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Siddharthnagar News: बारिश में धुल गया हवा में घुला जहर, सांसों को हुई आसानी

Fri, 31 Oct 2025 12:22 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर Updated Fri, 31 Oct 2025 12:22 AM IST
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Siddharthnagar News : AQI slows down after rain, no more trouble breathing
शहर में उड़ रहा पटाखे का धुवा। फाइल फोटो
संवाद न्यूज एजेंसी
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सिद्धार्थनगर। त्योहारों की रोशनी और पटाखों की धमक ने कुछ दिनों तक जिले की हवा को जहरीला बना दिया। दशहरा से छठ तक 400 क्विंटल से अधिक पटाखा जलने से एक्यूआई 162 पहुंचा गया। मगर बुधवार देर शाम से शुरू हुई बारिश ने वातावरण में फैले जहर काे धो दिया है।
एक्यूआई का स्तर घटकर 80 के आसपास आ गया है, जिससे हवा अब सामान्य श्रेणी के आसपास लौट आई है। विशेषज्ञों के मुताबिक दीपावली के बाद बारिश के होने से पटाखे का धुआं और मौसम में नरमी होने के कारण प्रदूषण की बनी हुई लेयर धुल गई है, जिससे सांस के रोगियों को बड़ी राहत मिली है।
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दशहरा से लेकर दीपावली और छठ तक जिले के बांसी, शोहरतगढ़, डुमरियागंज, इटवा और नौगढ़ जैसे इलाकों में रातभर पटाखों की गूंज रही। इन दिनों हवा में सल्फर डाइऑक्साइड और सूक्ष्म धूलकणों की मात्रा कई गुना बढ़ गई। अस्पतालों में सांस और आंखों की तकलीफ वाले मरीजों की संख्या तेजी से बढ़ी।
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डुमरियागंज और बांसी के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों पर जहां रोजाना 10-12 मरीज पहुंच रहे थे, वहीं माधव प्रसाद त्रिपाठी मेडिकल कॉलेज के आकड़ों के बात करें तो 21 अक्तूबर के बाद से रोगियों की संख्या में तेजी से वृद्धि देखने को मिली थी। 24 घंटे में 10 मरीज पहुंचने लगे थे, यह आंकड़ा बढ़ते हुए बृहस्पतिवार दोपहर तक 24 घंटे में 19 मरीज इलाज के लिए पहुंचे थे, जिन्हें कुछ घंटे के लिए ऑक्सीजन देनी पड़ा। इनकी औसत आयु 40 से 80 साल से अधिक रही।
वहीं, ओपीडी की बात करें तो मेडिसिन विभाग में सांस से जुड़ी समस्या के 10 से 12 मरीज पहुंच रहे हैं। इनमें सीने में भारीपन, सांस में तकलीफ की समस्या थी। डॉक्टर हिस्ट्री जानने के साथ ही गुबार वाले स्थान पर जाने से मना कर रहे थे। साथ ही अस्थमा के रोगियों नियमित दवा और ठंड वस्तु के सेवन से बचने की सलाह दे रहे हैं। इसके साथ ही बच्चों के स्वास्थ्य पर भी विशेष ध्यान देने की सलाह दे रहे हैं।

आगे कम रहेगा प्रदूषण का असर : स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार पिछले दो हफ्तों में सांस और खांसी की शिकायत वाले मरीजों की संख्या दोगुनी हो गई थी। दीपावली और छठ के बाद प्रदूषण चरम पर था। बारिश के बाद हवा साफ हुई है, जिससे मरीजों को काफी राहत मिली है। अगर मौसम ऐसा ही रहा तो प्रदूषण का असर अगले तीन महीने तक कम रहेगा।
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