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Siddharthnagar News: धान की सांभा फसल पर गंधी कीट का हमला, उत्पादन घटने की आशंका
Fri, 09 Oct 2026 11:21 PM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
Updated Fri, 09 Oct 2026 11:21 PM IST
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- बालियां निकलने के समय प्रकोप से बढ़ी किसानों की चिंता
- कृषि वैज्ञानिक ने कीट नियंत्रण के लिए बताए बचाव के उपाय
सिद्धार्थनगर। डुमरियागंज तहसील क्षेत्र के विभिन्न गांवों में धान की सांभा प्रजाति की फसल पर गंधी कीट का प्रकोप दिखाई देने लगा है। धान में फूल आने और बालियां निकलने के समय कीटों के हमले से किसानों की चिंता बढ़ गई है। दानों के विकास पर असर पड़ने और उत्पादन घटने की आशंका में किसान फसल को बचाने के लिए कीट नियंत्रण के उपाय अपना रहे हैं। कई किसान कीटनाशकों का छिड़काव भी कर रहे हैं।
धान की फसल इस समय महत्वपूर्ण अवस्था में है। ऐसे में गंधी कीट का प्रकोप बढ़ने से दानों के विकास और गुणवत्ता पर असर पड़ सकता है। समय रहते नियंत्रण नहीं होने पर किसानों को नुकसान उठाना पड़ सकता है। इसे देखते हुए खेतों की निगरानी और कीटों की पहचान जरूरी हो गई है।
वैज्ञानिक सलाह से करें कीट नियंत्रण
कृषि विज्ञान केंद्र सोहना के कृषि वैज्ञानिक डॉ. मार्कंडेय सिंह के अनुसार, धान की फसल में गंधी कीट के नियंत्रण के लिए फेनवलरेट 0.04 प्रतिशत पाउडर का 25 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर की दर से प्रयोग किया जा सकता है। पाउडर उपलब्ध नहीं होने पर इमिडाक्लोप्रिड के प्रयोग का विकल्प भी बताया गया है। हालांकि, इसका इस्तेमाल संबंधित उत्पाद के फॉर्मूलेशन, लेबल पर दिए निर्देश और कृषि विशेषज्ञ की सलाह के अनुसार ही करना चाहिए।
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फसल की नियमित निगरानी जरूरी
जिला प्रशासन की तरफ से किसानों को सलाह दी गई है कि वे बिना विशेषज्ञ की सलाह के कीटनाशकों का अत्यधिक या अनुचित प्रयोग न करें। दवा का छिड़काव करते समय निर्धारित मात्रा और सुरक्षा संबंधी निर्देशों का पालन करें। विशेषज्ञ की सलाह के बिना अलग-अलग रसायनों को मिलाकर छिड़काव करने से बचें। इसके अलावा, धान की बालियों पर फाल्स स्मट यानी कंडुआ रोग के लक्षण दिखाई देने पर उसे गंधी कीट का प्रकोप न समझें। यह फफूंदजनित रोग है। ऐसी स्थिति में कृषि विशेषज्ञ से परामर्श लेकर उचित फफूंदनाशी का प्रयोग करें। किसानों को सलाह दी गई है कि वे खेतों का नियमित निरीक्षण करें और समस्या दिखाई देने पर कृषि वैज्ञानिकों से संपर्क करें, ताकि समय रहते फसल को संभावित नुकसान से बचाया जा सके।
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- कृषि वैज्ञानिक ने कीट नियंत्रण के लिए बताए बचाव के उपाय
सिद्धार्थनगर। डुमरियागंज तहसील क्षेत्र के विभिन्न गांवों में धान की सांभा प्रजाति की फसल पर गंधी कीट का प्रकोप दिखाई देने लगा है। धान में फूल आने और बालियां निकलने के समय कीटों के हमले से किसानों की चिंता बढ़ गई है। दानों के विकास पर असर पड़ने और उत्पादन घटने की आशंका में किसान फसल को बचाने के लिए कीट नियंत्रण के उपाय अपना रहे हैं। कई किसान कीटनाशकों का छिड़काव भी कर रहे हैं।
धान की फसल इस समय महत्वपूर्ण अवस्था में है। ऐसे में गंधी कीट का प्रकोप बढ़ने से दानों के विकास और गुणवत्ता पर असर पड़ सकता है। समय रहते नियंत्रण नहीं होने पर किसानों को नुकसान उठाना पड़ सकता है। इसे देखते हुए खेतों की निगरानी और कीटों की पहचान जरूरी हो गई है।
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वैज्ञानिक सलाह से करें कीट नियंत्रण
कृषि विज्ञान केंद्र सोहना के कृषि वैज्ञानिक डॉ. मार्कंडेय सिंह के अनुसार, धान की फसल में गंधी कीट के नियंत्रण के लिए फेनवलरेट 0.04 प्रतिशत पाउडर का 25 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर की दर से प्रयोग किया जा सकता है। पाउडर उपलब्ध नहीं होने पर इमिडाक्लोप्रिड के प्रयोग का विकल्प भी बताया गया है। हालांकि, इसका इस्तेमाल संबंधित उत्पाद के फॉर्मूलेशन, लेबल पर दिए निर्देश और कृषि विशेषज्ञ की सलाह के अनुसार ही करना चाहिए।
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फसल की नियमित निगरानी जरूरी
जिला प्रशासन की तरफ से किसानों को सलाह दी गई है कि वे बिना विशेषज्ञ की सलाह के कीटनाशकों का अत्यधिक या अनुचित प्रयोग न करें। दवा का छिड़काव करते समय निर्धारित मात्रा और सुरक्षा संबंधी निर्देशों का पालन करें। विशेषज्ञ की सलाह के बिना अलग-अलग रसायनों को मिलाकर छिड़काव करने से बचें। इसके अलावा, धान की बालियों पर फाल्स स्मट यानी कंडुआ रोग के लक्षण दिखाई देने पर उसे गंधी कीट का प्रकोप न समझें। यह फफूंदजनित रोग है। ऐसी स्थिति में कृषि विशेषज्ञ से परामर्श लेकर उचित फफूंदनाशी का प्रयोग करें। किसानों को सलाह दी गई है कि वे खेतों का नियमित निरीक्षण करें और समस्या दिखाई देने पर कृषि वैज्ञानिकों से संपर्क करें, ताकि समय रहते फसल को संभावित नुकसान से बचाया जा सके।