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Siddharthnagar News: पुरावशेष के आने से जिले में बहेगी विकास की बयार, पर्यटन को मिलेगा बढ़ावा
Tue, 30 Dec 2025 11:30 PM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
Updated Tue, 30 Dec 2025 11:30 PM IST
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सिद्धार्थनगर। जिले की स्थापना दिवस पर कपिलवस्तु के पिपरहवा स्तूप पर आयोजित कार्यक्रम में सांसद जगदंबिका पाल के आश्वासन के बाद दिल्ली में रखे गौतम बुद्ध का अस्थि कलश एवं पिपरहवा रत्न के जिले में आने की आस जग गई है। काफी पहले से ही जिले के लोगों की तरफ से इसे वापस लाए जाने की मांग की जा रही है।
अब सांसद के आश्वासन के बाद इसके प्रति लोगों की उत्सुकता बढ़ गई है। गौतम बुद्ध का अस्थि कलश व पिपरहवा खुदाई में निकले बुद्ध कालीन पुरावशेष के यहां स्थापित होने से पूरे दुनिया में फैले बौद्ध अनुयायियों का आवागमन बढ़ जाएगा। इससे जहां यहां पर पर्यटकीय विकास होगा वहीं स्थानीय लोगों को भी इसका लाभ मिलेगा।
बता दें कि ब्रिटिश शासक इंजीनियर विलियम क्लैक्सटन पेप्पे द्वारा बौद्ध स्थली कपिलवस्तु के पिपरहवा स्तूप की खोदाई में निकले 331 रत्न को साथ इंग्लैंड ले गया था, जिसे केंद्र सरकार द्वारा नीलामी से बचाकर दिल्ली में लाकर रखा गया है।
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वहीं, गौतम बुद्ध का जो अस्थि कलश पहले कोलकाता में था, उसे भी अब दिल्ली में रखा गया है।
जनपद के प्रबुद्धजनों एवं स्थानीय लोगों द्वारा इसे वापस जिले में लाने की कई दिनों से मांग की जा रही है। इनको जिले में लाने के लिए सांसद ने संसद में आवाज उठाई थी। अब उनका यहां लाकर स्थापित करने के आश्वासन के बाद स्थानीय लोगों फिर एक बार इस मांग की जोर पकड़ने लगी है। इसे वापस निर्धारित स्थान पर रखने से पर्यटकाें को इसका लाभ मिलेगा। पर्यटन के दौरान लोग इसे नजदीक से देखकर महसूस कर पाएंगे। जिले में कई देशों के पर्यटक के साथ बुद्ध के अनुयायी पिपरहवा स्तूप को देखने के लिए आते है। ऐसे में इन पुरावशेषों को भी रखा जाए तो पर्यटक बुद्ध कालीन पुरावशेष को करीब से देख पाएंगे।
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अब सांसद के आश्वासन के बाद इसके प्रति लोगों की उत्सुकता बढ़ गई है। गौतम बुद्ध का अस्थि कलश व पिपरहवा खुदाई में निकले बुद्ध कालीन पुरावशेष के यहां स्थापित होने से पूरे दुनिया में फैले बौद्ध अनुयायियों का आवागमन बढ़ जाएगा। इससे जहां यहां पर पर्यटकीय विकास होगा वहीं स्थानीय लोगों को भी इसका लाभ मिलेगा।
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बता दें कि ब्रिटिश शासक इंजीनियर विलियम क्लैक्सटन पेप्पे द्वारा बौद्ध स्थली कपिलवस्तु के पिपरहवा स्तूप की खोदाई में निकले 331 रत्न को साथ इंग्लैंड ले गया था, जिसे केंद्र सरकार द्वारा नीलामी से बचाकर दिल्ली में लाकर रखा गया है।
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वहीं, गौतम बुद्ध का जो अस्थि कलश पहले कोलकाता में था, उसे भी अब दिल्ली में रखा गया है।
जनपद के प्रबुद्धजनों एवं स्थानीय लोगों द्वारा इसे वापस जिले में लाने की कई दिनों से मांग की जा रही है। इनको जिले में लाने के लिए सांसद ने संसद में आवाज उठाई थी। अब उनका यहां लाकर स्थापित करने के आश्वासन के बाद स्थानीय लोगों फिर एक बार इस मांग की जोर पकड़ने लगी है। इसे वापस निर्धारित स्थान पर रखने से पर्यटकाें को इसका लाभ मिलेगा। पर्यटन के दौरान लोग इसे नजदीक से देखकर महसूस कर पाएंगे। जिले में कई देशों के पर्यटक के साथ बुद्ध के अनुयायी पिपरहवा स्तूप को देखने के लिए आते है। ऐसे में इन पुरावशेषों को भी रखा जाए तो पर्यटक बुद्ध कालीन पुरावशेष को करीब से देख पाएंगे।