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Siddharthnagar News: बॉर्डर की सुरक्षा पर अतिक्रमण का ग्रहण
Tue, 13 Oct 2026 11:54 PM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
Updated Tue, 13 Oct 2026 11:54 PM IST
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- खुनुवां में स्थायी अतिक्रमण बरकरार, कार्रवाई के बाद भी नहीं हटे कब्जे
- गृह मंत्रालय के निर्देश पर 69 अस्थायी अतिक्रमण चिह्नित, सितंबर में चला था अभियान
- ग्राम पंचायत की बंजर भूमि पर कब्जे के मामले में 31 लोगों के खिलाफ हो चुका है आदेश
शोहरतगढ़। खुनुवां बॉर्डर पर स्थायी अतिक्रमण नहीं हटने से सीमा की सुरक्षा और यातायात व्यवस्था को लेकर चिंता बढ़ रही है। प्रशासन की ओर से सितंबर में अभियान चलाकर अस्थायी अतिक्रमण हटाए गए थे लेकिन ग्राम पंचायत की बंजर भूमि पर स्थायी कब्जे अब भी बरकरार हैं। इससे प्रशासन की कार्रवाई पर सवाल उठ रहे हैं।
गृह मंत्रालय के निर्देश पर खुनुवां बॉर्डर पर 69 अस्थायी अतिक्रमण चिह्नित किए गए थे। 30 सितंबर को नायब तहसीलदार शोहरतगढ़ माधुर्य यादव और एसएसबी के सहायक कमांडेंट नितेश के नेतृत्व में राजस्व, पुलिस और एसएसबी की संयुक्त टीम ने खुनुवां बॉर्डर पर अभियान चलाया था। इस दौरान नवीन परती, लोक निर्माण विभाग की जमीन और रास्ते की भूमि से अस्थायी अतिक्रमण हटाए गए।
वहीं, खुनुवां ग्राम पंचायत की बंजर भूमि गाटा संख्या 316, जिसका रकबा 0.367 हेक्टेयर है, पर स्थायी कब्जे का मामला अब भी लंबित है। नौ जनवरी 2025 को लेखपाल और राजस्व निरीक्षक की रिपोर्ट के आधार पर आरसी प्रपत्र-20 के तहत अतिक्रमणकारियों को नोटिस जारी किए गए थे। इसके बाद तहसीलदार न्यायिक की अदालत से 31 लोगों के खिलाफ कब्जा हटाने और अर्थदंड के संबंध में आदेश पारित किया गया। इसके बावजूद खुनुवां-शोहरतगढ़ मुख्य मार्ग के दोनों ओर बंजर भूमि पर कब्जे बने हुए हैं।
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अतिक्रमण से यातायात प्रभावित
खुनुवां कस्बे में सड़क किनारे स्थायी अतिक्रमण के कारण आवागमन में परेशानी हो रही है। सीमा व्यापार से जुड़े भारी मालवाहक वाहनों के गुजरने के दौरान जाम लग जाता है। स्थानीय लोगों के अनुसार, कुछ दुकानदारों ने दुकानें सड़क की पटरी तक बढ़ा ली हैं। इससे पैदल चलने वालों और वाहन चालकों को दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। कुछ दुकानों को किराये पर दिए जाने की बात भी सामने आई है।
चेतावनी के बाद भी नहीं हटे कब्जे
30 सितंबर को अभियान के दौरान प्रशासन ने स्थायी कब्जाधारकों को एक सप्ताह के भीतर स्वयं अतिक्रमण हटाने की चेतावनी दी थी। निर्धारित अवधि बीतने के बाद भी कब्जे नहीं हटाए गए। स्थानीय लोगों का कहना है कि सीमा क्षेत्र में सुरक्षा और यातायात व्यवस्था बनाए रखने के लिए सार्वजनिक भूमि को अतिक्रमण मुक्त कराना जरूरी है।
बोले जिम्मेदार
30 सितंबर को खुनुवां में अतिक्रमण के खिलाफ कार्रवाई की गई थी। करीब 69 लोगों को नोटिस देकर एक सप्ताह के भीतर स्वयं कब्जा हटाने के लिए कहा गया था लेकिन किसी ने कब्जा नहीं हटाया। दशहरा के बाद दोबारा अभियान चलाकर कब्जे हटाए जाएंगे।
- माधवेंद्र प्रताप सिंह, तहसीलदार, शोहरतगढ़
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- गृह मंत्रालय के निर्देश पर 69 अस्थायी अतिक्रमण चिह्नित, सितंबर में चला था अभियान
- ग्राम पंचायत की बंजर भूमि पर कब्जे के मामले में 31 लोगों के खिलाफ हो चुका है आदेश
शोहरतगढ़। खुनुवां बॉर्डर पर स्थायी अतिक्रमण नहीं हटने से सीमा की सुरक्षा और यातायात व्यवस्था को लेकर चिंता बढ़ रही है। प्रशासन की ओर से सितंबर में अभियान चलाकर अस्थायी अतिक्रमण हटाए गए थे लेकिन ग्राम पंचायत की बंजर भूमि पर स्थायी कब्जे अब भी बरकरार हैं। इससे प्रशासन की कार्रवाई पर सवाल उठ रहे हैं।
गृह मंत्रालय के निर्देश पर खुनुवां बॉर्डर पर 69 अस्थायी अतिक्रमण चिह्नित किए गए थे। 30 सितंबर को नायब तहसीलदार शोहरतगढ़ माधुर्य यादव और एसएसबी के सहायक कमांडेंट नितेश के नेतृत्व में राजस्व, पुलिस और एसएसबी की संयुक्त टीम ने खुनुवां बॉर्डर पर अभियान चलाया था। इस दौरान नवीन परती, लोक निर्माण विभाग की जमीन और रास्ते की भूमि से अस्थायी अतिक्रमण हटाए गए।
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वहीं, खुनुवां ग्राम पंचायत की बंजर भूमि गाटा संख्या 316, जिसका रकबा 0.367 हेक्टेयर है, पर स्थायी कब्जे का मामला अब भी लंबित है। नौ जनवरी 2025 को लेखपाल और राजस्व निरीक्षक की रिपोर्ट के आधार पर आरसी प्रपत्र-20 के तहत अतिक्रमणकारियों को नोटिस जारी किए गए थे। इसके बाद तहसीलदार न्यायिक की अदालत से 31 लोगों के खिलाफ कब्जा हटाने और अर्थदंड के संबंध में आदेश पारित किया गया। इसके बावजूद खुनुवां-शोहरतगढ़ मुख्य मार्ग के दोनों ओर बंजर भूमि पर कब्जे बने हुए हैं।
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अतिक्रमण से यातायात प्रभावित
खुनुवां कस्बे में सड़क किनारे स्थायी अतिक्रमण के कारण आवागमन में परेशानी हो रही है। सीमा व्यापार से जुड़े भारी मालवाहक वाहनों के गुजरने के दौरान जाम लग जाता है। स्थानीय लोगों के अनुसार, कुछ दुकानदारों ने दुकानें सड़क की पटरी तक बढ़ा ली हैं। इससे पैदल चलने वालों और वाहन चालकों को दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। कुछ दुकानों को किराये पर दिए जाने की बात भी सामने आई है।
चेतावनी के बाद भी नहीं हटे कब्जे
30 सितंबर को अभियान के दौरान प्रशासन ने स्थायी कब्जाधारकों को एक सप्ताह के भीतर स्वयं अतिक्रमण हटाने की चेतावनी दी थी। निर्धारित अवधि बीतने के बाद भी कब्जे नहीं हटाए गए। स्थानीय लोगों का कहना है कि सीमा क्षेत्र में सुरक्षा और यातायात व्यवस्था बनाए रखने के लिए सार्वजनिक भूमि को अतिक्रमण मुक्त कराना जरूरी है।
बोले जिम्मेदार
30 सितंबर को खुनुवां में अतिक्रमण के खिलाफ कार्रवाई की गई थी। करीब 69 लोगों को नोटिस देकर एक सप्ताह के भीतर स्वयं कब्जा हटाने के लिए कहा गया था लेकिन किसी ने कब्जा नहीं हटाया। दशहरा के बाद दोबारा अभियान चलाकर कब्जे हटाए जाएंगे।
- माधवेंद्र प्रताप सिंह, तहसीलदार, शोहरतगढ़