फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Siddharthnagar News ›   Siddharthnagar News : High demand for Kalanmak in Europe and Gulf countries...Export deal of Rs 80 crore

Siddharthnagar News: कालानमक की यूरोप व खाड़ी देशों में बढ़ी मांग...आठ करोड़ के निर्यात का समझौता

Mon, 10 Nov 2025 12:01 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर Updated Mon, 10 Nov 2025 12:01 AM IST
विज्ञापन
Siddharthnagar News : High demand for Kalanmak in Europe and Gulf countries...Export deal of Rs 80 crore
बुद्धा राइस क्रेता विक्रेता सम्मेलन कार्यक्रम में बने स्टालों पर किसानों की लगी भीड़। संवाद
- कालानमक सम्मेलन में आधुनिक व प्राकृतिक खेती को लेकर वैज्ञानिकों हुआ विमर्श, उत्पाद के निर्यात पर हुआ समझौता
विज्ञापन

- सम्मान व पुरस्कार के साथ ही समाप्त हुआ द्वितीय कालानमक बुद्धा राइस सम्मेलन
सिद्धार्थनगर। शुद्धता व सुगंध के साथ कालानमक चावल की महक अब यूरोप और खाड़ी देशों तक पहुंच रही है। वहां इसकी मांग बढ़ी है और इन देशों में कालानमक का निर्यात बड़े पैमाने पर किया जा रहा है। द्वितीय बुद्धा राइस क्रेता-विक्रेता सम्मेलन में किसान, वैज्ञानिक और व्यापारियों ने कालानमक की खेती, उपज व निर्यात में बढ़ोतरी पर मंथन किया। इस दौरान किसानों और व्यापारियों के बीच आठ करोड़ रुपये से अधिक कीमत के चावल और अन्य उत्पादों के निर्यात पर समझौता हुआ है। इसमें सभी ने देश विदेश में बढ़ रहे कालानमक चावल की मांग के सापेक्ष गुणवत्तापूर्ण उपज पर जोर दिया। बढ़ती मांग के सापेक्ष किसानों को मिलने वाले लाभ पर चर्चा हुई।
प्रमुख विज्ञानी डाॅ. एसके सिंह का कहना है कि देसी प्रजाति वाले चावलों की निर्यात मांग बढ़ी है। पश्चिम एशिया के देशों में सुगंधित प्रजाति वाले भारतीय चावलों की मांग है। वहीं इंटरनेशनल राइस रिसर्च इंस्टीच्यूट वाराणसी के वैज्ञानिक डॉ. सौरभ बडोनी का कहना था कि कालानमक की विभिन्न प्रजातियों पर शोध हुआ, जिससे इसकी गुणवत्ता बरकरार रखते हुए उत्पादन में वृद्धि पर कार्य किया गया। सम्मेलन में डाॅ. एसके सिंह पूर्व निदेशक भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान नई दिल्ली, डाॅ. मंजुल प्रताप सिंह निदेशक ओराइजो राइस घर एग्रो वर्ल्ड प्रालि वाराणसी, दिनेश शुक्ला जिलाध्यक्ष लघु उद्योग भारती देवरिया, जेपी जायसवाल इंडियन इंडस्ट्रियल एसोसिएशन, दिलीप चौहान निदेशक दिव्यम आहार प्रालि, डॉ. मार्कण्डेय सिंह वरिष्ठ वैज्ञानिक कृषि विज्ञान केंद्र सोहना और डॉ. अजय रावत आदि ने कालानमक चावल के प्रसंस्करण के बारे में विस्तार पूर्वक जानकारी दी। समापन कार्यक्रम में जनप्रतिनिधियों व अधिकारियों ने वैज्ञानिकों, किसानों व व्यापारियों को सम्मानित व पुरस्कृत किया गया।
विज्ञापन

-----------
सम्मेलन में फसल का हो गया सौदा
सम्मेलन में आए व्यापारियों व किसानों के बीच अंतिम दिन हुए समझौतों के तहत खेत में फसल के उत्पादन का भी सौदा हो गया। सम्मेलन में शामिल होने आए जयपुर, तेलांगाना, असम, लखनऊ, देवरिया आदि के व्यापारियों ने स्थानीय किसानों से धान और चावल निर्यात का समझौता किया। वहीं कालानमक चावल से बनने वाले अन्य उत्पादों के निर्यात संबंधी समझौते भी हुए। बर्डपुर क्षेत्र के किसान व फर्म प्रोपराइटर डॉ. अजय रावत का कहना है कि सम्मेलन में आए दूसरे प्रांत के व्यापारियों के साथ उनके व अन्य किसानों के साथ उत्पाद के बड़ी मात्रा में निर्यात का समझौता हुआ है। उनके अनुसार सम्मेलन के माध्यम से गुणवत्तायुक्त कालानमक का नाम दूसरे प्रदेशों में पहुंच गया है। उद्योग उपायुक्त उदय प्रकाश ने कहा कि सम्मेलन में स्टाॅल लगाए किसान व व्यापारियों के बीच बड़े पैमाने पर निर्यात का समझौता हुआ है।
विज्ञापन
विज्ञापन

-----------
बौनी प्रजाति से अधिक रही पुरानी प्रजाति की मांग
सम्मेलन आए व्यापारियों के निर्यात समझौते में सर्वाधिक मांग पुरानी प्रजाति के कालानमक की रही। इस कारण इसकी कीमत में इजाफा भी देखने को मिला। बौनी प्रजाति के कालानमक चावल की कीमत जहां 100 से 110 रुपये प्रति किग्रा रही। वहीं कालानमक केएन-3 की पुरानी प्रजाति के चावल की कीमत 150 से 180 रुपये प्रति किग्रा के बीच रही। सम्मेलन में शामिल रहे वैज्ञानिकों का कहना था कि पूर्वी उत्तर प्रदेश के 11 जनपदों में होने वाले काला नमक प्रजाति पर विशेष शोध कर पैदावार को बढ़ाने, पौधों की ऊंचाई को घटाने और सुगंध को बरकरार रखते हुए नई बौनी प्रजाति विकसित की गई है। जेनेटिक सुधार के माध्यम से देसी चावल की गुणवत्ता व सुगंध बनाए रखने के साथ उत्पादकता में वृद्धि पर जोर दिया जा रहा है। इसी टेक्नोलाॅजी के माध्यम से पूर्वी उत्तर प्रदेश का काला नमक का पौधा बौना हो गया है और पैदावार बढ़ गई है, लेकिन गुणवत्ता व शुद्धता के कारण पुरानी प्रजाति की मांग अधिक रही।
---------
व्यापारी खेती में कर रहे किसानों का सहयोग
सम्मेलन में शामिल होने आए गैर जनपदों व प्रांतों के कई व्यापारियों का कहना है कि उन्होंने जिले के किसानों के साथ समझौता करते हुए यहां खेती कराई है। इन व्यापारियों का कहना था कि वह जिले के बर्डपुर, खेसरहा, शोहरतगढ़, इटवा समेत तराई क्षेत्र के अन्य जनपदों में किसानों से कालानमक की खेती के लिए समझौता किए हुए हैं। इसके तहत उन्हें गुणवत्तापूर्ण व शुद्ध बीज उपलब्ध कराने के साथ ही उर्वरक व सिंचाई में भी सहयोग दिया जाता है। इसके बाद उत्पादन में लागत की कटौती करके किसानों को उचित मूल्य दिया जाता है। इस तरह से जिले के कई हिस्सों में कालानमक की खेती का दायरा बढ़ गया है। वर्तमान में जिले में 18 हजार हेक्टेयर से अधिक क्षेत्रफल में कालानमक धान की खेती की जा रही है।
--------
गुणवत्ता के मामले में कालानमक की केएन 3 सर्वोत्तम प्रजाति है, लेकिन इसकी उपज कम होने से किसान इसकी खेती कम करते है। वहीं कालानमक किरन प्रजाति गुणवत्ता व उपज के दोनों मामलों में बेहतर प्रजाति है। इसलिए इसकी खेती से उन्हें अच्छा लाभ प्राप्त हो रहा है।
- पद्मश्री डॉ. राम चेत चौधरी, वैज्ञानिक
कालानमक की विभिन्न प्रजातियों के शोध के बाद इसमें तीन प्रजातियां गुणवत्तापूर्ण व शुद्ध पाई गई। जो केएलएन-12, केएलएन-53 और केएलएन-58 प्रजातियां शामिल है। इन प्रजातियों की गुणवत्ता प्राचीन बुद्ध कालीन कालानमक चावल के आसपास पाई गई हैं।
- डॉ. विवेक कुमार सिंह, इंटरनेशनल राइस रिसर्च इंस्टीट्यूट वाराणसी
कालानमक संबंधी प्रोडक्ट अब ऑनलाइन भी उपलब्ध है। इसकी मिल रहे अच्छे मूल्य के साथ बढ़ रहे मांग के कारण जल्द ही खेती का दायरा भी बढ़ाएंगे। अभी जिले के बर्डपुर के किसानों के साथ मिलकर 150 एकड़ में पुरानी व नई बौनी प्रजाति के कालानमक की खेती कर रहे हैं।
- शिवम सिंह, बहराइच के किसान व फर्म संचालक
कालानमक चावल के बड़े बाजार की खोज में इस सम्मेलन में आए थे, जहां पर व्यापारियों से निर्यात संबंधी समझौता हुआ है। अभी 12 बीघा में बौनी प्रजाति के कालानमक की खेती करते हैं। बढ़ रही मांग और मिल रहे अच्छे मूल्य के चलते जल्द ही इसकी खेती का दायरा बढ़ाएंगे।

- नागेंद्र सिंह, देवरिया के किसान और फर्म संचालक
----------------
प्रदेश सरकार ने किसान हित में कालानमक को दिया बढ़ावा : विधायक
सिद्धार्थनगर। जिला प्रशासन की ओर से आयोजित बुद्धा राइस क्रेता-विक्रेता सम्मेलन में रविवार को जनप्रतिनिधियों ने इसके प्रोत्साहन का आश्वासन दिया। विधायक श्यामधनी राही ने कहा कि मुख्यमंत्री की ओर से जनपद के कालानमक चावल को ओडीओपी योजना में चयनित किया गया। यह भगवान बुद्ध का महाप्रसाद है, जिसकी खुशबू देश विदेश में फैल रही है। प्रधानमंत्री एवं मुख्यमंत्री को किसानों की चिंता रहती है उन्होंने किसानों की आय दोगुनी करने का संकल्प लिया है। किसान सम्मान निधि देकर किसानों को अच्छी खेती करने के लिए प्रोत्साहित किया उनके मनोबल को बढ़ाया। वैज्ञानिकों की ओर से किसानों को कालानमक की खेती के बारे में जानकारी दी जाए। प्रदेश सरकार की ओर से किसानों को डीबीटी के माध्यम से कृषि एवं पर अनुदान दिया जा रहा है। विधायक विनय वर्मा ने कहा कि इस क्षेत्र में अधिक मात्रा में काला नमक चावल का उत्पादन किया जाता है। कालानमक चावल को बढ़ावा देने के लिए जिला प्रशासन एवं कृषि विभाग द्वारा इसके निर्यात के लिए अच्छा प्रयास किया जा रहा है। डीएम शिवशरणप्पा जीएन ने स्टाॅलों का निरीक्षण किया गया। उन्होंने एफपीओ एवं प्रगतिशील किसानों को प्रमाण-पत्र देकर सम्मानित किया। इस दौरान भाजपा नेता अभिषेक पाल, सांसद प्रतिनिधि एसपी अग्रवाल, निदेशक कृषि डाॅ. पंकज त्रिपाठी, अखिलेश कुमार सिंह, सयुंक्त निदेशक बस्ती आरबी राम, उप कृषि निदेशक राजेश कुमार, उपायुक्त उद्योग उदय प्रकाश उपस्थित रहे।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed