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Siddharthnagar News: चला गया सहारा... अब परिवार पर परवरिश का संकट

Tue, 28 Oct 2025 12:49 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर Updated Tue, 28 Oct 2025 12:49 AM IST
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Siddharthnagar News: The support is gone... now the crisis of raising the family
: त्रिलोकपुर थाना क्षेत्र के मन्नीजोत चौराहे पर हुए हादसे में हुई वृद्ध की मौत, तीन बेटों की भी हो चुकी है मौत
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- दो विधवा बहू और उनके सात बच्चों की परवरिश करता था वृद्ध रामचरन
भनवापुर। डुमरियागंज थाना क्षेत्र के मंगराव गांव निवासी राम चरन विश्वकर्मा (70) की मौत ने परिवार का सहारा छीन लिया है। तीन बेटों के असामयिक मृत्यु के बाद घर में रह रही दो बहुओं के साथ उनके सात बच्चों की परवरिश का जिम्मा संभाल रहे राम चरन विश्वकर्मा ने भी दुनिया छोड़ दी। रविवार को मन्नीजोत चौराहे पर सड़क हादसे में उनकी मौत हो गई। इसके बाद हर कोई परिवार और बच्चों की परवरिश कौन करेगा व सहारा कौन बनेगा, इसको लेकर परेशान है।

डुमरियागंज थाना क्षेत्र के राम चरन विश्वकर्मा के तीन बेटे फूल चंद, जवाहिर और चंद्र पाल के साथ ही दो बेटियां प्रियंका और वृंदावती थी। सभी बेटियों और बेटों की शादी कर दी, जहां बेटियां अपने घर खुशी खुशी रहती हैं। घर पर भी तीन बहुएं खुशी खुशी जीवन यापन कर रहे थे। राम चरन के जीवन में वर्ष 2006 ने काला अध्याय लिखना शुरू कर दिया। 35 वर्ष की उम्र में गंभीर बीमारी के चलते बड़े बेटे फूल चंद्र का निधन हो गया। अभी परिवार उसकी मौत के गम से उबर रहा था कि छह साल बाद 2012 में दूसरे बेटे जवाहिर की भी 32 वर्ष की उम्र में गंभीर बीमारी ने मौत हो गई।
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किसी तरह से छोटे बेटे चंद्रपाल और तीन बहुओं के साथ जीवन की गाड़ी खींचते रहे। पुरानी बातों को भूल कर परिवार का पालन पोषण व परवरिश में जुट गए। जीवन धीरे धीरे पटरी पर लौट ही रही थी कि छोटे बेटे चंद्र पाल का भी 2024 में त्रिलोकपुर थाना क्षेत्र के मल्हवार चौराहे पर एक हादसे में घायल होने के बाद इलाज के दौरान लखनऊ में मौत हो गई। तीन तीन जवान बेटों के अर्थी को कंधा देते देते टूट चुके राम चरन खुद को संभालते हुए बहुओं व उनके बच्चों की परवरिश में जुट गए। मगर रविवार को हुए सड़क हादसे में उनकी जान भी चली गई।
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परिवार में महिलाएं व बच्चे ही रह गए
डुमरियागंज थाना क्षेत्र के मंगराव गांव निवासी 70 वर्षीय राम चरन विश्वकर्मा के तीन बेटों के मौत के बाद बड़ी बहू ने मुंबई में दूसरी शादी कर ली। वहीं दूसरे नंबर की बहु प्रभावती व उसकी एक पुत्री 14 वर्षीय उजाला के साथ ही छोटी बहू माधुरी व उसके बेटी करीना, ज्योतिमा, प्रतिमा व दो बेटे सत्यम व दो वर्षीय अनूप सहित छह परिवार का पालन हार राम चरन के जिम्मे था। रविवार को दोपहर मन्नीजोत चौराहे पर हुए एक हादसे में राम चरन विश्वकर्मा की मौत के बाद अब कोई सहारा नहीं बचा है।

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आठ बीघा जमीन बेटों के इलाज में गंवाया
भनवापुर क्षेत्र के मंगराव निवासी राम चरन (70) के पास जीवन यापन के लिए पर्याप्त खेती योग्य जमीन भी थी। दो बेटों के बीमारी के चलते इलाज के लिए आठ बीघा जमीन भी बेच दी, फिर भी उन्हें नहीं बचा पाए। बहू माधुरी और प्रभावती ने बताया कि राम चरन हमेशा ही आश्वासन देते थे अभी मैं जिंदा हूं चिंता मत करो। जल्द मकान बनवा देंगे। ईश्वर ने छत तो नहीं दिया मगर अब परिवार के एकमात्र बचे जिम्मेदार का हाथ हम लोगों के सिर से जरूर छीन लिया। जर्जर मकान में पतरा रख कर जीवन यापन करने वाली बहुएं जब दहाड़े मार कर रो रहीं थी तो हर किसी का कलेजा हाथ में आ जाता है।
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