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Siddharthnagar News: अमहवा में डायरिया का प्रकोप थमा...पानी से खतरा बरकरार
Sat, 27 Sep 2025 06:42 PM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
Updated Sat, 27 Sep 2025 06:42 PM IST
सार
लोटन के बस्तिया गांव के अमहवा टोला में दूषित पानी से फैले डायरिया के कारण दो लोगों की मौत हुई थी। स्वास्थ्य विभाग की टीम ने स्थिति संभाली है, लेकिन शुद्ध पानी की व्यवस्था न होने से खतरा बना हुआ है। प्रशासन द्वारा लाल निशान लगे नलों से लोग मजबूरी में पानी पी रहे हैं।
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लोटन क्षेत्र के ग्राम पंचायत बस्तियां के टोला अमहवा में बैठी स्वास्थ्य विभाग की टीम। संवाद
विस्तार
लोटन। स्थानीय ब्लाॅक क्षेत्र के बस्तिया गांव के टोला अमहवा में दूषित पानी की वजह से लोग डायरिया की चपेट में आए लोग स्वस्थ हो रहे हैं। डायरिया का प्रकोप तो थम गया है, लेकिन अभी दूषित पानी से खतरा बरकरार है।
वहीं बृहस्पतिवार दोपहर बाद स्वास्थ्य टीम गांव में गई थी। पीड़ित मरीजों को दवा दी। शुक्रवार सुबह में मुख्यालय से एक टीम गांव में डटी रही और लोगों को टैंकर का पानी पीने के लिए जागरूक करती रही। बीमार लोगों की सेहत की जांच करने के साथ ही दवा का वितरण किया गया। फिलहाल कोई नया मरीज सामने नहीं आया और न ही कोई गंभीर है। बीमार होने के बाद जो निजी अस्पताल गए थे, उनकी हालत भी अब सही बताई जा रही है।
गांव में शुद्ध पेयजल की व्यवस्था नहीं है। लाल निशान लगे देसी नल से लोग प्यास बुझा रहे हैं। वहीं, इंडिया मार्का हैंडपंप दम तोड़ चुके हैं। कपिलवस्तु नगर पंचायत से सुबह और शाम को एक-एक टैंकर पानी आ रहा है। स्वास्थ्य विभाग की जांच में भी बीमारी के पीछे पानी को ही मुख्य कारण बताया गया है। रिपोर्ट तैयार करके शासन को भेजने की बात की जा रही है, जिससे पेयजल व्यवस्था सही हो सके।
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लोटन ब्लाॅक क्षेत्र के ग्राम पंचायत बस्तियां के टोला अमहवा में पांच दिन पहले फैले डायरिया से दो लोगों के मौत के बाद जिले व सीएचसी लोटन की टीम ने स्थिति को संभाल लिया है। पांचवें दिन शाम तक कोई नया मरीज नहीं मिला, जिससे स्वास्थ्य विभाग राहत की सांस ली है। फिलहाल एहतियातन देखभाल के लिए मौके पर टीम मौजूद रही।
ग्रामीणों ने बताया कि शुद्ध पानी की व्यवस्था न होने के कारण ही बीमारी फैली है। 500 आबादी वाले गांव में तीन इंडिया मार्का पंप था जो खराब होने के बाद रिबोर न होने से उखाड़ कर रख लिया है। एक नल में छोटा नल बोर में डाल कर पानी का उपयोग किया जा रहा था और उसी घर के लोग ज्यादा बीमार हो गए।
ग्रामीणों ने बताया कि रिबोर के लिए कई बार सचिव से कहा गया, लेकिन उन्होंने ध्यान नहीं दिया। इधर हर घर जल योजना के तहत पाइप लगा है, लेकिन जल निगम के लापरवाही से अभी तक सप्लाई नहीं शुरू हो पा रही है। मजबूर होकर लोग कम गहराई के नल लगा कर पानी पी रहे हैं। गांव में आज भी लाल निशान लगे हैंडपंप से लोग पानी पी रहे हैं।
इस हैंडपंप के पानी को पीने योग्य नहीं है, इसके लिए प्रशासन ने लाल निशान लगाया है। लेकिन कोई दूसरा विकल्प न होने के कारण जानते हुए भी लोग बीमार कर देने वाला दूषित पानी पीने को मजबूर रहे हैं। डॉक्टर भी डायरिया के पीछे पानी को मुख्य कारण मान रहे हैं।
बोले निजी अस्पताल में भर्ती मरीजों के परिजन: सरकारी अस्पताल के बजाय प्राइवेट अस्पताल में दिखाने के सवाल पर रामचरन ने बताया कि ठीक होने के बाद शाम को घर आने के बाद फोन पर बताया कि तबीयत खराब होने के बाद जल्दी उपचार की जरूरत रहती है। डर से मरीज को जल्दी ठीक कराने के लिए प्राइवेट अस्पताल का सहारा लिया जाता है।
बीमार लवकुश के पिता रामधनी ने बताया कि घर में मौत होने के बाद हम डर गए थे। जल्दी से उपचार हो जाए इसलिए प्राइवेट अस्पताल में भर्ती करवाया। जब कंट्रोल नहीं हुआ तो सरकारी अस्पताल में इलाज चल रहा है। जहां मेरा लड़का पूरी तरह से ठीक है।
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वहीं बृहस्पतिवार दोपहर बाद स्वास्थ्य टीम गांव में गई थी। पीड़ित मरीजों को दवा दी। शुक्रवार सुबह में मुख्यालय से एक टीम गांव में डटी रही और लोगों को टैंकर का पानी पीने के लिए जागरूक करती रही। बीमार लोगों की सेहत की जांच करने के साथ ही दवा का वितरण किया गया। फिलहाल कोई नया मरीज सामने नहीं आया और न ही कोई गंभीर है। बीमार होने के बाद जो निजी अस्पताल गए थे, उनकी हालत भी अब सही बताई जा रही है।
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गांव में शुद्ध पेयजल की व्यवस्था नहीं है। लाल निशान लगे देसी नल से लोग प्यास बुझा रहे हैं। वहीं, इंडिया मार्का हैंडपंप दम तोड़ चुके हैं। कपिलवस्तु नगर पंचायत से सुबह और शाम को एक-एक टैंकर पानी आ रहा है। स्वास्थ्य विभाग की जांच में भी बीमारी के पीछे पानी को ही मुख्य कारण बताया गया है। रिपोर्ट तैयार करके शासन को भेजने की बात की जा रही है, जिससे पेयजल व्यवस्था सही हो सके।
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लोटन ब्लाॅक क्षेत्र के ग्राम पंचायत बस्तियां के टोला अमहवा में पांच दिन पहले फैले डायरिया से दो लोगों के मौत के बाद जिले व सीएचसी लोटन की टीम ने स्थिति को संभाल लिया है। पांचवें दिन शाम तक कोई नया मरीज नहीं मिला, जिससे स्वास्थ्य विभाग राहत की सांस ली है। फिलहाल एहतियातन देखभाल के लिए मौके पर टीम मौजूद रही।
ग्रामीणों ने बताया कि शुद्ध पानी की व्यवस्था न होने के कारण ही बीमारी फैली है। 500 आबादी वाले गांव में तीन इंडिया मार्का पंप था जो खराब होने के बाद रिबोर न होने से उखाड़ कर रख लिया है। एक नल में छोटा नल बोर में डाल कर पानी का उपयोग किया जा रहा था और उसी घर के लोग ज्यादा बीमार हो गए।
ग्रामीणों ने बताया कि रिबोर के लिए कई बार सचिव से कहा गया, लेकिन उन्होंने ध्यान नहीं दिया। इधर हर घर जल योजना के तहत पाइप लगा है, लेकिन जल निगम के लापरवाही से अभी तक सप्लाई नहीं शुरू हो पा रही है। मजबूर होकर लोग कम गहराई के नल लगा कर पानी पी रहे हैं। गांव में आज भी लाल निशान लगे हैंडपंप से लोग पानी पी रहे हैं।
इस हैंडपंप के पानी को पीने योग्य नहीं है, इसके लिए प्रशासन ने लाल निशान लगाया है। लेकिन कोई दूसरा विकल्प न होने के कारण जानते हुए भी लोग बीमार कर देने वाला दूषित पानी पीने को मजबूर रहे हैं। डॉक्टर भी डायरिया के पीछे पानी को मुख्य कारण मान रहे हैं।
बोले निजी अस्पताल में भर्ती मरीजों के परिजन: सरकारी अस्पताल के बजाय प्राइवेट अस्पताल में दिखाने के सवाल पर रामचरन ने बताया कि ठीक होने के बाद शाम को घर आने के बाद फोन पर बताया कि तबीयत खराब होने के बाद जल्दी उपचार की जरूरत रहती है। डर से मरीज को जल्दी ठीक कराने के लिए प्राइवेट अस्पताल का सहारा लिया जाता है।
बीमार लवकुश के पिता रामधनी ने बताया कि घर में मौत होने के बाद हम डर गए थे। जल्दी से उपचार हो जाए इसलिए प्राइवेट अस्पताल में भर्ती करवाया। जब कंट्रोल नहीं हुआ तो सरकारी अस्पताल में इलाज चल रहा है। जहां मेरा लड़का पूरी तरह से ठीक है।