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सिद्धार्थ विश्वविद्यालय : कछुए के डीएनए व जीनोम पर की चर्चा
Wed, 30 Sep 2026 11:24 PM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
Updated Wed, 30 Sep 2026 11:24 PM IST
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सिद्धार्थनगर। सिद्धार्थ विश्वविद्यालय कपिलवस्तु के प्राणी विज्ञान विभाग की ओर से बुधवार को अंतरराष्ट्रीय व्याख्यान शृंखला के क्रम में कछुओं के आनुवंशिक अध्ययन पर विशेष व्याख्यान आयोजित किया गया।
राष्ट्रीय ताइवान महासागर विश्वविद्यालय, कीलुंग, ताइवान की सहायक प्रोफेसर डॉ. सोफिया पी. दास ने वर्चुअल माध्यम से बटागुर कछुए के डीएनए और माइटोकॉन्ड्रियल जीनोम से जुड़े वैज्ञानिक पहलुओं की जानकारी दी।
संबोधि केंद्रीय पुस्तकालय के सेमिनार हॉल में आयोजित कार्यक्रम में ‘कछुए के डीएनए को समझना: बटागुर कछुआ के माइटोकॉन्ड्रियल जीनोम का गहन अध्ययन’ विषय पर आयोजित व्याख्यान में उन्होंने कहा कि कछुओं के आनुवंशिक और माइटोकॉन्ड्रियल जीनोम का अध्ययन उनकी जैव विविधता, विकासक्रम और आनुवंशिक संरचना को समझने में महत्वपूर्ण है। आधुनिक आणविक तकनीकों और डीएनए विश्लेषण के माध्यम से प्रजातियों की पहचान, आनुवंशिक विविधता के संरक्षण और प्रजातियों के संरक्षण व प्रबंधन के लिए वैज्ञानिक रणनीतियां विकसित करने में मदद मिलती है।
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कार्यक्रम की अध्यक्षता प्राणी विज्ञान विभाग के अध्यक्ष डॉ. आशुतोष श्रीवास्तव ने की। उन्होंने बटागुर कछुए जैसी संरक्षण की दृष्टि से संवेदनशील प्रजातियों के आनुवंशिक अध्ययन की आवश्यकता पर जोर दिया। कार्यक्रम का संचालन और विषय प्रस्तावना सह संयोजक डॉ. आशीष श्रीवास्तव ने की।
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राष्ट्रीय ताइवान महासागर विश्वविद्यालय, कीलुंग, ताइवान की सहायक प्रोफेसर डॉ. सोफिया पी. दास ने वर्चुअल माध्यम से बटागुर कछुए के डीएनए और माइटोकॉन्ड्रियल जीनोम से जुड़े वैज्ञानिक पहलुओं की जानकारी दी।
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संबोधि केंद्रीय पुस्तकालय के सेमिनार हॉल में आयोजित कार्यक्रम में ‘कछुए के डीएनए को समझना: बटागुर कछुआ के माइटोकॉन्ड्रियल जीनोम का गहन अध्ययन’ विषय पर आयोजित व्याख्यान में उन्होंने कहा कि कछुओं के आनुवंशिक और माइटोकॉन्ड्रियल जीनोम का अध्ययन उनकी जैव विविधता, विकासक्रम और आनुवंशिक संरचना को समझने में महत्वपूर्ण है। आधुनिक आणविक तकनीकों और डीएनए विश्लेषण के माध्यम से प्रजातियों की पहचान, आनुवंशिक विविधता के संरक्षण और प्रजातियों के संरक्षण व प्रबंधन के लिए वैज्ञानिक रणनीतियां विकसित करने में मदद मिलती है।
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कार्यक्रम की अध्यक्षता प्राणी विज्ञान विभाग के अध्यक्ष डॉ. आशुतोष श्रीवास्तव ने की। उन्होंने बटागुर कछुए जैसी संरक्षण की दृष्टि से संवेदनशील प्रजातियों के आनुवंशिक अध्ययन की आवश्यकता पर जोर दिया। कार्यक्रम का संचालन और विषय प्रस्तावना सह संयोजक डॉ. आशीष श्रीवास्तव ने की।