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Siddharthnagar News: तस्कर बेलगाम, बारूद के ढेर पर सीमावर्ती इलाके

Sat, 18 Oct 2025 11:21 PM IST
गोरखपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर Updated Sat, 18 Oct 2025 11:21 PM IST
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Siddharthnagar News: Smugglers are out of control, border areas are full of gunpowder
सिद्धार्थनगर। सीमावर्ती इलाके में पटाखा तस्कर सक्रिय हो गए हैं। कोटिया ऑर्डर जो कभी अवैध पटाखों की तस्करी के लिए प्रमुख ठिकाना माना जाता था। वहीं से एक क्विंटल से अधिक पटाखे की बरामदगी हुई है, जो इस बात की ओर इशारा कर रहा है कि तस्करों ने एक बार फिर इस मार्ग का इस्तेमाल शुरू कर दिया है।
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सूत्रों की मानें तो पिछले एक सप्ताह से सीमावर्ती इलाके में पटाखा पहुंचाया जा रहा है। कुछ रात के अंधेरे में तो कुछ दिन के उजाले में सामान के बीच में रखकर भेजा जा रहा है।
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सीमावर्ती इलाके के लोगों के मुताबिक नेपाल में पटाखा निर्माण पर प्रतिबंध है। पकड़े जाने पर कड़ी सजा प्रावधान है, इसी वजह से भारत से तस्करी के जरिये जाता है। अगर एक लाख रुपये का माल बॉर्डर पार हो गया जो चार लाख रुपये का हो जाएगा। चार गुना पर बिक्री होती है और उत्सव में मुंहमांगी की कीमत देकर लोग खरीद करते हैं। फिलहाल एजेंसियों की सतर्कता से इस साल की पहली बरामदगी थी।
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सामान की बीच छिपाकर करते हैं पटाख लाने का काम : जनपद में अवैध पटाखों की बिक्री और धरपकड़ के मामले सामने आए हैं। पूर्व के मामले की बात करें तो जो जांच में आया था, उसमें यह सामने आया था कि किराना के सामान, सब्जी के ढेर और बर्तन के बीच में पिकअप और अन्य गाड़ियों का सहारा लेते हैं। उसी के बीच में पटाखे लेकर पहुंच जाते हैं। कई बार ऐसा होता है कि सामान खाली करने वाले ट्रक और पिकअप चालक को तैयार कर पटाखा बिक्री की नकली रसीद रखते हैं। अगर रास्ते में पुलिस चेकिंग करती है तो उसकी को दिखाकर निकल जाते हैं।
अस्थाई लाइसेंस पर दुकान करने वाले अल्ताफ ने बताया कि थोक विक्रेताओं की ऑडिट होती है। फायर और प्रशासन की टीम नियमित जांच करती है। इसलिए टैक्स से बचने और अवैध कारोबार करने के लिए दो प्रकार का रजिस्टर रखते हैं। एक में बिना लाइसेंस वाले धंधेबाजों को मोटी रकम लेकर बेचते हैं। जबकि एक रजिस्टर जिसे दिखाना होता है उसमें लाइसेंस का नाम, कितनी बिक्री और प्रकार के साथ मात्रा और दुकानदार का नंबर दर्ज करते हैं। उसका पूरा हिसाब होता है। निर्माण करने वाले 70 प्रतिशत माल अस्थाई वालों को देते हैं। 30 प्रतिशत ही लाइसेंसी लेता है, क्योंकि वह पूरे साल काम करता है। इटवा में हो चुकी है बड़ी बरामदगी : इटवा नगर पंचायत के दो बार में बड़ी खेप बरामद की गई। इसमें एक बार में दो आरोपी पकड़े गए और 12 क्विंटल बारुद बरामद किया गया। उसके दो दिन बाद और बड़ी खेप कस्बे से ही पकड़ी गई, जिसमें 15 क्विंटल पटाखे की बरामदगी की गई। इसमें दो आरोपी जेल भी गए थे। पुलिस मामले की जांच कर रही है।

लोगों के मुताबिक एक माह पहले ही डंप किया गया था। किसी दुकानदार से अनबन के बाद मुखबिरी हुई तो यह पकड़ में आ गए, नहीं तो किसी को भनक भी नहीं लग पाती है। सूत्रों की मानें तो कानपुर और लखनऊ में संचालित पटाखा कंपनी से माल आया था। वहीं से पूरे जनपद में आपूर्ति होती है। यूं कहा जाए कि बस्ती और देवी पाटन दो मंडल में पहुंचता है। ऐसा भी जांच में सामने आया है।
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