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Siddharthnagar News: नैनो मटेरियल्स के साथ पॉलिमर की उत्प्रेरक दक्षता में वृद्धि पर शोध करेंगी डॉ. शिल्पी
Sat, 30 Aug 2025 12:02 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
Updated Sat, 30 Aug 2025 12:02 AM IST
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- डॉ. शिल्पी श्रीवास्तव को विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद से मिली अनुसंधान राशि
सिद्धार्थनगर। सिद्धार्थ विश्वविद्यालय कपिलवस्तु की विज्ञान संकाय की सहायक प्रोफेसर डॉ. शिल्पी श्रीवास्तव को विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद की ओर से 11 लाख की अनुसंधान राशि प्रदान की गई है। यह परियोजना नैनो मटेरियल्स के साथ पॉलिमर की उत्प्रेरक दक्षता में वृद्धि विषय पर केंद्रित है।
डॉ. शिल्पी श्रीवास्तव ने बताया कि वर्तमान समय में ऊर्जा, पर्यावरण तथा औद्योगिक प्रक्रियाओं में उच्च दक्षता वाले उत्प्रेरकों की आवश्यकता निरंतर बढ़ रही है। पारंपरिक उत्प्रेरक सीमित सतह क्षेत्र, कम स्थायित्व और अधिक ऊर्जा खपत जैसी चुनौतियों से ग्रसित होते हैं। पॉलिमर आधारित उत्प्रेरकों में लचीलापन, सरल संश्लेषण और स्थायित्व जैसे गुण तो पाए जाते हैं, लेकिन उनकी उत्प्रेरक दक्षता अपेक्षाकृत कम होती है। इस परियोजना के अंतर्गत ग्रेफीन, कार्बन नैनोट्यूब्स, धातु ऑक्साइड नैनोकण तथा क्वांटम डॉट्स जैसे नैनो मटेरियल्स को पॉलिमर के साथ संयोजित कर उनकी दक्षता को उल्लेखनीय रूप से बढ़ाने का प्रयास किया जाएगा। उन्होंने कहा कि इस परियोजना के सफल निष्पादन से नवीकरणीय ऊर्जा प्रौद्योगिकी में नई प्रगति संभव होगी जो भारत के स्थायी ऊर्जा समाधानों की दिशा में योगदान करेगी। कुलपति प्रो. कविता शाह ने हर्ष व्यक्त करते हुए कहा कि यह उपलब्धि विश्वविद्यालय की शैक्षणिक एवं अनुसंधान गतिविधियों को नई दिशा प्रदान करेगी।
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सिद्धार्थनगर। सिद्धार्थ विश्वविद्यालय कपिलवस्तु की विज्ञान संकाय की सहायक प्रोफेसर डॉ. शिल्पी श्रीवास्तव को विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद की ओर से 11 लाख की अनुसंधान राशि प्रदान की गई है। यह परियोजना नैनो मटेरियल्स के साथ पॉलिमर की उत्प्रेरक दक्षता में वृद्धि विषय पर केंद्रित है।
डॉ. शिल्पी श्रीवास्तव ने बताया कि वर्तमान समय में ऊर्जा, पर्यावरण तथा औद्योगिक प्रक्रियाओं में उच्च दक्षता वाले उत्प्रेरकों की आवश्यकता निरंतर बढ़ रही है। पारंपरिक उत्प्रेरक सीमित सतह क्षेत्र, कम स्थायित्व और अधिक ऊर्जा खपत जैसी चुनौतियों से ग्रसित होते हैं। पॉलिमर आधारित उत्प्रेरकों में लचीलापन, सरल संश्लेषण और स्थायित्व जैसे गुण तो पाए जाते हैं, लेकिन उनकी उत्प्रेरक दक्षता अपेक्षाकृत कम होती है। इस परियोजना के अंतर्गत ग्रेफीन, कार्बन नैनोट्यूब्स, धातु ऑक्साइड नैनोकण तथा क्वांटम डॉट्स जैसे नैनो मटेरियल्स को पॉलिमर के साथ संयोजित कर उनकी दक्षता को उल्लेखनीय रूप से बढ़ाने का प्रयास किया जाएगा। उन्होंने कहा कि इस परियोजना के सफल निष्पादन से नवीकरणीय ऊर्जा प्रौद्योगिकी में नई प्रगति संभव होगी जो भारत के स्थायी ऊर्जा समाधानों की दिशा में योगदान करेगी। कुलपति प्रो. कविता शाह ने हर्ष व्यक्त करते हुए कहा कि यह उपलब्धि विश्वविद्यालय की शैक्षणिक एवं अनुसंधान गतिविधियों को नई दिशा प्रदान करेगी।
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