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Siddharthnagar News: श्रवण कुमार की मातृ-पितृ भक्ति का किया वर्णन
Fri, 18 Sep 2026 11:43 PM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
Updated Fri, 18 Sep 2026 11:43 PM IST
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- गणेश पूजा समारोह में श्रवण कुमार की मातृ-पितृ भक्ति की लीला का मंचन
- मार्मिक प्रसंग देख भावुक हुए दर्शक, तालियों और जयकारों से गूंजता रहा पंडाल
डुमरियागंज। क्षेत्र के भड़रिया स्थित श्रीसिद्धेश्वरी देवी शक्तिपीठ मंदिर परिसर में नवयुवक रामलीला समिति की ओर से चल रहे गणेश पूजा समारोह में बृहस्पतिवार की रात श्रवण कुमार की मातृ-पितृ भक्ति की लीला का मंचन किया गया।
14 से 21 सितंबर तक चल रहे समारोह में लीला का मंचन रात 8:30 बजे शुरू हुआ। कलाकारों के भावपूर्ण अभिनय ने दर्शकों को भाव विभोर कर दिया।मंचन में दिखाया गया कि श्रवण कुमार अपने नेत्रहीन माता-पिता की सेवा को जीवन का सबसे बड़ा कर्तव्य मानते हैं। माता-पिता के तीर्थ यात्रा की इच्छा जताने पर वह उनकी इच्छा पूरी करने का संकल्प लेते हैं। इसके बाद दोनों को कांवड़ में बैठाकर अपने कंधों पर उठाते हैं और तीर्थ यात्रा पर निकल पड़ते हैं। रास्ते की कठिनाइयों और थकान की परवाह किए बिना वह आगे बढ़ते रहते हैं।
लीला के दौरान माता-पिता के प्रति श्रवण कुमार का प्रेम और समर्पण देखकर दर्शक भावुक हो उठे। इसके बाद जंगल में पानी लेने पहुंचे श्रवण कुमार का प्रसंग प्रस्तुत किया गया। पानी भरते समय हुई आहट को जंगली पशु समझकर राजा दशरथ ने शब्दभेदी बाण चला दिया। बाण लगने से घायल श्रवण कुमार ने राजा दशरथ से अपने माता-पिता की चिंता जताई और उन्हें पानी पिलाने के साथ घटना की जानकारी देने का आग्रह किया।
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श्रवण कुमार के अंतिम समय और उनके माता-पिता के विलाप का दृश्य मंचित होते ही पंडाल का माहौल गमगीन हो गया। कलाकारों ने लीला के माध्यम से माता-पिता की सेवा, त्याग और आज्ञापालन का संदेश दिया। मंचन के दौरान दर्शकों की तालियों और जयकारों से पंडाल गूंजता रहा।
इस दौरान आयोजक डॉ. राजेश गुप्ता, विजय मिश्रा, संतोष पासवान, राम ख्याल शर्मा, बाबूलाल गुप्ता, रामनिवास गुप्ता आदि लोग मौजूद रहे।
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- मार्मिक प्रसंग देख भावुक हुए दर्शक, तालियों और जयकारों से गूंजता रहा पंडाल
डुमरियागंज। क्षेत्र के भड़रिया स्थित श्रीसिद्धेश्वरी देवी शक्तिपीठ मंदिर परिसर में नवयुवक रामलीला समिति की ओर से चल रहे गणेश पूजा समारोह में बृहस्पतिवार की रात श्रवण कुमार की मातृ-पितृ भक्ति की लीला का मंचन किया गया।
14 से 21 सितंबर तक चल रहे समारोह में लीला का मंचन रात 8:30 बजे शुरू हुआ। कलाकारों के भावपूर्ण अभिनय ने दर्शकों को भाव विभोर कर दिया।मंचन में दिखाया गया कि श्रवण कुमार अपने नेत्रहीन माता-पिता की सेवा को जीवन का सबसे बड़ा कर्तव्य मानते हैं। माता-पिता के तीर्थ यात्रा की इच्छा जताने पर वह उनकी इच्छा पूरी करने का संकल्प लेते हैं। इसके बाद दोनों को कांवड़ में बैठाकर अपने कंधों पर उठाते हैं और तीर्थ यात्रा पर निकल पड़ते हैं। रास्ते की कठिनाइयों और थकान की परवाह किए बिना वह आगे बढ़ते रहते हैं।
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लीला के दौरान माता-पिता के प्रति श्रवण कुमार का प्रेम और समर्पण देखकर दर्शक भावुक हो उठे। इसके बाद जंगल में पानी लेने पहुंचे श्रवण कुमार का प्रसंग प्रस्तुत किया गया। पानी भरते समय हुई आहट को जंगली पशु समझकर राजा दशरथ ने शब्दभेदी बाण चला दिया। बाण लगने से घायल श्रवण कुमार ने राजा दशरथ से अपने माता-पिता की चिंता जताई और उन्हें पानी पिलाने के साथ घटना की जानकारी देने का आग्रह किया।
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श्रवण कुमार के अंतिम समय और उनके माता-पिता के विलाप का दृश्य मंचित होते ही पंडाल का माहौल गमगीन हो गया। कलाकारों ने लीला के माध्यम से माता-पिता की सेवा, त्याग और आज्ञापालन का संदेश दिया। मंचन के दौरान दर्शकों की तालियों और जयकारों से पंडाल गूंजता रहा।
इस दौरान आयोजक डॉ. राजेश गुप्ता, विजय मिश्रा, संतोष पासवान, राम ख्याल शर्मा, बाबूलाल गुप्ता, रामनिवास गुप्ता आदि लोग मौजूद रहे।