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Siddharthnagar News: बारिश और तेज हवा से धान व गन्ने की फसल धराशायी
Mon, 28 Sep 2026 11:10 PM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
Updated Mon, 28 Sep 2026 11:10 PM IST
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इटवा। स्थानीय क्षेत्र में लगातार तीन दिन हुई मूसलाधार बारिश किसानों के लिए आफत बन गई है। बारिश के साथ चल रही तेज हवाओं ने धान की फसलों को भारी नुकसान पहुंचाया है। इससे किसान चिंतित हो गए हैं। इटवा तहसील क्षेत्र के कई गांवों में सैकड़ों बीघा धान और गन्ने की फसल बर्बाद होने की कगार पर पहुंच गई है। कई खेतों में फसल जमीन पर गिर गई है जबकि गन्ने के पौधे भी तेज हवा और बारिश के चलते खेतों में गिर गए हैं। लगातार बारिश के कारण खेतों में पानी भरने से किसानों की चिंता और बढ़ गई है। तैयार होने के करीब पहुंच चुकी धान की फसल के गिर जाने से किसानों को भारी नुकसान की आशंका है।
किसानों का कहना है कि खेती उनके परिवार की आय का मुख्य जरिया है और खेतों में खड़ी फसल ही सालभर की मेहनत और जमा पूंजी होती है। ऐसे में फसल के बर्बाद होने से उनके सामने आर्थिक संकट खड़ा हो सकता है। किसानों के मुताबिक, इस बार खेती में पहले ही खाद, बीज, जोताई और सिंचाई समेत अन्य संसाधनों पर काफी खर्च हुआ है। बड़ी उम्मीद के साथ किसानों ने फसल तैयार की थी लेकिन लगातार बारिश और तेज हवाओं ने उनकी मेहनत पर पानी फेर दिया है।
किसानों ने बताया कि खेतों में फसल गिरने के बाद अब उसके खराब होने की चिंता सताने लगी है। फसल को हुए नुकसान के बाद किसानों के चेहरों पर चिंता की लकीरें साफ दिखाई दे रही हैं। किसानों ने प्रशासन और कृषि विभाग के जिम्मेदार अधिकारियों से प्रभावित गांवों और खेतों का मौके पर पहुंचकर सर्वे कराने की मांग की है। किसानों का कहना है कि फसल नुकसान का वास्तविक आकलन कराया जाए।
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किसानों का कहना है कि खेती उनके परिवार की आय का मुख्य जरिया है और खेतों में खड़ी फसल ही सालभर की मेहनत और जमा पूंजी होती है। ऐसे में फसल के बर्बाद होने से उनके सामने आर्थिक संकट खड़ा हो सकता है। किसानों के मुताबिक, इस बार खेती में पहले ही खाद, बीज, जोताई और सिंचाई समेत अन्य संसाधनों पर काफी खर्च हुआ है। बड़ी उम्मीद के साथ किसानों ने फसल तैयार की थी लेकिन लगातार बारिश और तेज हवाओं ने उनकी मेहनत पर पानी फेर दिया है।
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किसानों ने बताया कि खेतों में फसल गिरने के बाद अब उसके खराब होने की चिंता सताने लगी है। फसल को हुए नुकसान के बाद किसानों के चेहरों पर चिंता की लकीरें साफ दिखाई दे रही हैं। किसानों ने प्रशासन और कृषि विभाग के जिम्मेदार अधिकारियों से प्रभावित गांवों और खेतों का मौके पर पहुंचकर सर्वे कराने की मांग की है। किसानों का कहना है कि फसल नुकसान का वास्तविक आकलन कराया जाए।
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