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Siddharthnagar News: जुर्माने तक सिमटी कार्रवाई... मिलावटखोर बेलगाम
Sun, 07 Dec 2025 12:15 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
Updated Sun, 07 Dec 2025 12:15 AM IST
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शहर में दूध को फाड़ कर पनीर बनाते कारीगर। संवाद
सिद्धार्थनगर। जिले में खाद्य पदार्थों में मिलावट का खेल लगातार जारी है। मिलावट खोर बेखौफ होकर मनमाने ढंग से मिलावट कर रहे हैं, जिससे लोगों की सेहत खराब हो रही है।
खाद्य सुरक्षा विभाग द्वारा पिछले दो माह में लिए गए नमूनों की जांच रिपोर्ट में 70 प्रतिशत तक नमूने अधोमानक मिले हैं। सबसे खराब स्थिति पनीर की है, जिसमें यूरिया और सिंथेटिक पाउडर की मिलावट सामने आई है, वहीं हल्दी में कृत्रिम रंग और चावल के छोटे-छोटे टुकड़े मिलने की पुष्टि हुई है।
ब्रांड को छोड़ दिया जाए बाकी लोकल लेवल पर बाजारों में खुले और पैकेट में बड़ी मात्रा में गड़बड़ी है। सबसे खराब क्वालिटी और बचे हुए हल्दी को पाउडर बना दिया जा रहा है। वजन बढ़ाने के लिए चावल टूटे हुए हिस्से और घातक केमिकल डाला जाता है, जिसे कलर तेजी से आ जाए।
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स्वास्थ्य विशेषज्ञों की कहना है कि इसके नियमित लंबे समय तक सेवन से कैंसर जैसी गंभीर बीमारी का शिकार भी हो सकते हैं। आज तेजी से हार्ट अटैक, किडनी फेल्योर और कैंसर जैसी बीमारी के जो मामले बढ़ रहे हैं। कहीं ना कहीं मिलावटी तेल मिलावटी पनीर केमिकल वाले पाउडर से बने वस्तु के सेवन प्रमुख कारण है। ऐसे में किसी भी वस्तु के सेवन करने से पहले उसकी परख जरूरी है क्योंकि सेहत की बात है। पकड़ी गई थी नकली पनीर की फैक्टरी: मिलावट के खिलाफ पूर्ति विभाग का अभियान जारी है। इसके बाद भी जनपद में मिलावटी पनीर दूध को आज की बिक्री तेजी से हो रही है। अभी पिछले माह मिश्रौलिया में अवैध रूप से चल रही पनीर फैक्टरी पकड़ी गई थी, जहां केमिकल मिलाकर नकली पनीर तैयार किया जा रहा था। वहीं,डुमरियागंज और बांसी में भी बड़ी मात्रा में मिलावटी पनीर नष्ट कराया गया था।
लगातार हो रही कार्रवाई के बावजूद बाजार में मिलावटखोरों के हौसले कम नहीं हुए हैं। खाद्य विभाग के अधिकारियों के जुड़े त्योहारों के दौरान लिए गए अधिकांश नमूनों में मिलावट की मात्रा निर्धारित मानकों से कई गुना अधिक पाई गई, जिसके बाद कई दुकानों और गोदामों का निरीक्षण तेज कर दिया गया है।
पांच साल तक का जुर्माना: फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड एक्ट के तहत मिलावट पाए जाने पर पांच लाख तक का जुर्माना और 6 माह की जेल का प्रावधान है। अगर मिलावट से स्वास्थ्य को गंभीर नुकसान होता है तो सजा सात साल तक बढ़ सकती है। मौत होने की स्थिति में यह अपराध गैर-जमानती हो जाता है और आजीवन कारावास तक संभव।
बार-बार पकड़े जाने वालों पर स्थायी लाइसेंस निरस्तीकरण और संपत्ति सील करने जैसी कड़ी कार्रवाई जरूरी है। अवैध फैक्ट्री संचालकों पर गैंगस्टर एक्ट जैसी कठोर धाराओं के तहत भी कार्रवाई की जा सकती है।
70 प्रतिशत नमूने फेल: पनीर, दूध उत्पाद, मसाले शीर्ष पर मिश्रौलिया में पकड़ी गई अवैध फैक्टरी से बड़े पैमाने पर नकली पनीर की सप्लाई की जा रही थी।डुमरियागंज और बांसी में सैकड़ों किलो मिलावटी उत्पाद नष्ट कराए गए। कई दुकानों को नोटिस, कुछ का लाइसेंस निरस्त किया गया। नमूना जांच में फेल दुकानों की सूची तैयार की गई है और आगे की कार्रवाई की तैयारी है।
122 में 80 नमूने हो गए फेल, सबसे अधिक पनीर और खोआ के : खाद सुरक्षा विभाग की ओर से लगातार धीरे-धीरे रिपोर्ट आते रहे हैं। त्योहारों में हुई छापामारी की रिपोर्ट धीरे-धीरे करके आने लगी है। इसमें सबसे अधिक मिलावट दूध, खोआ और पनीर में पाया गया है। इसके अलावा हल्दी पाउडर में भी मिलावट होने की पुष्टि हुई है। इसमें कलर बेहतर करने के लिए सिंथेटिक कलर डाले जाने की बात सामने आई है।
277 सैंपलिंग में 122 की रिपोर्ट अब तक कई चरण में प्राप्त हो चुकी है। इसमें 80 नमूने फेल हुए हैं। खाद्य सुरक्षा विभाग की रिपोर्ट के मुताबिक मार्च से अब तक 131 मामले में निर्णय हुआ है। एडीएम कोर्ट की ओर से 19 लाख 38 हजार जुर्माना लगाया गया है। वहीं, एक मामले में दोषी पाए जाने पर 2 साल की सजा सुनाई गई है।
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खाद्य सुरक्षा विभाग द्वारा पिछले दो माह में लिए गए नमूनों की जांच रिपोर्ट में 70 प्रतिशत तक नमूने अधोमानक मिले हैं। सबसे खराब स्थिति पनीर की है, जिसमें यूरिया और सिंथेटिक पाउडर की मिलावट सामने आई है, वहीं हल्दी में कृत्रिम रंग और चावल के छोटे-छोटे टुकड़े मिलने की पुष्टि हुई है।
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ब्रांड को छोड़ दिया जाए बाकी लोकल लेवल पर बाजारों में खुले और पैकेट में बड़ी मात्रा में गड़बड़ी है। सबसे खराब क्वालिटी और बचे हुए हल्दी को पाउडर बना दिया जा रहा है। वजन बढ़ाने के लिए चावल टूटे हुए हिस्से और घातक केमिकल डाला जाता है, जिसे कलर तेजी से आ जाए।
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स्वास्थ्य विशेषज्ञों की कहना है कि इसके नियमित लंबे समय तक सेवन से कैंसर जैसी गंभीर बीमारी का शिकार भी हो सकते हैं। आज तेजी से हार्ट अटैक, किडनी फेल्योर और कैंसर जैसी बीमारी के जो मामले बढ़ रहे हैं। कहीं ना कहीं मिलावटी तेल मिलावटी पनीर केमिकल वाले पाउडर से बने वस्तु के सेवन प्रमुख कारण है। ऐसे में किसी भी वस्तु के सेवन करने से पहले उसकी परख जरूरी है क्योंकि सेहत की बात है। पकड़ी गई थी नकली पनीर की फैक्टरी: मिलावट के खिलाफ पूर्ति विभाग का अभियान जारी है। इसके बाद भी जनपद में मिलावटी पनीर दूध को आज की बिक्री तेजी से हो रही है। अभी पिछले माह मिश्रौलिया में अवैध रूप से चल रही पनीर फैक्टरी पकड़ी गई थी, जहां केमिकल मिलाकर नकली पनीर तैयार किया जा रहा था। वहीं,डुमरियागंज और बांसी में भी बड़ी मात्रा में मिलावटी पनीर नष्ट कराया गया था।
लगातार हो रही कार्रवाई के बावजूद बाजार में मिलावटखोरों के हौसले कम नहीं हुए हैं। खाद्य विभाग के अधिकारियों के जुड़े त्योहारों के दौरान लिए गए अधिकांश नमूनों में मिलावट की मात्रा निर्धारित मानकों से कई गुना अधिक पाई गई, जिसके बाद कई दुकानों और गोदामों का निरीक्षण तेज कर दिया गया है।
पांच साल तक का जुर्माना: फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड एक्ट के तहत मिलावट पाए जाने पर पांच लाख तक का जुर्माना और 6 माह की जेल का प्रावधान है। अगर मिलावट से स्वास्थ्य को गंभीर नुकसान होता है तो सजा सात साल तक बढ़ सकती है। मौत होने की स्थिति में यह अपराध गैर-जमानती हो जाता है और आजीवन कारावास तक संभव।
बार-बार पकड़े जाने वालों पर स्थायी लाइसेंस निरस्तीकरण और संपत्ति सील करने जैसी कड़ी कार्रवाई जरूरी है। अवैध फैक्ट्री संचालकों पर गैंगस्टर एक्ट जैसी कठोर धाराओं के तहत भी कार्रवाई की जा सकती है।
70 प्रतिशत नमूने फेल: पनीर, दूध उत्पाद, मसाले शीर्ष पर मिश्रौलिया में पकड़ी गई अवैध फैक्टरी से बड़े पैमाने पर नकली पनीर की सप्लाई की जा रही थी।डुमरियागंज और बांसी में सैकड़ों किलो मिलावटी उत्पाद नष्ट कराए गए। कई दुकानों को नोटिस, कुछ का लाइसेंस निरस्त किया गया। नमूना जांच में फेल दुकानों की सूची तैयार की गई है और आगे की कार्रवाई की तैयारी है।
122 में 80 नमूने हो गए फेल, सबसे अधिक पनीर और खोआ के : खाद सुरक्षा विभाग की ओर से लगातार धीरे-धीरे रिपोर्ट आते रहे हैं। त्योहारों में हुई छापामारी की रिपोर्ट धीरे-धीरे करके आने लगी है। इसमें सबसे अधिक मिलावट दूध, खोआ और पनीर में पाया गया है। इसके अलावा हल्दी पाउडर में भी मिलावट होने की पुष्टि हुई है। इसमें कलर बेहतर करने के लिए सिंथेटिक कलर डाले जाने की बात सामने आई है।
277 सैंपलिंग में 122 की रिपोर्ट अब तक कई चरण में प्राप्त हो चुकी है। इसमें 80 नमूने फेल हुए हैं। खाद्य सुरक्षा विभाग की रिपोर्ट के मुताबिक मार्च से अब तक 131 मामले में निर्णय हुआ है। एडीएम कोर्ट की ओर से 19 लाख 38 हजार जुर्माना लगाया गया है। वहीं, एक मामले में दोषी पाए जाने पर 2 साल की सजा सुनाई गई है।