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Siddharthnagar News: आंखों को जख्मी कर रहे माहू कीट, हेलमेट और चश्मा पहनकर ही निकलें
Thu, 05 Feb 2026 11:31 PM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
Updated Thu, 05 Feb 2026 11:31 PM IST
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मेडिकल कॉलेज में मरीज का इलाज करते डॉ. संजय गुप्ता। संवाद
- मौसम में बदलवा से बढ़ गया माहू कीट का खतरा, मेडिकल कॉलेज के नेत्र रोग विभाग में प्रतिदिन आ रहे 10 से 12 मरीज
सिद्धार्थनगर। मौसम में हो रहे बदलाव व खेताें में लहलहाती फसल से साथ अब माहू कीटों की संख्या में वृद्धि हो गई है। यह कीट बाइक से चले रहे लोगों की आंखों में पड़ जा रहे हैं, जिससे आंखें लाल होने के साथ ही अन्य समस्याएं हो रही हैं। लोगों को आना-जाना भी दूभर हो गया है। माधव प्रसाद त्रिपाठी मेडिकल कॉलेज में इस प्रकार के 10 से 12 मरीज प्रतिदिन पहुंच रहे हैं। चिकित्सक सलाह दे रहे हैं कि बिना दिखाए आई ड्राॅप का प्रयोग न करें। वहीं, हेलमेट और चश्मा पहनकर ही निकलें, वरना आंखों को नुकसान पहुंच सकता है।
मौसम में बदलाव के बाद माहू की कीट की संख्या में वृद्धि हो जाती है। दोपहर 12 बजे के बाद यह पौधों को छोड़कर उड़ान भरने लगते हैं। मौजूदा समय में बदली और धूप के बीच इनका संख्या में तेजी से वृद्धि हुई है। यह आंख के लिए काफी नुकसानदेह माने जाते हैं। पिछले कई दिनों से इनके प्रकोप से लोगों की आंखों को नुकसान पहुंच रहा है। उड़ने के बाद यह आंखों को जख्मी कर दे रहे हैं। एकाएक पड़ने पर मिर्च जैसी चुभन होती है और देखते ही देखते व्यक्ति आंखों का मलता है, जिससे आंखें लाल होने के साथ ही सूजन भी आ जाती है। ऐसे में माहू कीट पड़ने वाले मरीजों को चिकित्सक ड्रॉप देने के साथ चश्मा और हेलमेट लगाकर वाहन चलाने की सलाह दे रहे हैं।
नेत्र रोग विशेषज्ञ डॉ. संजय गुप्ता ने बताया कि इस मौसम में कीटों की प्रजनन दर बढ़ा जाता है। इसमें कई प्रकार के कीट पैदा होते हैं। जो पौधों पर रहते हैं फिर उड़ते हैं। इनके आंख में पड़ जाने से जलन महसूस होती है। कई बार यह आंखों को काफी नुकसान पहुंचा देते हैं। ऐसे में अगर कीट पड़ते हैं तो आंख को बार-बार न मले और बिना चिकित्सा के परामर्श से आई ड्रॉप न डालें। चिकित्सक को दिखाने के बाद ही दवा लें। बाइक से चलते हैं तो हेलमेट जरूर लगाएं।
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सिद्धार्थनगर। मौसम में हो रहे बदलाव व खेताें में लहलहाती फसल से साथ अब माहू कीटों की संख्या में वृद्धि हो गई है। यह कीट बाइक से चले रहे लोगों की आंखों में पड़ जा रहे हैं, जिससे आंखें लाल होने के साथ ही अन्य समस्याएं हो रही हैं। लोगों को आना-जाना भी दूभर हो गया है। माधव प्रसाद त्रिपाठी मेडिकल कॉलेज में इस प्रकार के 10 से 12 मरीज प्रतिदिन पहुंच रहे हैं। चिकित्सक सलाह दे रहे हैं कि बिना दिखाए आई ड्राॅप का प्रयोग न करें। वहीं, हेलमेट और चश्मा पहनकर ही निकलें, वरना आंखों को नुकसान पहुंच सकता है।
मौसम में बदलाव के बाद माहू की कीट की संख्या में वृद्धि हो जाती है। दोपहर 12 बजे के बाद यह पौधों को छोड़कर उड़ान भरने लगते हैं। मौजूदा समय में बदली और धूप के बीच इनका संख्या में तेजी से वृद्धि हुई है। यह आंख के लिए काफी नुकसानदेह माने जाते हैं। पिछले कई दिनों से इनके प्रकोप से लोगों की आंखों को नुकसान पहुंच रहा है। उड़ने के बाद यह आंखों को जख्मी कर दे रहे हैं। एकाएक पड़ने पर मिर्च जैसी चुभन होती है और देखते ही देखते व्यक्ति आंखों का मलता है, जिससे आंखें लाल होने के साथ ही सूजन भी आ जाती है। ऐसे में माहू कीट पड़ने वाले मरीजों को चिकित्सक ड्रॉप देने के साथ चश्मा और हेलमेट लगाकर वाहन चलाने की सलाह दे रहे हैं।
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नेत्र रोग विशेषज्ञ डॉ. संजय गुप्ता ने बताया कि इस मौसम में कीटों की प्रजनन दर बढ़ा जाता है। इसमें कई प्रकार के कीट पैदा होते हैं। जो पौधों पर रहते हैं फिर उड़ते हैं। इनके आंख में पड़ जाने से जलन महसूस होती है। कई बार यह आंखों को काफी नुकसान पहुंचा देते हैं। ऐसे में अगर कीट पड़ते हैं तो आंख को बार-बार न मले और बिना चिकित्सा के परामर्श से आई ड्रॉप न डालें। चिकित्सक को दिखाने के बाद ही दवा लें। बाइक से चलते हैं तो हेलमेट जरूर लगाएं।
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