फिर दाम की बोली होती है, इसके बाद खरीद करके नेपाल ले जाते हैं। इसमें तस्करों का पूरा सिस्टम कार्य कर रहा है।
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बार्डर पर एसएसबी पूरी तरह से अलर्ट है। हर आने-जाने वालों पर नजर रखी जा रही है। तस्करी के जरिए सामने लाने और ले जाने वालों पर कार्रवाई की जाती है।
-शक्ति सिंह, डिप्टी कमांडेंट एसएसबी ४३वीं वाहिनी सिद्धार्थनगर
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बता दें कि वैधानिक रूप से जाने पर 18 प्रतिशत जीएसटी लगता है। ऐसे में बॉर्डर पार करते ही टाइल्स के दाम डेढ़ से दो गुना हो जाते हैं। भारत-नेपाल की खुली सीमा कभी रिश्तों में सुधार और आपसी सौहार्द के लिए जानी जाती थी। लेकिन देशविरोधी तत्वों की नजर सीमा पर बढ़ी तो वह देश को कई प्रकार के क्षति पहुंचाने का कार्य कर रहे हैं। मौजूदा समय में नेपाल में निर्मित होने वाले भवनों में टाइल्स लगाने की क्रेज बढ़ा है। भारी भरकम टैक्स होने के कारण नेपाल में टाइल्स महंगा बिकता है। इसलिए नेपाली नागरिक तस्करों के जरिए भारत से टाइल्स खरीद कर रहे हैं। पिछले एक माह में बार्डर पर एसएसबी ने कई लोगों को टाइल्स के साथ पकड़ा है और जब्ती की कार्रवाई की है।
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एक चक्कर में दो हजार तैयार
टाइल्स की तस्करी बाइक से की गई जा रही है। एक बार में एक बाइक पर चार गत्ता तक ले जा रहे हैं। एक गत्ते में नौ और 12 पीस आता है। यहां डिजाइन के हिसाब से 500 से चार हजार रुपये प्रति गत्ता खरीद पड़ रहा है। जिसका बाॅर्डर पार होने पर प्रति गत्ता डेढ़ से दोगुना दाम हो जाता है। इसलिए बाइक से इस पार से उस पार ले जाते हैं।
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टैक्स चोरी का है खेल
मार्बल और टाइल्स की दुकान चलाने वाले कारोबारी रहमतुल्लाह ने बताया कि 18 प्रतिशत जीएसटी का ओरिजिनल बिल बाउचर होने के बाद बार्डर पर जांच होती है। कागजात सही मिलने पर ही सामान जा सकता है। उस 18 प्रतिशत टैक्स बचाने के लिए लोकल बिल पर खरीद करते हैं और फिर नेपाल में पहुंचा देते हैं। अगर आठ सौ का गत्ता है तो नेपाल में 1200-1500 रुपये भारतीय मुद्रा से मिल जाएगा। क्योंकि उसी की कीमत नेपाल की दुकानों पर 1800-2000 रुपये तक लगेगा। क्योंकि नेपाल में इस पर कई प्रकार के टैैक्स हैं। इसलिए तस्कर टाइल्स की तस्करी कर रहे हैं।
केस-एक
छह गत्ता टाइल्स के साथ बाइक सवार को पकड़ा
एसएसबी ४३वीं वाहिनी सीमा चौकी कप्सिहवा के जवानों ने तीन अक्तूबर को एक बाइक सवार को पकड़ा। उसके कब्जे से छह गत्ते में 72 टाइल्स बरामद किया। खरीद से संबंधित कोई कागजात नहीं दिखा सका। इसलिए कार्रवाई करके कस्टम को सुपुर्द कर दिया गया।
केस-दो
811 टाइल्स के साथ एक पकड़ा गया
एसएसबी ४३वीं वाहिनी खुनुवां सीमा के चौकी के जवानों ने विभिन्न ब्रांड के कई गत्ते में रखे गए 811 टाइल्स बरामद किया। बरामद टाइल्स एक स्थान पर रखा गया था। उसे बार्डर पार करने की कोशिश में थे, तभी टीम ने छापा मारकर पकड़ लिया और लिखापढ़ी करके कस्टम को सुपुर्द कर दिया। ऐसे अन्य कई मामले में इसी माह सामने आ चुके हैं।
सोशल मीडिया के जरिए ग्राहक पसंद करते हैं टाइल्स
टाइल्स तस्करी के बारे में जब जानकारी ली गई तो बार्डर क्षेत्र के रहने वाले सुलेमान ने कहा कि टाइल्स तस्करी में एक पूरा नेटवर्क लगा हुआ है। दुकान पर जाकर खरीद करने वाला कैरियर टाइल्स की फोटो लेता है। सोशल मीडिया के जरिए सरगना और फिर खरीदार के पास पहुंचता है। फिर दाम की बोली होती है, इसके बाद खरीद करके नेपाल ले जाते हैं। इसमें तस्करों का पूरा सिस्टम कार्य कर रहा है।
बार्डर पर एसएसबी पूरी तरह से अलर्ट है। हर आने-जाने वालों पर नजर रखी जा रही है। तस्करी के जरिए सामने लाने और ले जाने वालों पर कार्रवाई की जाती है।
-शक्ति सिंह, डिप्टी कमांडेंट एसएसबी ४३वीं वाहिनी सिद्धार्थनगर