{"_id":"674ff45576302e72e30848e3","slug":"six-beds-increased-in-sncu-construction-of-picu-in-progress-siddharthnagar-news-c-227-1-sdn1003-128273-2024-12-04","type":"story","status":"publish","title_hn":"Siddharthnagar News: एसएनसीयू में बढ़ गए छह बेड, अधर में पीआईसीयू का निर्माण","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Siddharthnagar News: एसएनसीयू में बढ़ गए छह बेड, अधर में पीआईसीयू का निर्माण
Wed, 04 Dec 2024 11:49 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
Updated Wed, 04 Dec 2024 11:49 AM IST
विज्ञापन
मेडिकल कालेज में स्थित एसएनसीयू वार्ड में एक ही बेड पर भर्ती दो बच्चे।
सिद्धार्थनगर। ठंड बढ़ने के कारण बच्चे निमोनिया की चपेट में आ रहे हैं। परेशानी को देखते हुए मंगलवार को माधव प्रसाद त्रिपाठी मेडिकल कॉलेज के बाल रोग विभाग के एसएनसीयू वार्ड में छह बेड बढ़ा दिए गए।
यहां पहले से 18 बेड हैं जिसे बढ़ाकर अब 24 किया गया है। जिससे एक माह तक नवजातों के इलाज में मदद मिलेगी। बेड कम पड़ने पर गंभीर बच्चों को रेफर किया जा रहा था। वहीं पीआईसीयू वार्ड का कार्य अभी भी अधर में लटका हुआ है।
मेडिकल कॉलेज के वार्ड में नवजात शिशुओं की संख्या बढ़ने से उन्हें रेफर करना पड़ता था। लेकिन छह बेड बढ़ने से अब रेफर करने की नौबत नहीं आएगी। मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य प्रो. राजेश मोहन ने बताया कि एसएनसीयू में नवजात को छह बेड की सुविधा और दी गई है। सभी बेड को लगा दिया गया है। इंजीनियर मशीनों को स्टॉल कर रहे हैं। वहीं एमसीएच विंग के दूसरे तल पर 42 बेड का पीआईसीयू वार्ड बनाया जा रहा है।
विज्ञापन
जिसका कार्य कई महीनों से अधर में है। इससे मरीजों को सुविधा नहीं मिल पा रही है। जबकि इसको लेकर सभी प्रस्ताव पास भी हो गया है।
यदि पीआईसीयू वार्ड शुरू हो बेडों की संख्या और अधिक हो जाती साथ ही मरीजों को सहूलियत मिलती।
सभी बेड फुल, नए बेड से मिल रही राहत : एसएनसीयू में मंगलवार को सभी 18 बेड पर नवजात भर्ती थे, जबकि छह नए बेड इंस्टाल किए गए तो मरीजों को रेफर होने की संख्या कम हो गई। गंभीर रूप से बीमार बच्चों को एसएनसीयू में भर्ती किया जा रहा है। डॉ. नम्रता चौधरी ने बताया कि निमोनिया के होने के कई कारण है। यह बैक्टीरिया वायरस, इन्फ्लूएंजा, कोविड, फंगल इन्फेक्शन जैसे कारणों से होता है।
आंकड़ों के अनुसार, पूरी दुनिया में 5 साल से कम उम्र के बच्चों में निमोनिया एक लीडिंग कॉज ऑफ डेथ में गिना जाता है।
वैसे लोग जिनको हर्ट डिजीज, क्रॉनिक लंग डिजीज, दमा, सीओपीडी, किडनी के मरीज, कैंसर के मरीज को ज्यादा खतरा होता है वैसे व्यक्ति जिनको दमा है उनको निमोनिया होने का खतरा अन्य से छह से सात गुना ज्यादा बढ़ जाता है।
विज्ञापन
यहां पहले से 18 बेड हैं जिसे बढ़ाकर अब 24 किया गया है। जिससे एक माह तक नवजातों के इलाज में मदद मिलेगी। बेड कम पड़ने पर गंभीर बच्चों को रेफर किया जा रहा था। वहीं पीआईसीयू वार्ड का कार्य अभी भी अधर में लटका हुआ है।
विज्ञापन
मेडिकल कॉलेज के वार्ड में नवजात शिशुओं की संख्या बढ़ने से उन्हें रेफर करना पड़ता था। लेकिन छह बेड बढ़ने से अब रेफर करने की नौबत नहीं आएगी। मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य प्रो. राजेश मोहन ने बताया कि एसएनसीयू में नवजात को छह बेड की सुविधा और दी गई है। सभी बेड को लगा दिया गया है। इंजीनियर मशीनों को स्टॉल कर रहे हैं। वहीं एमसीएच विंग के दूसरे तल पर 42 बेड का पीआईसीयू वार्ड बनाया जा रहा है।
विज्ञापन
जिसका कार्य कई महीनों से अधर में है। इससे मरीजों को सुविधा नहीं मिल पा रही है। जबकि इसको लेकर सभी प्रस्ताव पास भी हो गया है।
यदि पीआईसीयू वार्ड शुरू हो बेडों की संख्या और अधिक हो जाती साथ ही मरीजों को सहूलियत मिलती।
सभी बेड फुल, नए बेड से मिल रही राहत : एसएनसीयू में मंगलवार को सभी 18 बेड पर नवजात भर्ती थे, जबकि छह नए बेड इंस्टाल किए गए तो मरीजों को रेफर होने की संख्या कम हो गई। गंभीर रूप से बीमार बच्चों को एसएनसीयू में भर्ती किया जा रहा है। डॉ. नम्रता चौधरी ने बताया कि निमोनिया के होने के कई कारण है। यह बैक्टीरिया वायरस, इन्फ्लूएंजा, कोविड, फंगल इन्फेक्शन जैसे कारणों से होता है।
आंकड़ों के अनुसार, पूरी दुनिया में 5 साल से कम उम्र के बच्चों में निमोनिया एक लीडिंग कॉज ऑफ डेथ में गिना जाता है।
वैसे लोग जिनको हर्ट डिजीज, क्रॉनिक लंग डिजीज, दमा, सीओपीडी, किडनी के मरीज, कैंसर के मरीज को ज्यादा खतरा होता है वैसे व्यक्ति जिनको दमा है उनको निमोनिया होने का खतरा अन्य से छह से सात गुना ज्यादा बढ़ जाता है।