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Siddharthnagar News: कान में संक्रमण के मरीज बढ़े, फंगस से सुनने में परेशानी

Mon, 10 Aug 2026 11:58 PM IST
गोरखपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर Updated Mon, 10 Aug 2026 11:58 PM IST
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Siddharthnagar News: Rise in ear infection cases; fungal infection causing hearing difficulties
मरीज के कान की जांच करते डॉ. संजय शर्मा। संवाद
-बारिश में भीगने के साथ ही कान में हो रही दिक्कत, भारीपन की समस्या भी
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-माधव प्रसाद त्रिपाठी मेडिकल कॉलेज और बांसी जिला अस्पताल में ओपीडी में पहुंच रहे कान के फंगस से जुड़े मरीज
सिद्धार्थनगर। मौसम में बदलाव के बाद एक बार फिर जिले में कान से जुड़ी समस्याएं भी बढ़ने लगी है। इसमें कान में खुजली, दर्द, कान बंद होने का एहसास, पानी या मवाद निकलना और सुनने में दिक्कत होने के मामले में बढ़े हैं। माधव प्रसाद त्रिपाठी मेडिकल कॉलेज और बांसी जिला अस्पताल के नाक, कान गला रोग विशेष में प्रतिदिन 20-25 मरीज इस समस्या से पीड़ित होकर पहुंच रहे हैं।
ईएनटी सर्जन का कहना है कि लोग अक्सर खुजली होने पर माचिस की तीली, हेयरपिन, चाबी, रुई की डंडी या अन्य नुकीली वस्तुओं से कान साफ करने लगते हैं, जिससे संक्रमण और गंभीर हो जाता है। कई मामलों में कान से खून निकलने या पर्दा क्षतिग्रस्त होने तक की नौबत आ जाती है। ऐसे में आने वाले मौसम को लेकर बचने की जरूरत है।
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माधव प्रसाद त्रिपाठी मेडिकल कॉलेज और जिला अस्पताल बांसी की ईएनटी ओपीडी में पिछले कुछ दिनों कान में खुजली, दर्द और फंगस की शिकायत लेकर मरीज पहुंच रहे हैं। चिकित्सकों के अनुसार बरसात के दौरान लोग भीग जाते हैं, जिससे कान में पानी चले जाने, लंबे समय तक नमी बने रहने, गंदे ईयरफोन का इस्तेमाल, बार-बार कान कुरेदने और बिना डॉक्टर की सलाह के दवा डालने से संक्रमण तेजी से फैलता है। समय पर इलाज न मिलने पर सुनने की क्षमता भी प्रभावित हो सकती है। मौजूदा समय में आने वाले मरीजों की हिस्ट्री पूछने पर इसी प्रकार की जानकारी मिली रही है। उसी के हिसाब से दवा दी जा रही है।
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बांसी जिला अस्पताल में तैनात नाक, कान एवं गला रोग विशेषज्ञ डॉ. संजय शर्मा ने बताया कि बारिश के मौसम में कान को सूखा रखना सबसे जरूरी है। नहाने या बारिश में भीगने के बाद कान में पानी रह जाने से फंगस तेजी से पनपता है। यदि लगातार खुजली, दर्द, बदबू, पानी आना या सुनाई कम देना जैसी समस्या हो तो स्वयं इलाज करने के बजाय तुरंत चिकित्सक से परामर्श लेना चाहिए। बिना जांच के कान में कोई भी ड्रॉप डालना नुकसानदायक हो सकता है। कान की सफाई के लिए किसी भी नुकीली वस्तु का प्रयोग नहीं करना चाहिए। इससे कान की त्वचा छिल जाती है और संक्रमण गहरा हो सकता है। कई बार कान का पर्दा भी क्षतिग्रस्त हो जाता है, जिससे खून निकलने के साथ सुनने की क्षमता प्रभावित हो सकती है। कान की प्राकृतिक वैक्स परत संक्रमण से बचाने का काम करती है, इसलिए अनावश्यक सफाई से भी बचना चाहिए।
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