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Siddharthnagar News: बेटा करोड़ों में खेलता था, घर वाले रुपयों को मोहताज
Mon, 01 Sep 2025 11:21 PM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
Updated Mon, 01 Sep 2025 11:21 PM IST
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सिद्धार्थनगर। गेमिंग के जरिये साइबर ठगी और टेरर फंडिंग में बलरामपुर पुलिस के हत्थे चढ़ा इटवा थाना क्षेत्र के कम्हरिया गांव निवासी अबुल आस उर्फ अबुलास कंप्यूटर का मास्टरमाइंड है। साइबर ठगी में उतरने से पहले वह इटवा कस्बे में कौशल विकास केंद्र के जरिये लड़कियाें को कंप्यूटर की शिक्षा देता था। इस दौरान छेड़खानी का भी आरोप लगा, लेकिन लोगों ने समझौता कर दिया।
राजस्थान में किसी मामले में जेल जाने के बाद पिता ने बाहर निकलवाने के लिए दो बीघा जमीन भी बेच दी थी। अबतक उसके खातों की पड़ताल में 22 करोड़ रुपये से अधिक की रकम की बात सामने आ चुकी है। इस खबर के सामने आने के बाद गांव से लेकर इटवा कस्बे तक चर्चा का विषय बना हुआ है। रुपये कहां लेकर गया, यह सवाल सबके जेहन में उठा रहा है। इसके कारण घर के हालात एक मध्यवर्गीय परिवार की तरह से है।
जेल से बाहर आने के बाद चलाने लगा कंप्यूटर क्लास: इटवा थाने के ग्राम कमहरिया निवासी अबुल आस शुरू से ही कंप्यूटर के मामले का मास्टरमाइंड था। उसके जानने वाले कहते हैं कि बातचीत में सामने वाले को निरुत्तर करने की क्षमता रखता था। अबूलास ने वर्ष 2014-15 से ही इटवा कस्बे को अपना कार्यक्षेत्र बनाया हुआ था। लोगों के मुताबिक वह पहले बढ़नी रोड पर व उसके बाद तहसील भवन के पीछे वाली गली में स्थित एक किराये के मकान में कौशल विकास केंद्र चला रहा था, जहां वह लड़कियों को कंप्यूटर की शिक्षा देता था। उसके यहां काफी संख्या में उसके यहां लड़कियां कंप्यूटर शिक्षा ग्रहण करने आतीं थीं। इस दौरान उस पर महिलाओं से छेड़छाड़ करने का भी आरोप लगा था, लेकिन इस मामले को आपस में मिल बैठकर समझौते से निपटा लिया था। उसी के बाद वह इटवा कस्बे से कहीं अन्यत्र चला गया।
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बार एसोसिएशन इटवा के अधिवक्ता व इटवा कस्बे में उसके पड़ोसी रहे अवधेश मिश्र बताते हैं कि कंप्यूटर के मामले का शुरू से ही बहुत ही जानकार था। उसके यहां कंप्यूटर सीखने आने वाली लड़कियों की संख्या बहुत ही ज्यादा थी। कमहरिया निवासी अबुल आस चार बहन और दो भाई हैं, जिसमें दो बहनों की शादी हो चुकी है। इसका भाई कुछ दिनों तक इटवा कस्बे में किराये पर वाईफाई कनेक्शन देने का काम कर रहा था, लेकिन लगभग तीन वर्ष से वह भी
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राजस्थान में किसी मामले में जेल जाने के बाद पिता ने बाहर निकलवाने के लिए दो बीघा जमीन भी बेच दी थी। अबतक उसके खातों की पड़ताल में 22 करोड़ रुपये से अधिक की रकम की बात सामने आ चुकी है। इस खबर के सामने आने के बाद गांव से लेकर इटवा कस्बे तक चर्चा का विषय बना हुआ है। रुपये कहां लेकर गया, यह सवाल सबके जेहन में उठा रहा है। इसके कारण घर के हालात एक मध्यवर्गीय परिवार की तरह से है।
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जेल से बाहर आने के बाद चलाने लगा कंप्यूटर क्लास: इटवा थाने के ग्राम कमहरिया निवासी अबुल आस शुरू से ही कंप्यूटर के मामले का मास्टरमाइंड था। उसके जानने वाले कहते हैं कि बातचीत में सामने वाले को निरुत्तर करने की क्षमता रखता था। अबूलास ने वर्ष 2014-15 से ही इटवा कस्बे को अपना कार्यक्षेत्र बनाया हुआ था। लोगों के मुताबिक वह पहले बढ़नी रोड पर व उसके बाद तहसील भवन के पीछे वाली गली में स्थित एक किराये के मकान में कौशल विकास केंद्र चला रहा था, जहां वह लड़कियों को कंप्यूटर की शिक्षा देता था। उसके यहां काफी संख्या में उसके यहां लड़कियां कंप्यूटर शिक्षा ग्रहण करने आतीं थीं। इस दौरान उस पर महिलाओं से छेड़छाड़ करने का भी आरोप लगा था, लेकिन इस मामले को आपस में मिल बैठकर समझौते से निपटा लिया था। उसी के बाद वह इटवा कस्बे से कहीं अन्यत्र चला गया।
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बार एसोसिएशन इटवा के अधिवक्ता व इटवा कस्बे में उसके पड़ोसी रहे अवधेश मिश्र बताते हैं कि कंप्यूटर के मामले का शुरू से ही बहुत ही जानकार था। उसके यहां कंप्यूटर सीखने आने वाली लड़कियों की संख्या बहुत ही ज्यादा थी। कमहरिया निवासी अबुल आस चार बहन और दो भाई हैं, जिसमें दो बहनों की शादी हो चुकी है। इसका भाई कुछ दिनों तक इटवा कस्बे में किराये पर वाईफाई कनेक्शन देने का काम कर रहा था, लेकिन लगभग तीन वर्ष से वह भी