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Siddharthnagar News: कागजात में अटकी व्यवस्था...कदम-कदम पर सताती हैं दुश्वारियां
Sun, 02 Nov 2025 11:09 PM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
Updated Sun, 02 Nov 2025 11:09 PM IST
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शहर के बेलहिया चौराहे से बाल्मीकि नगर के मुख्य मार्ग पर नाली का निर्माण ऊंचा होने के कारण भरा ह
सिद्धार्थनगर। विकसित होने के बाद शहर का हिस्सा बने चार मोहल्ले के लोग अब भी गांव जैसा दर्द ही झेल रहे हैं। इन मोहल्लों में निवास करने वाली बड़ी आबादी के अलावा गुजरने वाले लोगों को खराब सड़क की वजह से इलाका चुभ रहा है।
वहीं बेमौसम बारिश ने मुश्किलें और बढ़ा दी है। इस बारिश के बाद सड़क के गड्ढों का आकार बढ़ गया है। ऐसे में मोहल्ले के लोगों को बाइक, चार पहिया वाहन को लेकर निकलने में हिचकोले खाने पड़ रहे हैं।
कभी शहर में होते हुए भी गांव में होने का दर्द झेलने वाले लोगों को शहर में शामिल होने की आस थी। शहर के सीमा विस्तार में उनके सपने पूरे हुए और उनका क्षेत्र शहरी दायरे में आ गया तो उम्मीद हुई कि बेहतर सड़क, जलनिकासी सहित अन्य व्यवस्थाएं बेहतर हो जाएंगी। लेकिन शहर के अन्य मोहल्लों की तरह विकास की रोशनी अब भी इन मोहल्लों तक नहीं पहुंची हैं।
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हर दिन शहर की सड़कों पर निकलने के बाद झटका खाकर उन्हें इसका अहसास भी होता है। मोहल्ले के लोगों का कहना है कि सड़क बन जाए तो सारी समस्या दूर हो जाए। बारिश में समस्या बढ़ जाती है, जैसा कि पिछले तीन दिन हुई बारिश के बाद परेशानी हुई। तस्वीरें भी बदहाली बयां कर रही हैं। हालांकि, पालिका के जिम्मेदारों का कहना है कि सड़क की नपाई होकर कार्ययोजना में शामिल की जा चुकी है।
हाईवे से 100 मीटर दूरी के बाद बढ़ जाती है मुसीबत: शहर में होते हुए शहर न होने का दर्द झेल रहे उसका ब्लॉक की ग्राम पंचायत दतरंगवा गांव शहर का दायरा बढ़ने के बाद शहर का हिस्सा बना गया। नाम मिला परशुरामनगर। इसके बाद से विकास के छोटे-मोटे काम शुरू भी हुए, लेकिन हाईवे से निकलकर इस वार्ड में जाने वाली सड़क 100 मीटर बाद की सड़क की हालत बहुत ही खराब है। बारिश होने के बाद सड़क कीचड़ से सन जाती है। इससे कई दिनों तक लोगों को आने-जाने में कठिनाई से जूझना पड़ता है। पमोहल्ले के रमेश कुमार, अजीत ने बताया कि शहर के विस्तार के बाद लोग घर बनवा रहे हैं, लेकिन सड़क न बनने से परेशानी है। सड़क बन जाए तो आवागमन आसान हो जाए।
हाईवे ने बढ़ा दी मुसीबत: शहर में होते हुए शहर न होने का दर्द झेल रहे थरौली गांव का दूसरा हिस्सा शहर में शामिल हुआ तो उसकी पहचान वाल्मिकी नगर के रूप में हुई। गोरखपुर-नौगढ़ हाईवे से निकलने वाली सड़क का विस्तार के बाद निर्माण नहीं हुआ। हाईवे ऊंचा होने के कारण जलनिकासी की व्यवस्था न होने के कारण घरों से निकलने वाला पानी सड़क पर पसरा रहता है। जब बारिश हो गई तो हाल और बुरा हो जाता है। पिछले पांच दिन से क्षेत्र की हालत खराब है। मोहल्ले के संदीप, राजकुमार ने बताया कि नाली और सड़क एक साथ बनने पर ही समस्या का समाधान हो पाएगा। सड़क बने तो दूर हो मोहल्ले के लोगों को दर्द: सिंहेश्वरीपुरम नए मोहल्ले का गठन हुआ। इसमें रेलवे लाइन के दोनों पटरी पर तेजी से बसी हजारों की आबादी और रोमापार क्षेत्र को इस मोहल्ले में शामिल किया गया। मोहल्ले के शेषमणि प्रजापित, जयप्रकाश आदि ने कहा कि सड़क का निर्माण बहुत जरूरी है। लोगों को शहर में घूमकर मंदिर के रास्ते से आना पड़ता है। बारिश में समस्या और गंभीर हो जाती है।
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वहीं बेमौसम बारिश ने मुश्किलें और बढ़ा दी है। इस बारिश के बाद सड़क के गड्ढों का आकार बढ़ गया है। ऐसे में मोहल्ले के लोगों को बाइक, चार पहिया वाहन को लेकर निकलने में हिचकोले खाने पड़ रहे हैं।
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कभी शहर में होते हुए भी गांव में होने का दर्द झेलने वाले लोगों को शहर में शामिल होने की आस थी। शहर के सीमा विस्तार में उनके सपने पूरे हुए और उनका क्षेत्र शहरी दायरे में आ गया तो उम्मीद हुई कि बेहतर सड़क, जलनिकासी सहित अन्य व्यवस्थाएं बेहतर हो जाएंगी। लेकिन शहर के अन्य मोहल्लों की तरह विकास की रोशनी अब भी इन मोहल्लों तक नहीं पहुंची हैं।
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हर दिन शहर की सड़कों पर निकलने के बाद झटका खाकर उन्हें इसका अहसास भी होता है। मोहल्ले के लोगों का कहना है कि सड़क बन जाए तो सारी समस्या दूर हो जाए। बारिश में समस्या बढ़ जाती है, जैसा कि पिछले तीन दिन हुई बारिश के बाद परेशानी हुई। तस्वीरें भी बदहाली बयां कर रही हैं। हालांकि, पालिका के जिम्मेदारों का कहना है कि सड़क की नपाई होकर कार्ययोजना में शामिल की जा चुकी है।
हाईवे से 100 मीटर दूरी के बाद बढ़ जाती है मुसीबत: शहर में होते हुए शहर न होने का दर्द झेल रहे उसका ब्लॉक की ग्राम पंचायत दतरंगवा गांव शहर का दायरा बढ़ने के बाद शहर का हिस्सा बना गया। नाम मिला परशुरामनगर। इसके बाद से विकास के छोटे-मोटे काम शुरू भी हुए, लेकिन हाईवे से निकलकर इस वार्ड में जाने वाली सड़क 100 मीटर बाद की सड़क की हालत बहुत ही खराब है। बारिश होने के बाद सड़क कीचड़ से सन जाती है। इससे कई दिनों तक लोगों को आने-जाने में कठिनाई से जूझना पड़ता है। पमोहल्ले के रमेश कुमार, अजीत ने बताया कि शहर के विस्तार के बाद लोग घर बनवा रहे हैं, लेकिन सड़क न बनने से परेशानी है। सड़क बन जाए तो आवागमन आसान हो जाए।
हाईवे ने बढ़ा दी मुसीबत: शहर में होते हुए शहर न होने का दर्द झेल रहे थरौली गांव का दूसरा हिस्सा शहर में शामिल हुआ तो उसकी पहचान वाल्मिकी नगर के रूप में हुई। गोरखपुर-नौगढ़ हाईवे से निकलने वाली सड़क का विस्तार के बाद निर्माण नहीं हुआ। हाईवे ऊंचा होने के कारण जलनिकासी की व्यवस्था न होने के कारण घरों से निकलने वाला पानी सड़क पर पसरा रहता है। जब बारिश हो गई तो हाल और बुरा हो जाता है। पिछले पांच दिन से क्षेत्र की हालत खराब है। मोहल्ले के संदीप, राजकुमार ने बताया कि नाली और सड़क एक साथ बनने पर ही समस्या का समाधान हो पाएगा। सड़क बने तो दूर हो मोहल्ले के लोगों को दर्द: सिंहेश्वरीपुरम नए मोहल्ले का गठन हुआ। इसमें रेलवे लाइन के दोनों पटरी पर तेजी से बसी हजारों की आबादी और रोमापार क्षेत्र को इस मोहल्ले में शामिल किया गया। मोहल्ले के शेषमणि प्रजापित, जयप्रकाश आदि ने कहा कि सड़क का निर्माण बहुत जरूरी है। लोगों को शहर में घूमकर मंदिर के रास्ते से आना पड़ता है। बारिश में समस्या और गंभीर हो जाती है।