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Siddharthnagar News: 14 महीने के बाद फिर खुलेगी फाइल, नपं अध्यक्ष के पति की बढ़ सकती हैं मुश्किलें

Fri, 23 Jan 2026 11:14 PM IST
गोरखपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर Updated Fri, 23 Jan 2026 11:14 PM IST
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Siddharthnagar News : File to be reopened after 14 months, Municipal Corporation Chairman's husband may increase difficulties
सिद्धार्थनगर। शोहरतगढ़ थाना क्षेत्र में 14 महीने पहले 15 वर्षीय किशोरी की संदिग्ध हालात में मौत के मामले में कोर्ट ने बृहस्पतिवार को शोहरतगढ़ नगर पंचायत अध्यक्ष के पति के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करने का आदेश दिया था। इसके बाद से क्षेत्र में यह चर्चा का विषय बन चुका है। इस मामले में हत्या और सामूहिक दुष्कर्म की पुष्टि नहीं हुई थी। ऐसे में पुलिस ने केस को बंद कर दिया था, लेकिन किशोरी की मां ने कोर्ट का सहारा लिया तो मामले की फाइल फिर से खुल गई है। कोर्ट ने नगर पंचायत अध्यक्ष के पति रवि अग्रवाल व अन्य पर प्राथमिकी दर्ज करने का आदेश दिया था। हालांकि रवि अग्रवाल इसे राजनीति साजिश करार दे रहे हैं। वहीं किशोरी की मां का कहना है कि कोर्ट के आदेश के न्याय की उम्मीद जगी है।
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किशोरी की मां का कहना है कि जब पुलिस से कोई मदद नहीं मिली तो कोेर्ट जाना पड़ा। अब 14 माह बाद प्राथमिकी दर्ज करने का आदेश हुआ तो न्याय की उम्मीद दिखी है। उन्होंने कहा कि जिस दिन आरोपी जेल जाएंगे, उस दिन मेरी बेटी की आत्मा को शांति मिलेगी, मुझे कोर्ट पर पूरा भरोसा है।
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यह था मामला



शोहरतगढ़ कस्बे में 28 नवंबर 2024 को एक शादी समारोह से 15 वर्षीय किशोरी गायब हो गई थी। एक दिसंबर 2024 को मेढवा एनएच-730 हाईवे के किनारे झड़ियों में उसकी लाश मिली थी। मौके पर पुलिस पहुंचकर शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया था। किशोरी की मां ने सामूहिक दुष्कर्म के बाद हत्या करने का आरोप लगाया था। उसने पुलिस से गहनता से जांच करने की गुहार लगाई थी, लेकिन पुलिस पोस्टमार्टम में कुछ स्पष्ट नहीं होने से प्राथमिकी दर्ज करने से इनकार कर दिया था। सुरक्षित विसरा रिपोर्ट में भी कारण स्पष्ट नहीं है।
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पोस्टर्माटम रिपोर्ट ने उलझा दिया

चार दिन से लापता किशोरी की लाश मिलने के बाद पहली नजर में हत्या की आशंका जताई गई, लेकिन पोस्टमार्टम रिपोर्ट ने पूरी कहानी को उलझा दिया। रिपोर्ट में न तो दुष्कर्म की पुष्टि हुई और न ही ऐसी कोई स्पष्ट बाहरी चोट सामने आई, जो मौत का प्रत्यक्ष कारण बने। वहीं पुलिस के पूर्व अधिकारियों का मानना है कि मामला जितना सीधा दिखता था, उतना है नहीं। इस मामले की सही से जांच होनी चाहिए।


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पुलिस की शिथिलता पर सवाल



-लापता होने के शुरुआती घंटों में खोज कितनी प्रभावी थी?

- तकनीकी साक्ष्य (सीडीआर, लोकेशन, सीसीटीवी फुटेज) समय पर जुटाए गए या नहीं

-घटनास्थल और आसपास की कड़ी को जोड़ने में देरी क्यों?





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आगे इस प्रकार से जांच में मिल सकता है क्लू

- विसरा/फोरेंसिक जांच से मौत के कारण की दोबारा पड़ताल हो सकती है

- कॉल डिटेल्स, आखिरी लोकेशन और संपर्कों की गहन जांच

- पोस्टमार्टम निष्कर्षों की विशेषज्ञों से क्रॉस वेरिफिकेशन

- यदि लापरवाही सिद्ध हुई तो जिम्मेदारों पर कार्रवाई

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बोले चेयरमैन पति

राजनीतिक साजिश करके मुझे फंसाने की कोशिश की जा रही है। घटना के एक साल से अधिक समय बीतने के बाद इस तरह का आरोप लगाना अपने आप में संदिग्ध है। मेरी छवि को धूमिल करने के लिए ऐसा किया गया है। मुझे न्यायालय एवं कानून पर पूरा भरोसा है।

रवि अग्रवाल, नगर पंचायत अध्यक्ष पति
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