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Siddharthnagar News: यूरिया के घोल का करें छिड़काव, होगी बचत, पैदावार भी नहीं होगी प्रभावित

Fri, 29 Aug 2025 11:51 PM IST
गोरखपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर Updated Fri, 29 Aug 2025 11:51 PM IST
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Siddharthnagar News: Spray urea solution, there will be savings, yield will also not be affected
भनवापुर। इस समय खेतों में खरीफ सीजन की फसलें धान, मक्का, तिल और सब्जियां आदि लहलहा रही हैं। इसमें धान एक प्रमुख खाद्यान्न है जो इस समय कल्ले फूटने से लेकर पुष्पावस्था में है। इस अवस्था में फसल को पोषक तत्व और पानी की अत्यंत आवश्यकता होती है, लेकिन बारिश न होने और उर्वरकों विशेषकर यूरिया न मिलने से किसान परेशान हैं।
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कृषि विज्ञान केंद्र सोहना के वैज्ञानिक डॉ. प्रवेश कुमार देहाती ने बताया कि यूरिया के घोल का छिड़काव करने से यूरिया की बचत होती है और पैदावार भी प्रभावित नहीं होती है।
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उन्होंने बताया कि यूरिया एक नाइट्रोजन युक्त उर्वरक है, जिसमें 46 प्रतिशत नाइट्रोजन पाई जाती है। नाइट्रोजन पौधों की वनस्पति वृद्धि के लिए बहुत महत्वपूर्ण पोषक तत्व है, लेकिन मिट्टी में नाइट्रोजन तत्व की कमी होने के कारण फसलों में नाइट्रोजन तत्व की पूर्ति के लिए किसान रासायनिक उर्वरकों पर निर्भर हैं। यूरिया में नाइट्रोजन प्रतिशत अधिक होने और प्रयोग करना आसान होने के कारण यूरिया का सबसे ज्यादा प्रयोग किया जाता है।
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उन्होंने बताया कि ज्यादातर किसान यूरिया का प्रयोग असंतुलित मात्रा में करते हैं, जिसमें अधिक यूरिया की आवश्यकता पड़ती है। यूरिया के घोल का छिड़काव करने से यूरिया की बचत होती है और पैदावार भी प्रभावित नहीं होती है।
यूरिया के दो प्रतिशत घोल का छिड़काव करते हैं, जिसमें पांच किलो यूरिया को 250 लीटर पानी में घोलकर प्रति एकड़ छिड़काव कर सकते हैं। यूरिया को गोबर की सड़ी खाद के गोलों में भरकर भी प्रयोग कर सकते हैं। नाइट्रोजन (यूरिया) का प्रयोग धान में लीफ कलर चार्ट की सहायता से संतुलित मात्रा में किया जा सकता है।

फसलों में नाइट्रोजन तत्व के प्रबंधन के लिए यूरिया के अलावा अन्य उर्वरकों का प्रयोग कर सकते हैं, जिसमें अमोनियम सल्फेट एक नाइट्रोजन युक्त उर्वरक है। इसमें 20 प्रतिशत नाइट्रोजन और 23 प्रतिशत सल्फर पाया जाता है जो नाइट्रोजन के साथ सल्फर की भी पूर्ति करता है।
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