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Siddharthnagar News: 8 और 9 नवंबर को जुटेंगे देशभर के व्यापारी व निर्यातक

Sun, 21 Sep 2025 11:46 PM IST
गोरखपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर Updated Sun, 21 Sep 2025 11:46 PM IST
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Siddharthnagar News: Traders and exporters from across the country will gather on November 8 and 9
- जिले में होगा दूसरा काला नमक धान खरीदार-विक्रेता सम्मेलन
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- जिला प्रशासन ने तेज की क्रेता-विक्रेता सम्मेलन की तैयारी
सिद्धार्थनगर। जिले में 8 और 9 नवंबर 2025 को द्वितीय कालानमक क्रेता-विक्रेता सम्मेलन आयोजित किया जाएगा। जिला प्रशासन ने देश भर के व्यापारियों व निर्यातकों को इसमें शामिल कराने का अभियान तेज कर दिया है। इस आयोजन का उद्देश्य किसानों, व्यापारियों, प्रोफेसरों और निर्यातकों के बीच सीधा संपर्क स्थापित कर काला नमक धान के व्यापारिक अवसरों को बढ़ाना है। शासन के अपर मुख्य सचिव आलोक कुमार ने सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के मुख्य सचिवों को पत्र भेजकर अपने-अपने प्रदेशों से प्रमुख चावल व्यापारी और निर्यातक भेजकर इस आयोजन को सफल बनाने में सहयोग करने की अपेक्षा की है।
काला नमक धान, जिसे बुद्ध धान के नाम से भी जाना जाता है, विश्व की सबसे पुरानी धान प्रजातियों में से एक है। इसका इतिहास 600 ईसा पूर्व तक माना जाता है। ऐतिहासिक अभिलेख बताते हैं कि भगवान बुद्ध ने कपिलवस्तु से लौटते समय इस धान को जनता को उपहार स्वरूप दिया था। अपनी विशिष्ट सुगंध और पोषण से भरपूर इस धान को जीआई टैग भी प्राप्त है। काला नमक धान प्राकृतिक रूप से आयरन, जिंक और अन्य सूक्ष्म पोषक तत्वों से भरपूर है जो कुपोषण और एनीमिया से लड़ने में प्रभावी है।
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इसका निम्न ग्लाइसेमिक इंडेक्स मधुमेह रोगियों के लिए भी लाभकारी माना जाता है। ग्लूटेन-फ्री होने के कारण यह आधुनिक स्वास्थ्य-जागरूक उपभोक्ताओं की पहली पसंद बन रहा है। वर्तमान में सिद्धार्थनगर और आसपास के 11 जिलों में 6,000 हेक्टेयर से अधिक क्षेत्र में इसकी खेती हो रही है, जिससे सीधे तौर पर 10,000 से अधिक किसान लाभान्वित हो रहे हैं। साथ ही, ओडीओपी (वन डिस्ट्रिक्ट वन प्रोडक्ट) योजना के तहत इस धान को नई पहचान मिली है और अब इससे कुकीज, ब्रेड, पुलाव और अन्य आधुनिक व्यंजन भी बनाए जा रहे हैं। पिछले वर्ष आयोजित पहले सम्मेलन में देशभर से कृषि विशेषज्ञों, व्यापारियों और निर्यातकों ने भाग लिया था, जिससे किसानों को बाजार विस्तार और व्यापारिक साझेदारी के अवसर मिले थे। इस वर्ष का आयोजन और भी व्यापक और प्रभावी होने की उम्मीद जताई जा रही है।
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जिलाधिकारी डॉ. राजा गणपति आर ने बताया कि शासन के अपर मुख्य सचिव आलोक कुमार की ओर से सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के मुख्य सचिवों को पत्र भेजा गया है। इसमें अपने-अपने प्रदेशों से प्रमुख चावल व्यापारी और निर्यातक भेजकर इस आयोजन को सफल बनाने में सहयोग करने की अपेक्षा की गई है।
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