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Siddharthnagar News: तस्कर बेलगाम, कोटिया बॉर्डर से धड़ल्ले से पार कर रहे खाद
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संवाद न्यूज एजेंसी
शोहरतगढ़। उर्वरक खाद सहित अन्य सामानों की तस्करी का नया केंद्र कोटिया बाजार बनता जा रहा है।
क्षेत्र से खाद की तस्करी का वीडियो व फोटो सोशल मीडिया पर इन दिनों वायरल हो रहा है, जिसमें तस्कर, साइकिल और बाइक के सहारे बड़ी ही आसानी से तस्करी के काम को अंजाम देते हुए नजर आ रहे हैं। बीते दिनों कोटिया बाॅर्डर पर एसएसबी ने दो पिकअप पर लदी सौ बोरी यूरिया बरामद की थी, जो तस्करी के जरिए नेपाल भेजी जा रही थी।
भारत व नेपाल के तराई क्षेत्रों में रबी फसल की बुवाई हुए तीन सप्ताह बीतने को हैं, जिसके बाद किसान फसल की सिंचाई करते हैं और खेत में खाद डालते हैं। किसानों की इसी मांग का फायदा तस्कर उठा रहे हैं और भारत से तस्करी के जरिए यूरिया की खेप नेपाल भेज रहे हैं। इस खेल में शामिल तस्कर व कैरियरों का काफी मुनाफा होता है।
बताया जा रहा है कि भारतीय सीमा में मौजूद कुछ उर्वरक की दुकानों से सेटिंग कर तस्कर अपना रैकेट चलाते हैं। इन दुकानों से खाद लेकर सीमा से सटे गांवों में नियत स्थानों पर डंप की जाती है और फिर मौका देखते ही उसे नेपाल पहुंचा दिया जाता है।
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बाॅर्डर क्षेत्र के सीमाई गांव के कुछ लोगों ने नाम न छापने की की शर्त बताया कि सीमावर्ती क्षेत्र के चौराहों व गांवों में तस्करों ने गोदाम बना रखा है। सेटिंग वाली दुकानों से 500 से 600 रुपये प्रति बोरी यूरिया खरीदारी कर स्टोर करते हैं। मौका देखते ही कैरियरों के माध्यम से खाद नेपाल पहुंचा दी जाती है।
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शोहरतगढ़। उर्वरक खाद सहित अन्य सामानों की तस्करी का नया केंद्र कोटिया बाजार बनता जा रहा है।
क्षेत्र से खाद की तस्करी का वीडियो व फोटो सोशल मीडिया पर इन दिनों वायरल हो रहा है, जिसमें तस्कर, साइकिल और बाइक के सहारे बड़ी ही आसानी से तस्करी के काम को अंजाम देते हुए नजर आ रहे हैं। बीते दिनों कोटिया बाॅर्डर पर एसएसबी ने दो पिकअप पर लदी सौ बोरी यूरिया बरामद की थी, जो तस्करी के जरिए नेपाल भेजी जा रही थी।
भारत व नेपाल के तराई क्षेत्रों में रबी फसल की बुवाई हुए तीन सप्ताह बीतने को हैं, जिसके बाद किसान फसल की सिंचाई करते हैं और खेत में खाद डालते हैं। किसानों की इसी मांग का फायदा तस्कर उठा रहे हैं और भारत से तस्करी के जरिए यूरिया की खेप नेपाल भेज रहे हैं। इस खेल में शामिल तस्कर व कैरियरों का काफी मुनाफा होता है।
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बताया जा रहा है कि भारतीय सीमा में मौजूद कुछ उर्वरक की दुकानों से सेटिंग कर तस्कर अपना रैकेट चलाते हैं। इन दुकानों से खाद लेकर सीमा से सटे गांवों में नियत स्थानों पर डंप की जाती है और फिर मौका देखते ही उसे नेपाल पहुंचा दिया जाता है।
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बाॅर्डर क्षेत्र के सीमाई गांव के कुछ लोगों ने नाम न छापने की की शर्त बताया कि सीमावर्ती क्षेत्र के चौराहों व गांवों में तस्करों ने गोदाम बना रखा है। सेटिंग वाली दुकानों से 500 से 600 रुपये प्रति बोरी यूरिया खरीदारी कर स्टोर करते हैं। मौका देखते ही कैरियरों के माध्यम से खाद नेपाल पहुंचा दी जाती है।